मल्हार अध्याय 10 अनुमान या कल्पना से

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) “दूसरे दिन देश के प्रसिद्ध पत्रों में यह विज्ञापन निकला” — देश के प्रसिद्ध पत्रों में नौकरी का विज्ञापन किसने निकलवाया होगा? आपको ऐसा क्यों लगता है?
उत्तर

यह विज्ञापन दीवान सरदार सुजानसिंह ने ही निकलवाया होगा।

ऐसा लगने के चार कारण —

  1. यह काम उन्हीं को सौंपा गया था। महाराज ने त्यागपत्र स्वीकार करते समय शर्त रखी थी — “रियासत के लिए नया दीवान आप ही को खोजना पड़ेगा।” विज्ञापन उसी खोज का पहला क़दम है।
  2. विज्ञापन में उपस्थित होने का पता उन्हीं का है — “वे वर्तमान सरकार सुजानसिंह की सेवा में उपस्थित हों।” जो व्यक्ति उम्मीदवारों को अपने पास बुला रहा है, विज्ञापन भी उसी ने दिया होगा।
  3. शर्तें उन्हीं की सोच जैसी हैं। “ग्रेजुएट होना ज़रूरी नहीं… विद्या का कम, परंतु कर्तव्य का अधिक विचार किया जायेगा” — डिग्री से ऊपर आचरण को रखना उसी अनुभवी, नीतिकुशल आदमी का विचार हो सकता है जिसने चालीस साल राज-काज चलाया हो।
  4. व्यवस्था भी उन्होंने ही की। “सरदार सुजानसिंह ने इन महानुभावों के आदर-सत्कार का बड़ा अच्छा प्रबंध कर दिया था।” जिसने ठहरने-खाने का प्रबंध किया, बुलावा भी उसी का था।
अनुमान कैसे लगाया जाता है: अनुमान का अर्थ अंदाज़ा लगाना नहीं, बल्कि पाठ में बिखरे सुरागों को जोड़कर सबसे संभावित उत्तर तक पहुँचना है। यहाँ चार सुराग — काम सौंपा जाना, पता उन्हीं का होना, शर्तों का मिज़ाज, और प्रबंध — सब एक ही व्यक्ति की ओर इशारा करते हैं।
प्र2.
(ख) “इस विज्ञापन ने सारे मुल्क में तहलका मचा दिया।” विज्ञापन ने पूरे देश में तहलका क्यों मचा दिया होगा?
उत्तर

क्योंकि यह विज्ञापन उस ज़माने के आम विज्ञापनों से बिलकुल अलग था — उसने वे सारी शर्तें हटा दीं जो साधारण आदमी को ऐसे पदों से दूर रखती थीं।

विज्ञापन में क्या थाइससे तहलका क्यों मचा
“ऐसा ऊँचा पद और किसी प्रकार की कैद नहीं?”दीवानी रियासत का सबसे बड़ा पद था — मान, अधिकार और वेतन तीनों। और शर्त कोई नहीं!
“यह ज़रूरी नहीं है कि वे ग्रेजुएट हों”डिग्री की शर्त हटते ही वे लाखों लोग भी उम्मीदवार बन गए जो पढ़ाई पूरी न कर सके थे। दरवाज़ा सबके लिए खुल गया।
“विद्या का कम, परंतु कर्तव्य का अधिक विचार”हर आदमी को लगा कि मेरा आचरण तो अच्छा है ही — तो मौक़ा मेरा भी है।
“केवल नसीब का खेल है”जब चुनाव का आधार साफ़ न हो तो हर व्यक्ति अपना भाग्य आज़माना चाहता है — “सैकड़ों आदमी अपना-अपना भाग्य परखने के लिए चल खड़े हुए।”
देश के प्रसिद्ध पत्रों में छपाख़बर एक शहर तक सीमित नहीं रही — “कोई पंजाब से चला आता था, कोई मद्रास से।” पूरे देश में एक साथ पहुँची।

इसी का नतीजा था कि “देवगढ़ में नए-नए और रंग-बिरंगे मनुष्य दिखाई देने लगे” और “प्रत्येक रेलगाड़ी से उम्मीदवारों का एक मेला-सा उतरता।”

तहलका का अर्थ: हलचल, खलबली। यह मुहावरा तभी प्रयोग होता है जब कोई ख़बर बहुत तेज़ी से फैले और लोगों को हिलाकर रख दे। जैसे — “नए पुल के खुलने की ख़बर ने पूरे क़स्बे में तहलका मचा दिया।”
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