मल्हार अध्याय 11 खोजबीन के लिए

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
महाराणा प्रताप कौन थे? उनके बारे में इंटरनेट या पुस्तकालय से जानकारी प्राप्त करके लिखिए।
उत्तर

यह खोजबीन का प्रश्न है। पहले जानकारी इकट्ठी कीजिए, फिर अपने शब्दों में लिखिए। अच्छे उत्तर में ये बातें होनी चाहिए — कौन थे, कहाँ के थे, किस समय हुए, किस बात के लिए प्रसिद्ध हैं, और उनका इस कविता से क्या संबंध है।

खोजबीन के लिए मुख्य तथ्य —

बिंदुजानकारी
पूरा नाम और पदमहाराणा प्रताप सिंह — मेवाड़ (राजस्थान) के राजपूत शासक, सिसोदिया वंश के।
समयसन 1540 से 1597 तक। वे सन 1572 में मेवाड़ की गद्दी पर बैठे।
माता-पितापिता महाराणा उदयसिंह द्वितीय (उदयपुर नगर के संस्थापक), माता जयवंता बाई।
किसलिए प्रसिद्धउन्होंने मुग़ल सम्राट अकबर की अधीनता स्वीकार करने से इनकार कर दिया और मेवाड़ की स्वतंत्रता के लिए वर्षों संघर्ष किया।
हल्दीघाटी का युद्धसन 1576 में, हल्दीघाटी (राजसमंद, राजस्थान) के दर्रे में, अकबर की ओर से आमेर के राजा मान सिंह की सेना के विरुद्ध। यही युद्ध इस कविता की पृष्ठभूमि है।
चेतकउनका प्रिय घोड़ा, जो हल्दीघाटी के युद्ध में घायल होकर भी महाराणा को सुरक्षित निकाल ले गया और फिर प्राण त्याग दिए। इसी कविता का नायक वही है।
कठिन दिनयुद्ध के बाद उन्होंने वर्षों जंगलों-पहाड़ों में कष्ट भरा जीवन बिताया, पर हार नहीं मानी। लोक-कथाओं में घास की रोटी का प्रसंग बहुत प्रसिद्ध है।
आज उनका स्मरणउदयपुर के मोती मगरी में उनकी घोड़े पर सवार प्रतिमा है (इसी का चित्र आपकी पुस्तक के पृष्ठ 123 पर छपा है)। हल्दीघाटी में चेतक की समाधि भी बनी है।

नमूना उत्तर: “महाराणा प्रताप मेवाड़ के एक वीर राजपूत राजा थे। उनका जन्म सन 1540 में हुआ और वे 1572 में मेवाड़ की गद्दी पर बैठे। उस समय मुग़ल सम्राट अकबर चाहता था कि सभी राजा उसकी अधीनता स्वीकार कर लें, पर महाराणा प्रताप ने ऐसा करने से साफ़ इनकार कर दिया। इसी कारण सन 1576 में हल्दीघाटी का युद्ध हुआ, जिसमें उनका सामना अकबर की विशाल सेना से हुआ। उस युद्ध में उनका घोड़ा चेतक घायल होने पर भी उन्हें सुरक्षित निकाल ले गया — यही घटना ‘चेतक की वीरता’ कविता में वर्णित है। युद्ध के बाद उन्होंने वर्षों जंगलों में कठिन जीवन बिताया, पर आत्मसम्मान से समझौता नहीं किया। सन 1597 में उनका देहांत हुआ। आज भी वे स्वाभिमान, साहस और मातृभूमि-प्रेम के प्रतीक माने जाते हैं।”

खोजबीन कैसे करें: केवल एक जगह से नक़ल मत कीजिए। कम-से-कम दो स्रोत देखिए — पुस्तकालय की एक इतिहास की पुस्तक और एक विश्वसनीय वेबसाइट — और जो तथ्य दोनों जगह एक जैसा मिले, उसे ही लिखिए। तिथियाँ और स्थान के नाम विशेष ध्यान से जाँचिए, और अंत में अपने स्रोतों के नाम भी लिख दीजिए।
ध्यान रखिए: महाराणा प्रताप के बारे में बहुत-सी बातें लोक-कथाओं से आई हैं और बहुत-सी इतिहास से। लिखते समय दोनों को अलग रखिए — “इतिहास बताता है कि…” और “लोक-कथाओं में कहा जाता है कि…”। यही एक अच्छे शोधकर्ता का तरीक़ा है।
प्र2.
इस कविता में चेतक एक ‘घोड़ा’ है। पशु-पक्षियों पर आधारित पाँच रचनाओं को खोजिए और अपनी कक्षा की दीवार-पत्रिका पर लगाइए।
उत्तर

यह पढ़ने और मिलकर करने की परियोजना है। पहले पुस्तकालय या इंटरनेट से पाँच रचनाएँ खोजिए, फिर उन्हें सुंदर ढंग से दीवार-पत्रिका पर सजाइए। नीचे कुछ जानी-मानी रचनाएँ दी गई हैं — इनमें से पाँच चुन लीजिए या इन्हीं की तरह अपनी पसंद की रचनाएँ ढूँढ़िए।

रचनारचनाकारविधाकौन-सा पशु-पक्षी और क्या ख़ास
गिल्लूमहादेवी वर्मासंस्मरणएक गिलहरी, जिसे लेखिका ने पाला। जानवर और मनुष्य के स्नेह की सबसे कोमल कहानी।
नीलकंठमहादेवी वर्मारेखाचित्रएक मोर, जिसका नाम नीलकंठ था। उसकी सुंदरता, नृत्य और अंत का मार्मिक वर्णन।
दो बैलों की कथाप्रेमचंदकहानीहीरा और मोती नाम के दो बैल, जो मित्रता और स्वाभिमान की मिसाल हैं।
सोना (‘मेरा परिवार’ से)महादेवी वर्मासंस्मरणसोना नाम की एक हिरनी, जो घर की सदस्य जैसी बन गई थी।
चींटीसोहनलाल द्विवेदीकवितानन्ही चींटी की लगन और परिश्रम से सीख लेने की कविता।
पंचतंत्र की कहानियाँविष्णु शर्माकथा-संग्रहशेर, खरगोश, कौआ, बगुला, बंदर — सारे पात्र पशु-पक्षी हैं और हर कहानी एक सीख देती है।
जंगल बुकरुडयार्ड किपलिंग (हिंदी अनुवाद)उपन्यासभेड़ियों के बीच पला लड़का मोगली, भालू बलू और चीता बघीरा।

दीवार-पत्रिका कैसे बनाएँ —

  1. बँटवारा कीजिए: पाँच समूह बनाइए, हर समूह एक रचना ले।
  2. हर रचना के लिए एक कार्ड बनाइए जिसमें हो — रचना का नाम, रचनाकार, विधा (कविता / कहानी / संस्मरण), कौन-सा पशु-पक्षी है, और चार-पाँच पंक्तियों में उसका परिचय।
  3. एक पसंदीदा अंश रचना में से चुनकर बड़े अक्षरों में लिखिए — जैसे इस कविता से “निर्भीक गया वह ढालों में, सरपट दौड़ा करवालों में।”
  4. चित्र जोड़िए — उस पशु या पक्षी का चित्र बनाइए या पुरानी पत्रिका से काटकर चिपकाइए।
  5. पत्रिका का नाम रखिए — जैसे ‘हमारे संगी-साथी’, ‘पंख और पैर’ या ‘चेतक के दोस्त’।
इस काम से क्या मिलेगा: आप देखेंगे कि हिंदी साहित्य में पशु-पक्षी केवल ‘जानवर’ नहीं होते — वे पात्र होते हैं, जिनके अपने स्वभाव, अपनी वफ़ादारी और अपना दुख-सुख होता है। चेतक भी कविता में घोड़ा भर नहीं, एक वीर पात्र है। यही बात हमें अपने आसपास के जीव-जंतुओं को अधिक संवेदनशीलता से देखना सिखाती है।
Try This: पत्रिका के एक कोने में ‘हमारे अपने’ नाम से जगह रखिए, जहाँ हर बच्चा अपने घर या मोहल्ले के किसी पशु-पक्षी — गाय, कुत्ता, गौरैया, तोता — पर तीन-चार वाक्य लिखकर लगाए। ये सबसे ज़्यादा पढ़े जाने वाले पर्चे साबित होंगे।
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