प्र1.
कहानी में से चुनकर यहाँ कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? — “इस पद के लिए ऐसे पुरुष की आवश्यकता थी, जिसके हृदय में दया हो और साथ-साथ आत्मबल। हृदय वह जो उदार हो, आत्मबल वह जो आपत्ति का वीरता के साथ सामना करे। ऐसे गुणवाले संसार में कम हैं और जो हैं, वे कीर्ति और मान के शिखर पर बैठे हुए हैं।”
उत्तर
सरल अर्थ — दीवान के पद के लिए ऐसा व्यक्ति चाहिए था जिसमें दो गुण एक साथ हों — दया और आत्मबल। दया यानी दूसरों का दुख देखकर पिघल जाने वाला उदार हृदय; आत्मबल यानी मुसीबत आने पर डटकर, हिम्मत से उसका सामना करने की मन की ताक़त। सुजानसिंह कहते हैं कि दोनों गुण एक ही आदमी में मिलना दुर्लभ है, और जिनमें मिल जाते हैं वे संसार में यश और सम्मान के सबसे ऊँचे स्थान पर पहुँच जाते हैं।
| गुण | पंक्ति में उसकी परिभाषा | कहानी में उसका प्रमाण |
|---|---|---|
| दया / उदार हृदय | “हृदय वह जो उदार हो” | घायल होने पर भी युवक किसान की मदद के लिए रुका — “मैं तुम्हारी गाड़ी निकाल दूँ?” |
| आत्मबल | “आत्मबल वह जो आपत्ति का वीरता के साथ सामना करे” | “वह घुटने तक ज़मीन में गड़ गया, लेकिन हिम्मत न हारी। उसने फिर ज़ोर किया।” |
दोनों गुण साथ क्यों ज़रूरी हैं: केवल दया हो तो आदमी दुखी तो होगा, पर कीचड़ में उतरेगा नहीं — बाक़ी खिलाड़ी शायद मन में किसान के लिए दुख लेकर ही निकल गए। और केवल आत्मबल हो तो ताक़त तो होगी, पर वह ग़रीब के काम नहीं आएगी। दया बताती है कि क्या करना चाहिए, आत्मबल उसे कर दिखाता है। इसीलिए सुजानसिंह ने कहा कि ऐसे लोग “संसार में कम हैं”।
अपने शब्दों में कहिए तो: अच्छा शासक वही है जो ग़रीब का दर्द भी समझे और उस दर्द को दूर करने के लिए ख़ुद कीचड़ में उतरने से भी न घबराए।