प्र1.
पुस्तक में दिए गए क्यू.आर. कोड की सहायता से आप प्रेमचंद के बारे में और जान-समझ सकते हैं, साथ ही उनकी अन्य कहानियों का आनंद भी उठा सकते हैं— • ईदगाह • नादान दोस्त • दो बैलों की कथा
उत्तर
यह खोजबीन और पढ़ने की परियोजना है। क्यू.आर. कोड स्कैन कीजिए, या ये कहानियाँ पुस्तकालय से लेकर पढ़िए। नीचे तीनों का छोटा परिचय है, ताकि आप जान सकें कि किसमें क्या मिलेगा।
| कहानी | किसके बारे में | क्या सिखाती है | ‘परीक्षा’ से क्या मिलता-जुलता है |
|---|---|---|---|
| ईदगाह | चार-पाँच साल का हामिद, जो ईद के मेले में मिले तीन पैसों से मिठाई-खिलौने नहीं, दादी अमीना के लिए चिमटा ख़रीद लाता है | सच्चा प्रेम अपने सुख से पहले दूसरे की तकलीफ़ देखता है | दोनों में एक व्यक्ति चुपचाप दूसरे का दुख दूर करता है — और कोई देख नहीं रहा होता |
| नादान दोस्त | केशव और श्यामा नाम के दो बच्चे, जो चिड़िया के अंडों की ‘मदद’ करने चलते हैं और अनजाने में नुक़सान कर बैठते हैं | भावना अच्छी हो, पर बिना समझ के की गई मदद हानि कर सकती है | दोनों में यही प्रश्न है कि सचमुच मदद करना क्या होता है |
| दो बैलों की कथा | हीरा और मोती नाम के दो बैल, जो अन्याय सहने के बजाय बार-बार लौटकर अपने मालिक झूरी के पास आते हैं | मित्रता, स्वाभिमान और अन्याय के विरुद्ध डटे रहने का साहस | दोनों में ‘आत्मबल’ केंद्र में है — कठिनाई में हिम्मत न हारना |
प्रेमचंद के बारे में खोजने योग्य बातें —
- वास्तविक नाम धनपतराय; ‘नवाबराय’ नाम से भी लिखा और बाद में ‘प्रेमचंद’ नाम अपनाया।
- वे कथा-सम्राट कहलाते हैं — यानी कहानी के क्षेत्र के सम्राट। जीवनकाल 1880–1936।
- उन्होंने “समाज-सुधार और राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत” कहानियाँ और उपन्यास लिखे — गोदान, निर्मला, गबन, कर्मभूमि।
- प्रसिद्ध कहानियाँ — ईदगाह, बड़े भाईसाहब, गुल्ली डंडा, दो बैलों की कथा, पंच परमेश्वर, पूस की रात।
- उनकी कहानियों के पात्र प्रायः किसान, मज़दूर और साधारण बच्चे होते हैं — ‘परीक्षा’ का किसान भी इसी परंपरा का है।
कक्षा के लिए सुझाव: तीनों कहानियाँ तीन समूहों में बाँट लीजिए। हर समूह अपनी कहानी पढ़कर कक्षा में पाँच मिनट में सुनाए और अंत में एक वाक्य में बताए कि उस कहानी ने क्या सिखाया। फिर सब मिलकर तय कीजिए — प्रेमचंद की कहानियों में सबसे बार-बार कौन-सी बात लौटकर आती है? (संकेत: ग़रीब का दुख और साधारण आदमी की भलाई।)