मल्हार अध्याय 10 शीर्षक

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) आपने जो कहानी पढ़ी है, इसका नाम प्रेमचंद ने ‘परीक्षा’ रखा है। अपने समूह में चर्चा करके लिखिए कि उन्होंने इस कहानी का यह नाम क्यों दिया होगा? अपने उत्तर के कारण भी लिखिए।
उत्तर

प्रेमचंद ने यह नाम इसलिए रखा क्योंकि पूरी कहानी एक परीक्षा ही है — पर ऐसी परीक्षा जिसमें न प्रश्न-पत्र है, न कमरा, न घंटी। उम्मीदवारों को पता ही नहीं था कि उनकी परीक्षा कब हो रही है।

नाम को सही ठहराने वाले चार कारण —

  1. विज्ञापन में ही परीक्षा शब्द है — “जो महाशय इस परीक्षा में पूरे उतरेंगे, वे इस उच्च पद पर सुशोभित होंगे।” यानी लेखक ने शीर्षक कहानी के भीतर से ही उठाया है।
  2. परीक्षा पूरे एक महीने चली — “एक महीने तक उम्मीदवारों के रहन-सहन, आचार-विचार की देखभाल की जाएगी।” जो जाँच किताब से नहीं, आचरण से होती है, उसे ही असली परीक्षा कहते हैं।
  3. परीक्षक छिपा हुआ था — “मनुष्यों का वह बूढ़ा जौहरी आड़ में बैठा हुआ देख रहा था कि इन बगुलों में हंस कहाँ छिपा हुआ है।” और अंतिम परचा तो किसान का वेश धरकर स्वयं सुजानसिंह ने लिया।
  4. परिणाम भी परीक्षा की तरह घोषित हुआ — दरबार सजा, उम्मीदवारों के “कलेजे धड़क रहे थे”, और फिर एक नाम पुकारा गया — पंडित जानकीनाथ।
असली बात: कहानी यह सिखाती है कि परीक्षा वह नहीं जो हम जानकर देते हैं, बल्कि वह है जो हमें बिना बताए ले ली जाती है। जो लोग एक महीना ‘अच्छा दिखने’ में लगे रहे, वे उसी क्षण फेल हो गए जब कीचड़ में फँसी गाड़ी देखकर आँखें मूँदकर आगे बढ़ गए। ‘परीक्षा’ नाम इसी विडंबना को पकड़ लेता है।
प्र2.
(ख) यदि आपको इस कहानी को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा, यह भी बताइए?
उत्तर

नया शीर्षक सोचते समय दो बातें देखिए — (1) नाम कहानी की सबसे केंद्रीय बात को पकड़े, और (2) वह कहानी का अंत खोल न दे। नीचे कुछ नाम और उनके कारण दिए गए हैं; इनमें से कोई भी चुना जा सकता है या इन्हीं की तरह अपना नाम बनाइए।

संभावित शीर्षकयह नाम क्योंकहानी का आधार
बगुलों में हंसदिखावटी लोगों की भीड़ में एक सच्चा गुणी व्यक्ति — पूरी कहानी यही है।“इन बगुलों में हंस कहाँ छिपा हुआ है”
असली परखवालाजो बाहर से नहीं, भीतर से आदमी परख ले — सुजानसिंह वही ‘जौहरी’ हैं।“मनुष्यों का वह बूढ़ा जौहरी आड़ में बैठा हुआ देख रहा था”
कीचड़ में फँसी गाड़ीकहानी का निर्णायक क्षण यही है; यहीं सच्चा उम्मीदवार पहचाना गया।नाले में गाड़ी अटकने और युवक के उसे निकालने का प्रसंग
गहरे पानी में मोतीकहानी की कहावत ही शीर्षक बन जाती है — मेहनत करने वाले को ही फल मिलता है।“गहरे पानी में पैठने से ही मोती मिलता है।”
दया और आत्मबलसुजानसिंह ने जिन दो गुणों की तलाश की थी, नाम उन्हीं का हो।“जिसके हृदय में दया हो और साथ-साथ आत्मबल”

नमूना उत्तर: “मैं इस कहानी का नाम ‘बगुलों में हंस’ रखूँगा। कारण यह है कि देवगढ़ में सैकड़ों उम्मीदवार आए और सब अपने को उजला दिखाने में लगे रहे — ठीक बगुले की तरह, जो सफ़ेद तो होता है पर मछली ताकता रहता है। इन सबके बीच एक ही सच्चा आदमी था, जानकीनाथ। प्रेमचंद ने ख़ुद यह उपमा कहानी में दी है, इसलिए यह नाम कहानी के भीतर से निकला हुआ लगता है और अंत का रहस्य भी नहीं खोलता।”

Tip: ऐसा नाम मत चुनिए जो उत्तर बता दे, जैसे ‘जानकीनाथ दीवान बने’। अच्छा शीर्षक पढ़ने की जिज्ञासा बढ़ाता है, बुझाता नहीं
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