पहले पुस्तक के पृष्ठ 140 पर बनी चित्रात्मक सूचना को ध्यान से पढ़िए। उसमें दी गई बातें ये हैं — इन्हीं को जोड़कर अनुच्छेद बनेगा।
| चित्रात्मक सूचना में क्या लिखा है |
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| शीर्षक — “जब मॉरिशस में गूँजा जय हिंद” |
| सन 1834 में 2 नवंबर को एटलस नाम का जहाज़ भारतीय मज़दूरों को लेकर मॉरिशस पहुँचा था; वहाँ यह दिन अप्रवासी दिवस (इंडियन अराइवल डे) के रूप में मनाया जाता है। |
| मॉरिशस में भारतीय मूल के लोगों की आबादी देश में 68% से ज़्यादा है। |
| ब्रिटिश शासक गन्ने के खेतों में काम करने के लिए भारतीय मज़दूरों को वहाँ ले गए थे। |
| इनमें से ज़्यादातर बिहार के थे, लेकिन तमिल, तेलुगू और मराठियों की तादाद भी अच्छी-खासी थी। |
| यही वजह है कि मॉरिशस की संस्कृति में भोजपुरी गीतों और हिंदी फ़िल्मों का खास योगदान है। |
| मॉरिशस के पहले प्रधानमंत्री शिवसागर रामगुलाम भी भारतीय मूल के थे। |
नमूना उत्तर — अनुच्छेद
मॉरिशस और भारत का नाता आज का नहीं, लगभग दो सौ साल पुराना है। सन 1834 में 2 नवंबर के दिन ‘एटलस’ नाम का जहाज़ भारतीय मज़दूरों को लेकर मॉरिशस पहुँचा था। ब्रिटिश शासक इन मज़दूरों को वहाँ गन्ने के खेतों में काम कराने के लिए ले गए थे। मॉरिशस में वह दिन आज भी ‘अप्रवासी दिवस’ यानी इंडियन अराइवल डे के रूप में मनाया जाता है। जहाज़ पर सवार लोगों में सबसे अधिक बिहार के थे, पर तमिल, तेलुगू और मराठी लोगों की संख्या भी अच्छी-खासी थी। आज मॉरिशस की कुल आबादी में भारतीय मूल के लोग 68 प्रतिशत से भी ज़्यादा हैं। यही कारण है कि वहाँ की संस्कृति में भोजपुरी गीतों और हिंदी फ़िल्मों का खास योगदान है। मॉरिशस के पहले प्रधानमंत्री शिवसागर रामगुलाम भी भारतीय मूल के ही थे। इन्हीं बातों को देखकर रामधारी सिंह ‘दिनकर’ ने मॉरिशस को “हिंद महासागर में छोटा-सा हिंदुस्तान” कहा।