मल्हार अध्याय 10 मन के भाव

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
“स्वार्थ था, मद था, मगर उदारता और वात्सल्य का नाम भी न था।” इस वाक्य में कुछ शब्दों के नीचे रेखा खिंची हुई है। ये सभी नाम हैं, लेकिन दिखाई देने वाली वस्तुओं, व्यक्तियों या जगहों के नाम नहीं हैं। ये सभी शब्द मन के भावों के नाम हैं। आप कहानी में से ऐसे ही अन्य नामों को खोजकर नीचे दिए गए रिक्त स्थानों में लिखिए।
उत्तर

पुस्तक में ‘भावों के नाम’ लिखे सूरज के चारों ओर सात बादल बने हैं। उनमें कहानी से चुने हुए ये शब्द भरे जा सकते हैं —

बादलभाव का नामकहानी में कहाँ
1दया“जिसके हृदय में दया थी और साहस था”
2साहस“किसी से मदद माँगने का साहस न हुआ”
3सहानुभूति“बंद आँखों से, जिनमें सहानुभूति न थी”
4ईर्ष्या“उन आँखों में सत्कार था, इन आँखों में ईर्ष्या
5नम्रता“वह नम्रता और सदाचार का देवता बना मालूम देता था”
6आत्मबल“जिसके हृदय में दया हो और साथ-साथ आत्मबल
7निराशा“प्रत्येक के चेहरे पर आशा और निराशा के रंग आते थे”

और भी शब्द (यदि बादल कम पड़ जाएँ या आपको दूसरे चाहिए) —

  • आशा — “प्रत्येक के चेहरे पर आशा और निराशा के रंग आते थे”
  • आदर / सत्कार — “अनुभवशील नीतिकुशल दीवान का बड़ा आदर करते थे”
  • घृणा — “मिस्टर ‘ल’ को किताब से घृणा थी”
  • क्षमा — “उसके लिए मुझे क्षमा कीजिए”
  • उत्साह — “खेल बड़े उत्साह से जारी था”
  • संदेह — “उसके मन में एक संदेह हुआ”
  • हिम्मत — “लेकिन हिम्मत न हारी”
  • विनय, कीर्ति, मान, सदाचार, संकल्प, उदारता, वात्सल्य, स्वार्थ, मद
इन्हें पहचानने का सूत्र: इन शब्दों की ओर उँगली नहीं उठाई जा सकती — इन्हें छुआ, देखा या तौला नहीं जा सकता, केवल महसूस किया जा सकता है। ‘गाड़ी’, ‘बैल’, ‘नाला’, ‘देवगढ़’ दिखाई देने वाली चीज़ों/जगहों के नाम हैं; ‘दया’, ‘ईर्ष्या’, ‘साहस’ मन के भावों के नाम हैं। व्याकरण में इन्हें भाववाचक संज्ञा कहते हैं।
Try This: ऐसे शब्द अक्सर -ता, -त्व, -पन, -आई जोड़कर बनते हैं — उदार → उदारता, मनुष्य → मनुष्यत्व, बच्चा → बचपन, अच्छा → अच्छाई। इसी तरह पाँच नए शब्द बनाकर वाक्य में प्रयोग कीजिए।
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