मल्हार अध्याय 10 झरोखे से

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
पाठ में दिए गए क्यू.आर. कोड के माध्यम से आप एक और कहानी पढ़ेंगे। इस कहानी में भी कोई किसी की परीक्षा ले रहा है। यह कहानी हमारे देश के बहुत होनहार बालक और उसके गुरु चाणक्य के बारे में है। इसे हिंदी के प्रसिद्ध लेखक जयशंकर प्रसाद ने लिखा है।
उत्तर

यह पढ़ने का निर्देश है — पुस्तक में दिए गए क्यू.आर. कोड को मोबाइल या टैबलेट से स्कैन कीजिए और वह कहानी पढ़िए।

पढ़ने से पहले इतना जान लीजिए —

  • लेखकजयशंकर प्रसाद, हिंदी के प्रसिद्ध कवि, नाटककार और कहानीकार। ‘कामायनी’ उनकी सबसे प्रसिद्ध रचना है।
  • पात्र — एक होनहार बालक और उसके गुरु चाणक्य (जिन्हें कौटिल्य या विष्णुगुप्त भी कहा जाता है)। इतिहास में चाणक्य ने ही एक साधारण बालक को पहचानकर उसे सम्राट बनाया — वह बालक चंद्रगुप्त मौर्य था।
  • विषय — इसमें भी कोई किसी की परीक्षा ले रहा है, ठीक ‘परीक्षा’ कहानी की तरह।

पढ़ते समय इन बातों पर ध्यान दीजिए (और नोट कर लीजिए) —

  1. परीक्षा किसने ली और किसकी ली?
  2. परीक्षा किस गुण की थी — साहस, बुद्धि, नेतृत्व या सच बोलने की?
  3. क्या बालक को पता था कि उसकी परीक्षा हो रही है? (‘परीक्षा’ कहानी में जानकीनाथ को पता नहीं था।)
  4. परीक्षा लेने का तरीक़ा क्या था — प्रश्न पूछना, या कोई परिस्थिति खड़ी कर देना?
दोनों कहानियों को जोड़िए: पढ़ने के बाद एक छोटी तालिका बनाइए — एक स्तंभ ‘परीक्षा’ का, दूसरा इस नई कहानी का — और चारों प्रश्नों के उत्तर आमने-सामने लिखिए। आपको दिखेगा कि दोनों कहानियों का सूत्र एक ही है: बड़ा आदमी वही पहचान पाता है जो कहने पर नहीं, करने पर ध्यान देता है।
यदि क्यू.आर. कोड न खुले: घबराइए मत — अपने शिक्षक या पुस्तकालय से जयशंकर प्रसाद की कहानियों का संग्रह माँगिए, या कक्षा में एक साथी को यह कहानी पढ़कर सबको सुनाने के लिए कहिए।
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