कक्षा ६ हिंदी अध्याय 11 चेतक की वीरता के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-19
इस अध्याय के बारे में
रचना का नाम ‘चेतक की वीरता’ है और कवि हैं श्यामनारायण पाण्डेय । यह एक कविता है, कोई कहानी नहीं। कविता के बाद दिया गया ‘कवि से परिचय’ बताता है कि वे वीर रस की कविताओं के लिए चर्चित हैं, उनकी सर्वाधिक लोकप्रिय काव्यकृति ‘हल्दीघाटी’ सन 1939 में छपी और यह कविता उसी का एक अंश है। कवि का जीवनकाल 1907–1991 रहा। कविता किसके बारे में है — हल्दीघाटी के रणक्षेत्र में महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक के बारे में। कविता का पहला ही चित्र यह है — “रण-बीच चौकड़ी भर-भरकर / चेतक बन गया निराला था।” यानी युद्ध के बीच छलाँगें भरता हुआ चेतक सबसे अनोखा हो उठा। चेतक की गति — “पड़ गया हवा को पाला था” अर्थात हवा से ही उसका मुक़ाबला हो गया, और “या आसमान पर घोड़ा था” अर्थात वह ज़मीन पर नहीं, आकाश में दौड़ता लगता था। इतनी तेज़ी कि कोड़ा कभी उसकी पीठ पर गिरा ही नहीं — “गिरता न कभी चेतक-तन पर / राणा प्रताप का कोड़ा था।” चेत
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| कविता का शब्द | अर्थ | कविता की पंक्ति | अपना एक वाक्य |
|---|---|---|---|
| रण | युद्ध, लड़ाई का मैदान | “रण-बीच चौकड़ी भर-भरकर” | हल्दीघाटी का रण आज भी इतिहास में याद किया जाता है। |
| चौकड़ी भरना | घोड़े का चारों पैर एक साथ उठाकर लंबी छलाँग लगाना | “रण-बीच चौकड़ी भर-भरकर” | मैदान में हिरन चौकड़ी भरता हुआ निकल गया। |
| पाला पड़ना | मुक़ाबला हो जाना, टक्कर हो जाना | “पड़ गया हवा को पाला था।” | इस बार हमारी टीम का पाला ज़िले की सबसे मज़बूत टीम से पड़ा। |
| कोड़ा | चाबुक, जिससे घोड़े को तेज़ चलने के लिए मारा जाता है | “राणा प्रताप का कोड़ा था।” | सारथी ने कोड़ा उठाया ज़रूर, पर घोड़ों पर चलाया नहीं। |
| अरि | शत्रु, दुश्मन | “वह दौड़ रहा अरि-मस्तक पर” | वीर सैनिक अरि के सामने कभी पीठ नहीं दिखाता। |
| बाग | लगाम, घोड़े की रास | “जो तनिक हवा से बाग हिली” | घुड़सवार ने बाग खींची और घोड़ा तुरंत रुक गया। |
| सरपट | बहुत तेज़ रफ़्तार से, बिना रुके | “सरपट दौड़ा करवालों में।” | डाकिया साइकिल पर सरपट गाँव की ओर बढ़ा जा रहा था। |
| करवाल | तलवार | “सरपट दौड़ा करवालों में।” | संग्रहालय में राजाओं की पुरानी करवाल सजाकर रखी गई है। |
| घहरना | बादल की तरह गरजते हुए छा जाना, टूट पड़ना | “अरि की सेना पर घहर गया।” | सावन का बादल पूरे गाँव पर घहरकर बरस पड़ा। |
| निषंग | तरकश, तीर रखने का खोल | “भाला गिर गया, गिरा निषंग” | धनुर्धर ने निषंग से एक तीर निकालकर धनुष पर चढ़ाया। |
| हय | घोड़ा (‘अश्व’ का पर्यायवाची) | “हय-टापों से खन गया अंग।” | ‘हय’ शब्द अब बोलचाल में नहीं, केवल कविता में मिलता है। |
| दंग | हैरान, चकित, अचंभित | “वैरी-समाज रह गया दंग” | छोटे बच्चे का गणित देखकर सारे शिक्षक दंग रह गए। |
अभ्यास
- मेरी समझ से
- पंक्तियों पर चर्चा
- मिलकर करें मिलान
- शीर्षक
- कविता की रचना
- शब्द के भीतर शब्द
- आपकी बात
- समानार्थी शब्द
- आज की पहेली
- खोजबीन के लिए