प्र1.
“विद्या का कम, परंतु कर्तव्य का अधिक विचार किया जाएगा।” ‘कम’ का विपरीत अर्थ देने वाला शब्द है ‘अधिक’। इसी प्रकार के कुछ विपरीतार्थक शब्द नीचे दिए गए हैं लेकिन वे आमने-सामने नहीं हैं। रेखाएँ खींचकर विपरीतार्थक शब्दों के सही जोड़े बनाइए— स्तंभ 1: 1. आना, 2. गुण, 3. आदर, 4. स्वस्थ, 5. कम, 6. दयालु, 7. योग्य, 8. हार, 9. आशा। स्तंभ 2: 1. निर्दयी, 2. निराशा, 3. जीत, 4. अवगुण, 5. अस्वस्थ, 6. अधिक, 7. जाना, 8. अयोग्य, 9. अनादर।
उत्तर
सही जोड़े नीचे दिए गए हैं। पुस्तक में इन्हीं के बीच रेखा खींचिए।
| स्तंभ 1 | मिलेगा | स्तंभ 2 | विपरीत कैसे बना |
|---|---|---|---|
| 1. आना | → 7 | जाना | दोनों बिलकुल उलटी क्रियाएँ हैं — इधर की ओर बढ़ना और उधर की ओर बढ़ना। यह जोड़ा उपसर्ग से नहीं, अलग शब्द से बनता है। |
| 2. गुण | → 4 | अवगुण | ‘गुण’ के आगे अव- उपसर्ग लगा — अच्छाई से बुराई बन गई। |
| 3. आदर | → 9 | अनादर | ‘आदर’ के आगे अन- उपसर्ग लगा — सम्मान से अपमान। |
| 4. स्वस्थ | → 5 | अस्वस्थ | ‘स्वस्थ’ के आगे अ- उपसर्ग लगा — तंदुरुस्त से बीमार। |
| 5. कम | → 6 | अधिक | यही जोड़ा पाठ के वाक्य में आया है — “विद्या का कम, परंतु कर्तव्य का अधिक विचार…” |
| 6. दयालु | → 1 | निर्दयी | निर्- उपसर्ग का अर्थ है ‘बिना’ — निर् + दय = जिसमें दया न हो। |
| 7. योग्य | → 8 | अयोग्य | ‘योग्य’ के आगे अ- उपसर्ग — लायक़ से नालायक़। |
| 8. हार | → 3 | जीत | अलग शब्द से बना जोड़ा। कहानी में दोनों एक साथ आए हैं — “हार-जीत का निर्णय न हो सका।” |
| 9. आशा | → 2 | निराशा | निर्- + आशा = निराशा। यह जोड़ा भी कहानी में साथ आया है — “चेहरे पर आशा और निराशा के रंग आते थे।” |
एक नज़र में सही क्रम: 1→7, 2→4, 3→9, 4→5, 5→6, 6→1, 7→8, 8→3, 9→2.
पहचानने का आसान तरीक़ा: पहले वे जोड़े छाँटिए जिनमें दूसरा शब्द पहले शब्द के आगे अ-, अन-, अव-, निर्- जोड़कर बना हो (गुण–अवगुण, आदर–अनादर, स्वस्थ–अस्वस्थ, योग्य–अयोग्य, दयालु–निर्दयी, आशा–निराशा)। जो बचें, वे बिलकुल अलग शब्दों वाले जोड़े होंगे — आना–जाना, हार–जीत, कम–अधिक।
Try This: इसी तरह पाठ से और जोड़े बनाइए — सुयोग्य × अयोग्य, उदारता × कंजूसी, साहस × कायरता, ईर्ष्या × प्रेम, स्वार्थ × परमार्थ, नई × पुरानी, बूढ़ा × जवान। हर जोड़े से एक-एक वाक्य भी बनाइए, जैसे — “परिश्रम से हार भी जीत में बदल जाती है।”