मल्हार अध्याय 12 हस्ताक्षर

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
आप जानते ही हैं कि यह पाठ हिंदी के प्रसिद्ध लेखक रामधारी सिंह ‘दिनकर’ ने लिखा है। वे अपने नाम को कुछ इस प्रकार लिखते थे— … अपनी पहचान प्रकट करने के लिए अपने नाम को किसी विशेष प्रकार से लिखने को हस्ताक्षर कहते हैं… नीचे दिए गए स्थान पर अपने हस्ताक्षर पाँच बार कीजिए। ध्यान रखें कि आपके हस्ताक्षर एक जैसे हों, अलग-अलग न हों।
उत्तर

यह पूरी तरह करने का काम है — हस्ताक्षर आपको अपनी पुस्तक में पाँच बार स्वयं करने हैं। पहले यह समझ लीजिए—

प्रश्नउत्तर
हस्ताक्षर क्या है?अपनी पहचान प्रकट करने के लिए अपने नाम को किसी विशेष प्रकार से लिखना।
पुस्तक में किसके हस्ताक्षर दिए हैं?रामधारी सिंह ‘दिनकर’ के — उन्होंने अपना पूरा नाम एक ही प्रवाह में, लहरदार अक्षरों में लिखा है।
हस्ताक्षर कहाँ-कहाँ काम आते हैं?विद्यालय की उपस्थिति और अंक-पत्र पर, प्रार्थना-पत्र के अंत में, बैंक के काग़ज़ों पर, परीक्षा-पत्र पर — जीवनभर अनेक कार्यों में।
सबसे ज़रूरी शर्त क्या है?पाँचों हस्ताक्षर एक जैसे हों। जो हस्ताक्षर हर बार बदल जाए, उसकी कोई कीमत नहीं रहती।

अपने हस्ताक्षर कैसे तय करें — तरीका

  1. पहले रफ़ काग़ज़ पर अपना नाम तीन-चार ढंग से लिखकर देखिए — पूरा नाम, केवल पहला नाम, नाम + उपनाम का पहला अक्षर।
  2. जो रूप आपको सबसे अच्छा लगे और जल्दी बन जाए, उसे चुन लीजिए। बहुत उलझा हुआ हस्ताक्षर बार-बार एक जैसा नहीं बनता।
  3. उसी को दस बार अभ्यास कीजिए और मिलाकर देखिए — क्या सब एक जैसे बने?
  4. अब पुस्तक में दिए स्थान पर पाँचों हस्ताक्षर कीजिए।
नमूना (केवल समझने के लिए): यदि आपका नाम ‘अनुराधा शर्मा’ है तो हस्ताक्षर हो सकता है — अनुराधा शर्मा, या अ. शर्मा, या केवल अनुराधा जिसके नीचे एक सीधी रेखा खिंची हो। जो भी चुनें, आज से वही रहने दीजिए।
सावधानी: हस्ताक्षर आपकी पहचान है, इसलिए इसे किसी और से न करवाएँ और न किसी और के हस्ताक्षर की नकल करें — दूसरे के हस्ताक्षर की नकल करना कानूनन अपराध है।
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