मल्हार अध्याय 10 मेरी समझ से

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) आपकी समझ से नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए— (1) महाराज ने दीवान को ही उनका उत्तराधिकारी चुनने का कार्य उनके किस गुण के कारण सौंपा? • सादगी • उदारता • बल • नीतिकुशलता
उत्तर

सही उत्तर है — नीतिकुशलता। इसी विकल्प के सामने तारा (★) बनाइए।

कहानी की दूसरी पंक्ति में ही इसका प्रमाण मौजूद है —

“राजा साहब अपने अनुभवशील नीतिकुशल दीवान का बड़ा आदर करते थे।”
इसीलिए वे किसी और पर नहीं, दीवान साहब पर ही यह भार डालते हैं कि नया दीवान वे स्वयं खोजें।

नीतिकुशल का अर्थ है — नीति चलाने में निपुण, यानी सही-ग़लत परखकर समझदारी से निर्णय लेने वाला। नया दीवान चुनना ठीक यही काम है, इसलिए महाराज ने यह काम उन्हें सौंपा।

विकल्पसही / ग़लतकारण
नीतिकुशलतासही ★पाठ में यही शब्द दीवान के लिए आया है — “अनुभवशील नीतिकुशल दीवान”। परखने और चुनने का काम नीति-कुशल व्यक्ति को ही सौंपा जाता है।
सादगीग़लतसादगी की चर्चा दीवान के बारे में है ही नहीं। ‘पुरानी सादगी’ शब्द तो उम्मीदवारों के पहनावे के लिए आया है — “कोई पुरानी सादगी पर मिटा हुआ।”
उदारताग़लतउदारता उस गुण का नाम है जिसे दीवान साहब ढूँढ़ रहे थे (जानकीनाथ में मिला), न कि वह गुण जिसके कारण महाराज ने उन्हें यह काम सौंपा।
बलग़लतबल की शर्त विज्ञापन में उम्मीदवारों के लिए रखी गई थी — “हृष्ट-पुष्ट होना आवश्यक है।” दीवान साहब तो स्वयं बूढ़े और शक्तिहीन हो चुके थे।
ऐसे प्रश्न कैसे हल करें: प्रश्न में देखिए कि गुण किसका पूछा गया है और किस काम के लिए। यहाँ गुण दीवान का है और काम है ‘उत्तराधिकारी चुनना’। जो विकल्प उम्मीदवारों से जुड़े हैं (बल, सादगी) या जो बाद में मिले गुण हैं (उदारता), वे अपने-आप कट जाते हैं।
प्र2.
(2) दीवान साहब द्वारा नौकरी छोड़ने के निश्चय का क्या कारण था? • परमात्मा की याद • राज-काज सँभालने योग्य शक्ति न रहना • बदनामी का भय • चालीस वर्ष की नौकरी पूरा हो जाना
उत्तर

सही उत्तर है — राज-काज सँभालने योग्य शक्ति न रहना। इसी के सामने तारा (★) बनाइए।

दीवान साहब ने महाराज से ख़ुद यही कारण कहा —

“अब मेरी अवस्था भी ढल गई, राज-काज सँभालने की शक्ति नहीं रही।”

बाक़ी तीनों बातें कहानी में आती तो हैं, पर वे निश्चय का कारण नहीं हैं — वे या तो उससे पहले की स्थिति हैं या उसके बाद का डर।

विकल्पसही / ग़लतकारण
राज-काज सँभालने योग्य शक्ति न रहनासही ★यही दीवान साहब का अपना कहा हुआ कारण है। शक्ति न रहने से ही बाक़ी सारी चिंताएँ पैदा हुईं।
परमात्मा की यादग़लत“बूढ़े हुए तो परमात्मा की याद आई” — यह बुढ़ापे की मनःस्थिति बताता है, नौकरी छोड़ने का तर्क नहीं। तर्क तो उन्होंने आगे गिनाया है।
बदनामी का भयग़लत“कहीं भूल-चूक हो जाय तो बुढ़ापे में दाग लगे” — यह शक्ति न रहने का परिणाम है, कारण नहीं। पहले शक्ति गई, तभी भूल-चूक का डर आया।
चालीस वर्ष की नौकरी पूरा हो जानाग़लतचालीस साल की सेवा का ज़िक्र वे अपने परिचय के रूप में करते हैं — “दास ने श्रीमान की सेवा चालीस साल तक की।” वर्षों की गिनती पूरी होने की कोई शर्त कहानी में नहीं है।
ध्यान रखिए: ऐसे प्रश्नों में ‘कारण’ और ‘परिणाम’ को अलग-अलग पहचानना ज़रूरी है। कारण पहले आता है, परिणाम बाद में। शक्ति न रहना कारण है; बदनामी का भय उसका परिणाम।
प्र3.
(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
उत्तर

यह चर्चा का प्रश्न है। यहाँ सिर्फ़ “मैंने यह चुना” कहना काफ़ी नहीं — बताना यह है कि कहानी की कौन-सी पंक्ति आपके उत्तर का प्रमाण है और बाक़ी विकल्प क्यों नहीं चलते।

अच्छी चर्चा में तीन बातें ज़रूर होनी चाहिए —

  • आपने कौन-सा विकल्प चुना;
  • कहानी की वह पंक्ति जो आपके उत्तर को सिद्ध करती है;
  • कम-से-कम एक ग़लत विकल्प को हटाने का कारण।

नमूना उत्तर:

“पहले प्रश्न में मैंने नीतिकुशलता चुनी। मेरा प्रमाण यह पंक्ति है — ‘राजा साहब अपने अनुभवशील नीतिकुशल दीवान का बड़ा आदर करते थे।’ नया दीवान चुनना परखने का काम है, और परखना नीति-कुशल आदमी ही कर सकता है। ‘बल’ वाला विकल्प मैंने इसलिए हटाया क्योंकि बल की शर्त तो विज्ञापन में उम्मीदवारों के लिए रखी गई थी, दीवान साहब के लिए नहीं।

दूसरे प्रश्न में मैंने राज-काज सँभालने योग्य शक्ति न रहना चुना। मेरा प्रमाण है — ‘अब मेरी अवस्था भी ढल गई, राज-काज सँभालने की शक्ति नहीं रही।’ ‘बदनामी का भय’ मैंने इसलिए हटाया क्योंकि वह डर तभी पैदा हुआ जब शक्ति चली गई — यानी वह कारण नहीं, नतीजा है।”

चर्चा से क्या मिलेगा: हो सकता है आपके किसी साथी ने ‘बदनामी का भय’ चुना हो। उससे झगड़ने के बजाय पृष्ठ 105 की पहली पंक्तियाँ साथ खोलकर पढ़िए और पूछिए — पहले क्या हुआ? जो उत्तर पाठ की पंक्ति के क्रम से मेल खाए, वही सटीक है।
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