मल्हार अध्याय 11 चेतक की वीरता के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-05
इस अध्याय के बारे में
रचना का नाम ‘चेतक की वीरता’ है और कवि हैं श्यामनारायण पाण्डेय । यह एक कविता है, कोई कहानी नहीं। कविता के बाद दिया गया ‘कवि से परिचय’ बताता है कि वे वीर रस की कविताओं के लिए चर्चित हैं, उनकी सर्वाधिक लोकप्रिय काव्यकृति ‘हल्दीघाटी’ सन 1939 में छपी और यह कविता उसी का एक अंश है। कवि का जीवनकाल 1907–1991 रहा। कविता किसके बारे में है — हल्दीघाटी के रणक्षेत्र में महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक के बारे में। कविता का पहला ही चित्र यह है — “रण-बीच चौकड़ी भर-भरकर / चेतक बन गया निराला था।” यानी युद्ध के बीच छलाँगें भरता हुआ चेतक सबसे अनोखा हो उठा। चेतक की गति — “पड़ गया हवा को पाला था” अर्थात हवा से ही उसका मुक़ाबला हो गया, और “या आसमान पर घोड़ा था” अर्थात वह ज़मीन पर नहीं, आकाश में दौड़ता लगता था। इतनी तेज़ी कि कोड़ा कभी उसकी पीठ पर गिरा ही नहीं — “गिरता न कभी चेतक-तन पर / राणा प्रताप का कोड़ा था।” चेत
अभ्यास
- मेरी समझ से
- पंक्तियों पर चर्चा
- मिलकर करें मिलान
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- कविता की रचना
- शब्द के भीतर शब्द
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- समानार्थी शब्द
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