मल्हार अध्याय 10 विज्ञापन

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) कहानी में इस विज्ञापन की सामग्री को पढ़िए। इसके बाद अपने समूह में मिलकर इस विज्ञापन को अपनी कल्पना का उपयोग करते हुए बनाइए। (संकेत— विज्ञापन बनाने के लिए आप एक चौकोर कागज़ पर हाशिया बनाइए। इसके बाद इस हाशिए के भीतर के खाली स्थान पर सुंदर लिखाई, चित्रों, रंगों आदि की सहायता से सभी आवश्यक जानकारी लिख दीजिए। आप बिना रंगों या चित्रों के भी विज्ञापन बना सकते हैं।)
उत्तर

पहले कहानी (पृष्ठ 106) से विज्ञापन की सारी जानकारी छाँट लीजिए, फिर उसे सुंदर ढंग से सजाइए। जानकारी वही रहेगी — सजावट आपकी कल्पना की होगी।

1. कहानी से निकली आवश्यक जानकारी —

  • पद — दीवान (रियासत देवगढ़)
  • कितने — एक सुयोग्य दीवान की ज़रूरत
  • कहाँ उपस्थित हों — वर्तमान सरदार सुजानसिंह की सेवा में
  • योग्यता — ग्रेजुएट होना ज़रूरी नहीं; हृष्ट-पुष्ट होना आवश्यक; मंदाग्नि के रोगी कष्ट न उठाएँ
  • चुनाव की विधि — एक महीने तक रहन-सहन और आचार-विचार की देखभाल
  • किस बात पर ज़ोर — “विद्या का कम, परंतु कर्तव्य का अधिक विचार किया जायेगा”
  • परिणाम — जो इस परीक्षा में पूरे उतरेंगे, वे इस उच्च पद पर सुशोभित होंगे

2. नमूना विज्ञापन (इसे अपने कागज़ पर बड़े अक्षरों में उतारिए) —

रियासत देवगढ़ — आवश्यकता है
पददीवान (एक पद)
कौन आवेदन करेजो सज्जन अपने को इस पद के योग्य समझें
शैक्षिक योग्यताग्रेजुएट होना आवश्यक नहीं
शारीरिक योग्यताहृष्ट-पुष्ट होना आवश्यक; कमज़ोर पाचनवाले कष्ट न उठाएँ
चुनाव कैसेएक मास तक रहन-सहन एवं आचार-विचार की देखभाल
किसे वरीयताविद्या से अधिक कर्तव्य को महत्त्व दिया जाएगा
कहाँ उपस्थित होंसरदार सुजानसिंह की सेवा में, देवगढ़
पंक्ति (नारा)“डिग्री नहीं, चरित्र लाइए!”

3. बनाते समय ध्यान रखिए —

  • हाशिया पहले बनाइए, फिर भीतर लिखिए — इससे विज्ञापन साफ़-सुथरा दिखता है।
  • सबसे ऊपर सबसे बड़े अक्षरों में एक ही बात — “आवश्यकता है: दीवान”।
  • बाक़ी जानकारी छोटे-छोटे बिंदुओं में; पूरा पैराग्राफ़ मत लिखिए, कोई नहीं पढ़ता।
  • चाहें तो एक चित्र बनाइए — राजमहल, तराज़ू या मुहर। रंग न हों तो भी चलेगा।
  • अंत में पता और “उपस्थित हों” की पंक्ति ज़रूर लिखिए।
Tip: अच्छे विज्ञापन में क्या, किसके लिए, कहाँ और कब — ये चारों बातें एक नज़र में दिख जानी चाहिए। इसे जाँचने का तरीक़ा: अपना विज्ञापन किसी साथी को पाँच सेकंड दिखाइए और पूछिए कि उसे क्या-क्या याद रहा।
प्र2.
(ख) आपने भी अपने आस-पास दीवारों पर, समाचार-पत्रों में या पत्रिकाओं में, मोबाइल फोन या दूरदर्शन पर अनेक विज्ञापन देखे होंगे। अपने किसी मनपसंद विज्ञापन को याद कीजिए। आपको वह अच्छा क्यों लगता है? सोचकर अपने समूह में बताइए। अपने समूह के बिंदुओं को लिख लीजिए।
उत्तर

यह आपके अपने अनुभव का प्रश्न है, इसलिए उत्तर हर विद्यार्थी का अलग होगा। पर अच्छा उत्तर वही है जो केवल “मुझे पसंद है” न कहे, बल्कि कारण गिनाए

कारण बताने के लिए ये बिंदु काम आएँगे —

  • पंक्ति/नारा — क्या उसकी कोई लाइन याद रह जाती है?
  • संगीत या धुन — क्या उसका गीत गुनगुनाने लगते हैं?
  • चित्र या दृश्य — क्या उसमें कोई प्यारा या मज़ेदार दृश्य है?
  • कहानी — क्या 30 सेकंड में एक पूरी छोटी कहानी कह दी जाती है?
  • भावना — हँसी, अपनापन, देशप्रेम या माँ-बच्चे का स्नेह?
  • उपयोगी संदेश — जैसे टीका लगवाइए, हेलमेट पहनिए, पानी बचाइए, बेटी पढ़ाइए।
  • सच्चाई — क्या वह वही कहता है जो वस्तु सचमुच कर सकती है?

नमूना उत्तर: “मुझे दूरदर्शन पर आने वाला पोलियो की दवा का विज्ञापन सबसे अच्छा लगता है। इसमें एक छोटी बच्ची अपने भाई का हाथ पकड़कर बूथ तक ले जाती है और अंत में एक ही पंक्ति आती है — ‘दो बूँद ज़िंदगी की’। मुझे यह इसलिए अच्छा लगता है क्योंकि (1) इसकी पंक्ति बहुत छोटी है और तुरंत याद हो जाती है, (2) इसमें डराया नहीं जाता, बल्कि बच्चों का प्यार दिखाया जाता है, और (3) यह कोई चीज़ बेचता नहीं, एक ज़रूरी काम याद दिलाता है। मेरी दादी को भी यह विज्ञापन याद है, इसी से पता चलता है कि यह कितना असरदार है।”

समूह में क्या कीजिए: हर सदस्य अपना पसंदीदा विज्ञापन और एक कारण बताए। फिर देखिए कि किस कारण का नाम सबसे ज़्यादा बार आया — प्रायः ‘याद रह जाने वाली पंक्ति’ और ‘भावना’ सबसे आगे निकलते हैं। यही आपके समूह का निष्कर्ष होगा।
प्र3.
(ग) विज्ञापनों से लाभ होते हैं, हानि होती हैं, या दोनों? अपने समूह में चर्चा कीजिए और चर्चा के बिंदु लिखकर कक्षा में साझा कीजिए।
उत्तर

सबसे सही उत्तर है — दोनों। विज्ञापन एक औज़ार है; लाभ या हानि इस बात पर निर्भर करता है कि उसमें कही गई बात सच है या नहीं और देखने वाला उसे सोच-समझकर लेता है या नहीं

लाभहानि
नई और उपयोगी जानकारी मिलती है — नई दवा, नई सुविधा, नई योजना।वस्तु को बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया जाता है; कई बार वह वैसी होती ही नहीं।
रोज़गार की सूचना दूर-दूर तक पहुँचती है — कहानी का विज्ञापन पंजाब से मद्रास तक पहुँच गया।बिना ज़रूरत की चीज़ें ख़रीदने का मन बनता है — फ़िज़ूलख़र्ची बढ़ती है।
जनहित के संदेश फैलते हैं — टीकाकरण, स्वच्छता, यातायात के नियम, बेटी की पढ़ाई।बच्चों पर असर पड़ता है; वे चमकदार पैकेट देखकर कम पौष्टिक खाने की ज़िद करते हैं।
छोटे व्यापारी और कारीगर अपनी वस्तु दूर के ग्राहकों तक पहुँचा पाते हैं।‘जो दिखता है वही बिकता है’ — अच्छी पर बिना विज्ञापन वाली वस्तु पीछे रह जाती है।
दाम, छूट और गुणों की तुलना करके ग्राहक बेहतर चुनाव कर सकता है।कभी-कभी झूठे दावे या ठगी भी विज्ञापन के रूप में आ जाते हैं।

चर्चा के लिए निष्कर्ष-वाक्य (कक्षा में यही साझा कीजिए): “विज्ञापन से हानि तब होती है जब हम उसे सच मानकर देखते हैं, और लाभ तब होता है जब हम उसे सूचना मानकर देखते हैं और ख़रीदने से पहले ख़ुद जाँच लेते हैं।”

कहानी से जोड़िए: ‘परीक्षा’ का विज्ञापन बिलकुल सच्चा था — उसमें जो लिखा था, ठीक वही हुआ। उम्मीदवारों की भूल यह थी कि उन्होंने विज्ञापन को आधा पढ़ा — “ग्रेजुएट होना ज़रूरी नहीं” तो सबने पढ़ लिया, पर “कर्तव्य का अधिक विचार किया जायेगा” किसी ने गंभीरता से नहीं लिया। विज्ञापन पूरा पढ़ना भी एक कला है।
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