प्र1.
(क) हर व्यक्ति अपनी बुद्धि के अनुसार स्वयं को अच्छा दिखाने की कोशिश करता है। स्वयं को अच्छा दिखाने के लिए लोग क्या-क्या करते हैं? (संकेत— मेहनत करना, कसरत करना, साफ़-सुथरे रहना आदि)
उत्तर
लोग दो तरह के काम करते हैं — कुछ ऐसे जो सचमुच अच्छे भी बनाते हैं, और कुछ ऐसे जो केवल ऊपर से अच्छा दिखाते हैं। चर्चा में दोनों को अलग-अलग रखिए।
| लोग क्या करते हैं | यह किस तरह का काम है | कहानी का उदाहरण |
|---|---|---|
| मेहनत करना, समय पर काम पूरा करना | सचमुच अच्छा बनाने वाला | जानकीनाथ का घायल पाँव लेकर भी गाड़ी निकालना |
| कसरत करना, जल्दी उठना, टहलना | अच्छा बनाने वाला — पर तभी, जब आदत बन जाए | मिस्टर ‘अ’ का बगीचे में टहलकर ऊषा-दर्शन करना (केवल एक महीने के लिए) |
| साफ़-सुथरे रहना, ढंग के कपड़े पहनना | अच्छी आदत, पर इससे स्वभाव नहीं बदलता | “रंगीन एमामे, चोगे और नाना प्रकार के अंगरखे… अपनी सज-धज दिखाने लगे” |
| मीठा बोलना, बड़ों-छोटों से आदर से पेश आना | अच्छा — यदि सबके साथ और हमेशा हो | मिस्टर ‘द’, ‘स’, ‘ज’ का अचानक नौकरों को ‘आप’ और ‘जनाब’ कहना |
| किताबें लेकर बैठना, अपनी डिग्रियाँ दिखाना | प्रायः दिखावा | मिस्टर ‘ल’ का ग्रंथों में डूबे रहना, जबकि उन्हें “किताब से घृणा थी” |
| अपनी उपलब्धियाँ बार-बार सुनाना, शेख़ी बघारना | शुद्ध दिखावा | हॉकी खेलकर हुनर दिखाना — “संभव है, कुछ हाथों की सफ़ाई ही काम कर जाए” |
| दूसरों की मदद करना, बिना बताए काम कर देना | सबसे सच्ची अच्छाई | कोट उतारकर कीचड़ में उतरना — वहाँ देखने वाला कोई नहीं था |
चर्चा का निष्कर्ष: ऊपर की सूची में से जो काम आदमी तब भी करता है जब कोई देख न रहा हो, वह अच्छाई है; जो केवल किसी के देखते समय होता है, वह दिखावा है। कहानी का पूरा महीना यही अंतर परखने में बीता।