मल्हार अध्याय 11 आज की पहेली

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
बूझो तो जानें — तीन अक्षर का मेरा नाम, उल्टा सीधा एक समान। दिन में जगता, रात में सोता, यही मेरी पहचान।।
उत्तर

उत्तर है — नयन (आँख)।

पहेली का सुराग़‘नयन’ पर कैसे सही बैठता है
तीन अक्षर का मेरा नामन + य + न — पूरे तीन अक्षर।
उल्टा सीधा एक समान‘नयन’ को उल्टा पढ़िए तो भी नयन ही बनता है। ऐसे शब्दों को पैलिंड्रोम या विलोमपद कहते हैं।
दिन में जगता, रात में सोताआँखें दिन भर खुली रहती हैं और रात को नींद में बंद हो जाती हैं।
Try This: ऐसे और शब्द खोजिए जो उल्टे-सीधे एक समान पढ़े जाएँ — जहाज, कनक, नमन, डकड… और अंग्रेज़ी में level, madam। यह खेल वर्तनी पक्की करने में बहुत मदद करता है।
प्र2.
एक पक्षी ऐसा अलबेला, बिना पंख उड़ रहा अकेला। बाँध गले में लंबी डोर, पकड़ रहा अंबर का छोर।
उत्तर

उत्तर है — पतंग

पहेली का सुराग़‘पतंग’ पर कैसे सही बैठता है
एक पक्षी ऐसा अलबेलापतंग पक्षी की तरह आकाश में उड़ती है, इसलिए उसे मज़ाक़ में ‘अलबेला पक्षी’ कहा गया।
बिना पंख उड़ रहा अकेलापतंग के पंख नहीं होते; वह केवल हवा और डोर के सहारे उड़ती है।
बाँध गले में लंबी डोरपतंग में कन्नी बाँधकर लंबी डोर जोड़ी जाती है — यही सबसे पक्का सुराग़ है।
पकड़ रहा अंबर का छोरवह ऊपर-ऊपर उठती जाती है, मानो आसमान का सिरा छूने चली हो।
पहेली कैसे बूझें: पहेली में जो बात विरोधाभास लगे, वही असली कुंजी होती है। यहाँ ‘पक्षी’ कहा गया पर ‘बिना पंख’ भी कहा गया — इसका मतलब यह कोई सचमुच का पक्षी नहीं, उड़ने वाली कोई और चीज़ है। साथ में ‘डोर’ आते ही उत्तर तय हो जाता है।
प्र3.
रात में हूँ दिन में नहीं, दीये के नीचे हूँ ऊपर नहीं। बोलो, बोलो— मैं हूँ कौन?
उत्तर

उत्तर है — अँधेरा

पहेली का सुराग़‘अँधेरा’ पर कैसे सही बैठता है
रात में हूँ दिन में नहींअँधेरा रात का साथी है; दिन में सूरज की रोशनी में वह रहता ही नहीं।
दीये के नीचे हूँ ऊपर नहींदीये की लौ ऊपर की ओर उजाला फैलाती है, पर ठीक उसके नीचे उसकी अपनी छाया से अँधेरा बना रहता है।
यह कहावत भी यही कहती है: “दीपक तले अँधेरा।” इसका अर्थ है — जो दूसरों को रोशनी देता है, उसके अपने पास कमी रह सकती है। जैसे कोई शिक्षक पूरे गाँव को पढ़ाए पर अपने बच्चे को समय न दे पाए, तो कहा जाता है — दीपक तले अँधेरा।
ध्यान दीजिए: यह पहेली किसी चीज़ की नहीं, एक अनुपस्थिति की है। अँधेरा अपने-आप में कोई वस्तु नहीं — वह तो केवल रोशनी का न होना है। पहेलियों में ऐसी अमूर्त चीज़ें (छाया, साँस, समय, नींद) अक्सर पूछी जाती हैं।
प्र4.
मुझमें समाया फल, फूल और मिठाई। सबके मुँह में आया पानी मेरे भाई।
उत्तर

उत्तर है — गुलाब जामुन

पहेली का सुराग़‘गुलाब जामुन’ पर कैसे सही बैठता है
मुझमें समाया फूलनाम का पहला हिस्सा — गुलाब, जो एक फूल है।
मुझमें समाया फलनाम का दूसरा हिस्सा — जामुन, जो एक फल है।
मुझमें समाई मिठाईपूरा शब्द मिलकर एक मिठाई का नाम बन जाता है।
सबके मुँह में आया पानीनाम सुनते ही मुँह में पानी आ जाना मिठाई की ही पहचान है।
पहेली की चालाकी: यहाँ ‘मुझमें समाया’ का अर्थ पेट के भीतर समाना नहीं, नाम के भीतर समाना है। यह ठीक वैसा ही खेल है जैसा आपने ‘शब्द के भीतर शब्द’ गतिविधि में किया था — बड़े शब्द के भीतर छोटे शब्द छिपे रहते हैं।
Try This: ऐसे और नाम सोचिए जिनमें दो अलग चीज़ें छिपी हों — ‘सीताफल’ (नाम + फल), ‘गुलाबजल’ (फूल + जल), ‘नारियल पानी’। इन्हीं से आप ख़ुद अपनी पहेली बना सकते हैं।
प्र5.
सड़क है पर गाड़ी नहीं, जंगल है पर पेड़ नहीं। शहर है पर घर नहीं, समंदर है पर पानी नहीं।
उत्तर

उत्तर है — नक्शा (मानचित्र)।

पहेली का सुराग़‘नक्शे’ पर कैसे सही बैठता है
सड़क है पर गाड़ी नहींनक्शे पर सड़कें लकीरों के रूप में बनी होती हैं, पर उन पर कोई गाड़ी नहीं चलती।
जंगल है पर पेड़ नहींजंगल हरे रंग के धब्बे से दिखाया जाता है — असली पेड़ वहाँ नहीं होते।
शहर है पर घर नहींशहर सिर्फ़ एक बिंदु और नाम भर होता है।
समंदर है पर पानी नहींसमुद्र नीले रंग से दिखाया जाता है, पर वह काग़ज़ ही रहता है।
असली बात: नक्शा किसी जगह की तस्वीर नहीं, संकेत है। वह असली चीज़ों की जगह चिह्न, रंग और रेखाएँ रख देता है — इसीलिए एक छोटे-से काग़ज़ पर पूरा देश आ जाता है। नक्शे में दी गई इन संकेत-चिह्नों की सूची को संकेत-सूची कहते हैं।
Check it yourself: अपनी सामाजिक विज्ञान की पुस्तक का भारत का नक्शा खोलिए और गिनिए कि उसमें कितने अलग-अलग रंग और चिह्न इस्तेमाल हुए हैं। फिर अपने स्कूल का एक छोटा नक्शा बनाइए — कक्षाएँ, मैदान, पानी की टंकी और मुख्य द्वार दिखाइए।
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