मल्हार अध्याय 10 अभिनय

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
कहानी में युवक और किसान की बातचीत संवादों के रूप में दी गई है। यह भी बताया गया है कि उन दोनों ने ये बातें कैसे बोलीं। अपने समूह के साथ मिलकर तैयारी कीजिए और कहानी के इस भाग को कक्षा में अभिनय के द्वारा प्रस्तुत कीजिए। प्रत्येक समूह से अभिनेता या अभिनेत्री कक्षा में सामने आएँगे और एक-एक संवाद अभिनय के साथ बोलकर दिखाएँगे।
उत्तर

यह मंचन की गतिविधि है। कहानी ने आपका आधा काम पहले ही कर दिया है — उसने हर संवाद के साथ यह भी लिख दिया है कि वह किस भाव से बोला गया। अभिनय करते समय बस उसी संकेत का पालन कीजिए।

1. संवाद और उनके भाव (यही आपकी स्क्रिप्ट है) —

कौन बोलता हैसंवादपाठ का संकेत — कैसे बोलेंअभिनय में क्या कीजिए
युवक“मैं तुम्हारी गाड़ी निकाल दूँ?”इससे पहले — डंडा रख दिया, कोट उतार डालापहले लँगड़ाकर आइए, गाड़ी देखकर ठिठकिए, कोट उतारने का अभिनय कीजिए, फिर सहज स्वर में पूछिए
किसान“हुजूर, मैं आपसे कैसे कहूँ?”झुककर बोला”कमर झुकाकर, हाथ जोड़ते हुए, संकोच भरे धीमे स्वर में
युवक“मालूम होता है, तुम यहाँ बड़ी देर से फँसे हो। अच्छा, तुम गाड़ी पर जाकर बैलों को साधो, मैं पहियों को ढकेलता हूँ, अभी गाड़ी ऊपर चढ़ जाती है।”आश्वासन देने वाला, योजना बताता हुआ स्वरहाथ से पहिये और बैलों की ओर इशारा कीजिए; स्वर में भरोसा हो, जल्दबाज़ी नहीं
किसान“महाराज, आपने आज मुझे उबार लिया, नहीं तो सारी रात मुझे यहाँ बैठना पड़ता।”हाथ जोड़कर खड़ा हो गया”हाथ जोड़े, कृतज्ञता से भरा ऊँचा-सा स्वर
युवक“अब मुझे कुछ इनाम देते हो?”हँसकर कहा”हल्की हँसी के साथ, मज़ाक़ के लहजे में — यह गंभीर माँग नहीं है
किसान“नारायण चाहेंगे तो दीवानी आपको ही मिलेगी।”गंभीर भाव से कहा”हँसी बिलकुल नहीं; सीधे आँखों में देखकर, ठहरे हुए स्वर में — यहीं से रहस्य खुलने लगता है
किसान“गहरे पानी में पैठने से ही मोती मिलता है।”मुस्कराकर बोला”हल्की, रहस्य भरी मुसकान; कहकर धीरे से मुड़ जाइए — दर्शक को लगे कि इसमें कुछ छिपा है

2. तैयारी कैसे कीजिए —

  • समूह में तीन काम बाँटिए — युवक, किसान, और सूत्रधार (जो बीच का विवरण पढ़े, जैसे “कीचड़ बहुत ज़्यादा था… वह घुटने तक ज़मीन में गड़ गया”)।
  • मंच-सामग्री सरल रखिए — एक लाठी, एक कोट या चादर, कुर्सियों से बनी ‘गाड़ी’। कीचड़ और अँधेरा अभिनय से दिखाइए, सामान से नहीं।
  • शरीर की भाषा याद रखिए — युवक लँगड़ाकर चलेगा (उसके पाँव में चोट है) और किसान थका और सहमा रहेगा।
  • दो-तीन बार पूरा अभ्यास कीजिए, फिर बिना किताब देखे बोलिए।
Tip: संवाद ज़ोर से बोलना ही अच्छा अभिनय नहीं है। यहाँ सबसे असरदार क्षण धीमे स्वर वाले हैं — “हुजूर, मैं आपसे कैसे कहूँ?” और “गहरे पानी में पैठने से ही मोती मिलता है।” ठहराव (pause) भी अभिनय का हिस्सा है।
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