यह खोजबीन का प्रश्न है। पहले जानकारी इकट्ठी कीजिए, फिर अपने शब्दों में लिखिए। अच्छे उत्तर में ये बातें होनी चाहिए — कौन थे, कहाँ के थे, किस समय हुए, किस बात के लिए प्रसिद्ध हैं, और उनका इस कविता से क्या संबंध है।
खोजबीन के लिए मुख्य तथ्य —
| बिंदु | जानकारी |
|---|---|
| पूरा नाम और पद | महाराणा प्रताप सिंह — मेवाड़ (राजस्थान) के राजपूत शासक, सिसोदिया वंश के। |
| समय | सन 1540 से 1597 तक। वे सन 1572 में मेवाड़ की गद्दी पर बैठे। |
| माता-पिता | पिता महाराणा उदयसिंह द्वितीय (उदयपुर नगर के संस्थापक), माता जयवंता बाई। |
| किसलिए प्रसिद्ध | उन्होंने मुग़ल सम्राट अकबर की अधीनता स्वीकार करने से इनकार कर दिया और मेवाड़ की स्वतंत्रता के लिए वर्षों संघर्ष किया। |
| हल्दीघाटी का युद्ध | सन 1576 में, हल्दीघाटी (राजसमंद, राजस्थान) के दर्रे में, अकबर की ओर से आमेर के राजा मान सिंह की सेना के विरुद्ध। यही युद्ध इस कविता की पृष्ठभूमि है। |
| चेतक | उनका प्रिय घोड़ा, जो हल्दीघाटी के युद्ध में घायल होकर भी महाराणा को सुरक्षित निकाल ले गया और फिर प्राण त्याग दिए। इसी कविता का नायक वही है। |
| कठिन दिन | युद्ध के बाद उन्होंने वर्षों जंगलों-पहाड़ों में कष्ट भरा जीवन बिताया, पर हार नहीं मानी। लोक-कथाओं में घास की रोटी का प्रसंग बहुत प्रसिद्ध है। |
| आज उनका स्मरण | उदयपुर के मोती मगरी में उनकी घोड़े पर सवार प्रतिमा है (इसी का चित्र आपकी पुस्तक के पृष्ठ 123 पर छपा है)। हल्दीघाटी में चेतक की समाधि भी बनी है। |
नमूना उत्तर: “महाराणा प्रताप मेवाड़ के एक वीर राजपूत राजा थे। उनका जन्म सन 1540 में हुआ और वे 1572 में मेवाड़ की गद्दी पर बैठे। उस समय मुग़ल सम्राट अकबर चाहता था कि सभी राजा उसकी अधीनता स्वीकार कर लें, पर महाराणा प्रताप ने ऐसा करने से साफ़ इनकार कर दिया। इसी कारण सन 1576 में हल्दीघाटी का युद्ध हुआ, जिसमें उनका सामना अकबर की विशाल सेना से हुआ। उस युद्ध में उनका घोड़ा चेतक घायल होने पर भी उन्हें सुरक्षित निकाल ले गया — यही घटना ‘चेतक की वीरता’ कविता में वर्णित है। युद्ध के बाद उन्होंने वर्षों जंगलों में कठिन जीवन बिताया, पर आत्मसम्मान से समझौता नहीं किया। सन 1597 में उनका देहांत हुआ। आज भी वे स्वाभिमान, साहस और मातृभूमि-प्रेम के प्रतीक माने जाते हैं।”