सही उत्तर है — चेतक बादल की तरह शत्रु की सेना पर वज्रपात बनकर टूट पड़ता था। इसी विकल्प के सामने तारा (★) बनाइए।
इसका सीधा प्रमाण कविता की यह पंक्ति है —
अरि की सेना पर घहर गया।”
यहाँ कवि ने दो शब्द जान-बूझकर चुने हैं। बज्र-मय बादल यानी ऐसा बादल जिसमें वज्र (बिजली) भरा हो, और घहरना यानी बादल का गरजते हुए छा जाना। दोनों मिलकर बताते हैं कि चेतक शत्रु-सेना पर बादल की तरह छाया और वज्रपात की तरह गिरा।
| विकल्प | सही / ग़लत | कारण |
|---|---|---|
| बादल की तरह… वज्रपात बनकर | सही ★ | “विकराल बज्र-मय बादल-सा / अरि की सेना पर घहर गया।” — कवि की अपनी उपमा यही है। |
| चारों ओर से घेरकर | ग़लत | घेरने की बात कविता में कहीं नहीं आई। चेतक अकेला घोड़ा है; घेरना तो पूरी सेना का काम होता है। |
| हाथियों के दल के समान बादल के रूप में | ग़लत | कविता में हाथियों का कोई ज़िक्र ही नहीं है। ‘बादल’ शब्द सही है, पर उसके साथ जुड़ी उपमा हाथी की नहीं, वज्र की है। |
| नदी के उफान के समान | ग़लत | यह विकल्प भ्रम में डालता है, क्योंकि पहले “बढ़ते नद-सा वह लहर गया” आया है। पर वह उपमा उसके लहराते हुए बढ़ने की है — सेना पर टूट पड़ने की उपमा अगली ही पंक्ति में बादल और वज्र की है। |