मल्हार अध्याय 10 आपकी बात

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) यदि कहानी में दीवान साहब के स्थान पर आप होते तो योग्य व्यक्ति को कैसे चुनते?
उत्तर

यह आपकी अपनी सोच का प्रश्न है, इसलिए हर विद्यार्थी का उत्तर अलग होगा। पर अच्छे उत्तर में तीन बातें होनी चाहिए — (1) आप कौन-से गुण देखना चाहेंगे, (2) उन्हें परखने का आपका तरीक़ा क्या होगा, और (3) वह तरीक़ा न्यायपूर्ण क्यों है।

सोचने में मदद करने वाले बिंदु —

  • केवल बातचीत से मत चुनिए — इंटरव्यू में हर आदमी अच्छा ही बोलता है, जैसे कहानी में सब “नम्रता और सदाचार का देवता बना मालूम” देते थे।
  • काम देकर परखिए — कोई सचमुच का काम सौंपिए और देखिए कि वह कैसे करता है।
  • बिना बताए देखिए — असली स्वभाव तब दिखता है जब आदमी को लगे कि कोई देख नहीं रहा।
  • कमज़ोर के साथ व्यवहार देखिए — यह सबसे भरोसेमंद कसौटी है।
  • एक ही मौक़े पर फ़ैसला मत कीजिए — कई दिन, कई परिस्थितियाँ देखिए।

नमूना उत्तर: “यदि मैं दीवान साहब की जगह होता तो मैं भी लिखित परीक्षा या डिग्री को सबसे ऊपर न रखता, क्योंकि पढ़ाई से यह पता नहीं चलता कि आदमी का दिल कैसा है। मैं चार तरह से परखता —

  1. पहले सचमुच का काम — हर उम्मीदवार को एक-एक गाँव भेजता और कहता कि वहाँ की एक समस्या का हल निकालकर लाओ। जो सुनकर लौट आए और जो सचमुच कुछ करके आए, दोनों में फ़र्क़ अपने-आप दिख जाता।
  2. फिर कमज़ोर के साथ व्यवहार — मैं देखता कि वे अपने नौकरों, चपरासियों और ग़रीब किसानों से कैसे बात करते हैं। जो अपने से छोटे से भी आदर से बोले, वही बड़े पद के लायक़ है।
  3. फिर धैर्य की जाँच — किसी काम में जान-बूझकर देर करवाता और देखता कि कौन झुँझलाकर चिल्लाने लगता है और कौन शांत रहकर रास्ता खोजता है।
  4. अंत में ईमानदारी — हिसाब में जान-बूझकर कुछ रुपये अधिक रख देता और देखता कि कौन लौटाता है।

इन चारों में जो खरा उतरता, उसे मैं चुनता — क्योंकि दीवान का काम आदेश देना नहीं, लोगों की देखभाल करना है।”

ध्यान दीजिए: ये सारे तरीक़े एक ही सिद्धांत पर टिके हैं, वही जो सुजानसिंह ने अपनाया — कहने से नहीं, करने से परखो। इसीलिए उन्होंने भाषण नहीं करवाया, गाड़ी कीचड़ में फँसा दी।
प्र2.
(ख) यदि आपको कक्षा का मॉनिटर चुनने के लिए कहा जाए तो आप उसे कैसे चुनेंगे? उसमें किन-किन गुणों को देखेंगे? गुणों की परख के लिए क्या-क्या करेंगे?
उत्तर

इस प्रश्न के तीन हिस्से हैं — कैसे चुनेंगे, कौन-से गुण, और परख कैसे। तीनों का उत्तर अलग-अलग लिखिए, तभी उत्तर पूरा माना जाएगा।

1. गुण और उन्हें परखने के तरीक़े —

गुणयह क्यों ज़रूरी हैपरखने के लिए क्या करें
निष्पक्षतामॉनिटर को अपने दोस्तों और बाक़ी बच्चों में फ़र्क़ नहीं करना चाहिएएक दिन के लिए उसे नाम लिखने का काम दीजिए और देखिए कि क्या वह अपने मित्र का नाम भी लिखता है
दया / सहयोगजो कमज़ोर साथी की मदद करे, वही सबका भरोसा जीतेगादेखिए कि जो साथी पीछे रह गया है या जिसकी कॉपी नहीं है, उसकी मदद कौन बिना कहे करता है
ज़िम्मेदारीकाम याद रखना और समय पर करना मॉनिटर का मुख्य काम हैएक हफ़्ते के लिए कोई छोटी ज़िम्मेदारी दीजिए — पौधों को पानी देना, पुस्तकालय की किताबें लौटाना — और देखिए कि याद कौन रखता है
शांत स्वभावशोर में चिल्लाने वाला मॉनिटर शोर और बढ़ाता हैकक्षा में शोर होने पर देखिए कौन बिना चीख़े व्यवस्था बना लेता है
सच बोलनाशिक्षक को सही जानकारी मॉनिटर से ही मिलती हैदेखिए कि अपनी ग़लती होने पर वह मान लेता है या बहाना बनाता है
सबका साथ लेकर चलनाअच्छा नेता अकेले काम नहीं करता, काम बाँटता हैकोई समूह-कार्य दीजिए और देखिए कि वह सब काम ख़ुद कर लेता है या सबको जोड़ता है

2. नमूना उत्तर (चुनाव की विधि): “मैं मॉनिटर सिर्फ़ इसलिए नहीं चुनूँगा कि कौन सबसे तेज़ पढ़ता है या सबसे ज़ोर से बोलता है। मेरी विधि यह होगी —

  1. पहले पूरी कक्षा से पूछूँगा कि मॉनिटर में कौन-से गुण होने चाहिए, और सबकी राय से पाँच गुण तय कर लूँगा — निष्पक्षता, ज़िम्मेदारी, दया, शांत स्वभाव और सच्चाई
  2. फिर एक-एक हफ़्ते के लिए चार-पाँच साथियों को बारी-बारी मॉनिटर का काम दूँगा, ताकि सब देख सकें कि कौन कैसे काम करता है।
  3. इसके बाद गुप्त मतदान कराऊँगा, ताकि कोई दबाव में वोट न दे।
  4. चुने जाने के बाद भी हर महीने कक्षा से पूछा जाएगा कि काम ठीक चल रहा है या नहीं।

इस तरह मॉनिटर बातों से नहीं, काम करके चुना जाएगा — ठीक वैसे ही जैसे सुजानसिंह ने जानकीनाथ को चुना था।”

Check it yourself: अपनी कक्षा में यह करके देखिए — एक सप्ताह चुपचाप नोट कीजिए कि बिना कहे कौन झाड़ू उठाता है, कौन गिरी हुई किताब उठाकर रख देता है, कौन नए बच्चे से बात करता है। यह सूची अक्सर वोट के नतीजे से ज़्यादा सच्ची होती है।
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