मल्हार अध्याय 11 आपकी बात

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
“जो तनिक हवा से बाग हिली लेकर सवार उड़ जाता था।” (क) ‘हवा से लगाम हिली और घोड़ा भाग चला’ कविता को प्रभावशाली बनाने में इस तरह के प्रयोग काम आते हैं। कविता में आए ऐसे प्रयोग खोजकर परस्पर बातचीत करें।
उत्तर

जिस प्रयोग की बात हो रही है, उसे अतिशयोक्ति कहते हैं — यानी किसी बात को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर कहना, ताकि पढ़ने वाले के मन पर उसका असर गहरा हो जाए। सचमुच लगाम हवा से नहीं हिलती और घोड़ा उड़ता भी नहीं; पर ऐसा कहने से चेतक की फुर्ती जितनी साफ़ दिखती है, उतनी ‘चेतक बहुत तेज़ दौड़ता था’ कहने से कभी नहीं दिखती।

कविता में आए ऐसे प्रयोग —

पंक्तिबढ़ा-चढ़ाकर क्या कहा गयाअसर
“पड़ गया हवा को पाला था।”घोड़े का मुक़ाबला सीधे हवा से हो गयाचेतक हवा जितना तेज़ है — यह बात एक ही शब्द ‘पाला’ में आ जाती है।
“गिरता न कभी चेतक-तन पर / राणा प्रताप का कोड़ा था।”चाबुक कभी उसकी पीठ तक पहुँचा ही नहींवह मारने से नहीं, अपनी मर्ज़ी से दौड़ता था — स्वामिभक्ति का संकेत।
“या आसमान पर घोड़ा था।”घोड़ा ज़मीन पर नहीं, आसमान पर दौड़ रहा हैगति इतनी कि पैर ज़मीन छूते ही नहीं दिखते।
“राणा की पुतली फिरी नहीं / तब तक चेतक मुड़ जाता था।”आँख घूमने से भी पहले घोड़ा मुड़ जाता हैस्वामी और घोड़े के बीच बिना बोले तालमेल।
“है यहीं रहा, अब यहाँ नहीं / वह वहीं रहा है वहाँ नहीं।”वह एक ही समय में हर जगह है और कहीं नहींशत्रु उसे पकड़ ही नहीं पाता — गति का चरम चित्र।
“थी जगह न कोई जहाँ नहीं।”पूरे रणक्षेत्र में एक भी जगह ऐसी नहीं बची जहाँ वह न गया होअकेला घोड़ा पूरे मैदान पर छा गया।
“उड़ गया भयानक भालों में।”भालों के बीच से उड़ जानानिडरता और गति, दोनों एक साथ।

इनके अलावा कविता में उपमाएँ भी हैं — ‘सा’ लगाकर तुलना करना उपमा कहलाता है:

  • “बढ़ते नद-सा वह लहर गया” — बढ़ती नदी से तुलना;
  • “विकराल बज्र-मय बादल-सा अरि की सेना पर घहर गया” — गरजते बादल से तुलना।

और ध्वनि का एक प्रयोग अनुप्रास भी है — “ण-बीच चौकड़ी-भकर” में ‘र’ की आवृत्ति टापों की आवाज़ जैसी लगती है।

बातचीत में क्या कहें: अपने समूह में एक-एक पंक्ति बाँट लीजिए और हर कोई बताए — “इसमें सच क्या है और बढ़ाकर क्या कहा गया है?” जैसे — सच यह है कि चेतक बहुत तेज़ दौड़ता था; बढ़ाकर यह कहा गया कि वह आसमान पर दौड़ रहा था। इसी अंतर को पहचान लेना ही अलंकार समझना है।
Try This: अपने आसपास की किसी साधारण बात को अतिशयोक्ति में कहिए — “गर्मी इतनी थी कि पंखा भी पसीना पोंछ रहा था।” “वह इतना धीरे चलता है कि उसकी परछाईं आगे निकल जाती है।” कक्षा में सबसे मज़ेदार वाक्य चुनिए।
प्र2.
(ख) कहीं भी, किसी भी तरह का युद्ध नहीं होना चाहिए। इस पर आपस में बात कीजिए।
उत्तर

यह अपनी राय रखने और दूसरों की राय सुनने का प्रश्न है, इसलिए इसका कोई एक ‘सही उत्तर’ नहीं है। पर अच्छी बातचीत के लिए तीन बातें चाहिए — अपनी राय, उसका कारण, और दूसरी राय का सम्मान

दोनों पक्षों के तर्क —

“युद्ध नहीं होना चाहिए” — पक्ष में“कभी-कभी लड़ना पड़ता है” — दूसरा पक्ष
युद्ध में सबसे ज़्यादा नुक़सान आम लोगों का होता है — बच्चे, बूढ़े और स्त्रियाँ बेघर हो जाते हैं।यदि कोई आपके घर या देश पर ज़बरदस्ती क़ब्ज़ा करने आए, तो अपनी रक्षा करना अन्याय नहीं है।
जो पैसा हथियारों में लगता है, वही स्कूल, अस्पताल और सड़कों पर लग सकता था।महाराणा प्रताप ने अपनी मातृभूमि की स्वतंत्रता बचाने के लिए लड़ाई लड़ी — वह हमला नहीं, प्रतिरोध था।
युद्ध खेत, जंगल, नदियाँ और जानवर — सबको नष्ट करता है। इस कविता में भी घोड़े घायल हो रहे हैं।अन्याय के सामने चुप रह जाना भी अन्याय को बढ़ावा देना है।
झगड़े का हल बातचीत, संधि और समझौते से भी निकल सकता है — और वह हल टिकाऊ होता है।पर यह भी सच है कि लड़ाई अंतिम उपाय होनी चाहिए, पहला नहीं।

नमूना उत्तर: “मैं मानता हूँ कि युद्ध किसी समस्या का अच्छा हल नहीं है। युद्ध में जीतने वाला भी बहुत कुछ खो देता है — इस कविता में ही देखिए, चेतक जैसा वीर घोड़ा भी घायल हुआ और दोनों ओर के सैनिकों के अंग ‘हय-टापों से खन गए’। जो पैसा और मेहनत लड़ाई में जाती है, वह अगर पढ़ाई और खेती में लगे तो हज़ारों घर सुखी हो सकते हैं। हाँ, यह भी सच है कि अगर कोई ज़बरदस्ती हमारी आज़ादी छीनने आए, तो अपनी रक्षा करना ग़लत नहीं। इसलिए मेरी राय है — पहले बातचीत, फिर समझौता, और लड़ाई सबसे आख़िरी उपाय। और सबसे बड़ी बात यह कि हमें युद्ध का जोश पसंद करना चाहिए, पर युद्ध नहीं — जैसे इस कविता में हमें चेतक की वीरता अच्छी लगती है, न कि सैनिकों का घायल होना।”

बहस को झगड़ा न बनने दें: बातचीत में ‘तुम ग़लत हो’ कहने के बजाय पूछिए — “तुम ऐसा क्यों सोचते हो?” फिर अपनी बात कारण के साथ रखिए। कक्षा में दो टोलियाँ बनाकर एक-एक करके तर्क रखिए और अंत में यह देखिए कि किन बातों पर दोनों टोलियाँ सहमत हैं — प्रायः सब इस पर सहमत निकलते हैं कि निर्दोष लोगों का नुक़सान नहीं होना चाहिए।
Did you know? महात्मा गांधी ने बिना हथियार उठाए, केवल सत्य और अहिंसा के बल पर आज़ादी की लड़ाई लड़ी और जीती। यानी लड़ाई का एक रास्ता वह भी है जिसमें कोई घायल नहीं होता।
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