पहले कहानी (पृष्ठ 106) से विज्ञापन की सारी जानकारी छाँट लीजिए, फिर उसे सुंदर ढंग से सजाइए। जानकारी वही रहेगी — सजावट आपकी कल्पना की होगी।
1. कहानी से निकली आवश्यक जानकारी —
- पद — दीवान (रियासत देवगढ़)
- कितने — एक सुयोग्य दीवान की ज़रूरत
- कहाँ उपस्थित हों — वर्तमान सरदार सुजानसिंह की सेवा में
- योग्यता — ग्रेजुएट होना ज़रूरी नहीं; हृष्ट-पुष्ट होना आवश्यक; मंदाग्नि के रोगी कष्ट न उठाएँ
- चुनाव की विधि — एक महीने तक रहन-सहन और आचार-विचार की देखभाल
- किस बात पर ज़ोर — “विद्या का कम, परंतु कर्तव्य का अधिक विचार किया जायेगा”
- परिणाम — जो इस परीक्षा में पूरे उतरेंगे, वे इस उच्च पद पर सुशोभित होंगे
2. नमूना विज्ञापन (इसे अपने कागज़ पर बड़े अक्षरों में उतारिए) —
| रियासत देवगढ़ — आवश्यकता है | |
|---|---|
| पद | दीवान (एक पद) |
| कौन आवेदन करे | जो सज्जन अपने को इस पद के योग्य समझें |
| शैक्षिक योग्यता | ग्रेजुएट होना आवश्यक नहीं |
| शारीरिक योग्यता | हृष्ट-पुष्ट होना आवश्यक; कमज़ोर पाचनवाले कष्ट न उठाएँ |
| चुनाव कैसे | एक मास तक रहन-सहन एवं आचार-विचार की देखभाल |
| किसे वरीयता | विद्या से अधिक कर्तव्य को महत्त्व दिया जाएगा |
| कहाँ उपस्थित हों | सरदार सुजानसिंह की सेवा में, देवगढ़ |
| पंक्ति (नारा) | “डिग्री नहीं, चरित्र लाइए!” |
3. बनाते समय ध्यान रखिए —
- हाशिया पहले बनाइए, फिर भीतर लिखिए — इससे विज्ञापन साफ़-सुथरा दिखता है।
- सबसे ऊपर सबसे बड़े अक्षरों में एक ही बात — “आवश्यकता है: दीवान”।
- बाक़ी जानकारी छोटे-छोटे बिंदुओं में; पूरा पैराग्राफ़ मत लिखिए, कोई नहीं पढ़ता।
- चाहें तो एक चित्र बनाइए — राजमहल, तराज़ू या मुहर। रंग न हों तो भी चलेगा।
- अंत में पता और “उपस्थित हों” की पंक्ति ज़रूर लिखिए।