प्र1.
“या आसमान का घोड़ा था।” ‘आसमान’ शब्द के भीतर कौन-कौन से शब्द छिपे हैं— आस, समान, मान, सम, आन, नस आदि। अब इसी प्रकार कविता में से कोई पाँच शब्द चुनकर उनके भीतर के शब्द खोजिए।
उत्तर
तरीक़ा — बड़े शब्द को अक्षरों में तोड़िए, फिर पास-पास के अक्षरों को जोड़कर देखिए कि कोई अर्थवाला छोटा शब्द बनता है या नहीं। कभी-कभी अक्षरों का क्रम उलटने पर भी शब्द निकल आता है (जैसे आसमान से ‘नस’)। नीचे कविता से चुने पाँच शब्द और उनके भीतर छिपे शब्द दिए गए हैं।
| कविता का शब्द | कविता की पंक्ति | भीतर छिपे शब्द |
|---|---|---|
| चौकड़ी | “रण-बीच चौकड़ी भर-भरकर” | चौक, कड़ी, चौ, ड़ी |
| मस्तक | “वह दौड़ रहा अरि-मस्तक पर” | मस्त, तक, मत, कस, सत |
| बादल | “विकराल बज्र-मय बादल-सा” | बाद, दल, बल, लद, दा |
| सरपट | “सरपट दौड़ा करवालों में।” | सर, पट, पर, टप, रस |
| करवाल | “सरपट दौड़ा करवालों में।” | कर, वाल, करवा, कल, रव, लव |
और भी आज़माइए —
| शब्द | भीतर छिपे शब्द |
|---|---|
| भयानक | भय, यान, नक, नाक |
| प्रताप | ताप, पात, पत, ता |
| निराला | निरा, राल, लार, ला |
| समाज | समा, जमा, सज, मा |
| विकराल | कर, राल, कल, लार, वि |
यह खेल क्यों उपयोगी है: इससे आपकी नज़र शब्द के अक्षरों पर जमने लगती है। वर्तनी (स्पेलिंग) सुधरती है, नए शब्द याद रहते हैं, और आगे चलकर संधि-समास तथा उपसर्ग-प्रत्यय समझना आसान हो जाता है — क्योंकि वहाँ भी बड़ा शब्द छोटे टुकड़ों से ही बनता है।
Try This: अपने नाम के भीतर छिपे शब्द खोजिए, फिर अपने गाँव या शहर के नाम के भीतर। जैसे — ‘बरेली’ में बरे, रेली, ली; ‘नागपुर’ में नाग, पुर, गप, नापुर। कक्षा में जो सबसे ज़्यादा शब्द निकाले, वही जीता।