मल्हार अध्याय 12 सोच-विचार के लिए

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
(क) “नैरोबी का नेशनल पार्क चिड़ियाघर नहीं है।” नेशनल पार्क और चिड़ियाघर में क्या अंतर है?
उत्तर

सबसे बड़ा अंतर यह है कि चिड़ियाघर में जानवर पिंजरे या बाड़े में बंद रहते हैं और लोग बाहर से देखते हैं, जबकि नेशनल पार्क में जानवर खुले जंगल में आज़ाद घूमते हैं और लोग गाड़ी में बंद होकर उन्हें देखने जाते हैं।

लेखक ने नैरोबी के पार्क का जो वर्णन किया है, वही यह अंतर सिद्ध करता है — “शहर से बाहर बहुत बड़ा जंगल है, जिसमें घास अधिक, पेड़ बहुत कम हैं… जंगल में सर्वत्र अच्छी सड़कें बिछी हुई हैं और पर्यटकों की गाड़ियाँ उन पर दौड़ती ही रहती हैं।” वहाँ सिंह किसी पिंजरे में नहीं थे — वे खुले में लेटे थे और मोटरें उन्हें घेरकर खड़ी थीं।

आधारचिड़ियाघरनेशनल पार्क (राष्ट्रीय उद्यान)
जानवर कहाँ रहते हैंपिंजरे या बनाए हुए बाड़े मेंअपने प्राकृतिक जंगल में, खुले
भोजनरखवाले तय समय पर देते हैंजानवर स्वयं शिकार करते या चरते हैं
कौन बंद रहता हैजानवर बंद, आदमी खुलाआदमी गाड़ी में बंद, जानवर खुला
आकारशहर के भीतर, थोड़ी-सी ज़मीनकई वर्ग किलोमीटर का बड़ा क्षेत्र
उद्देश्यजानवर दिखाना और उनकी देखभालपूरे जंगल और उसके जीवों की रक्षा
भारत के उदाहरणदिल्ली का चिड़ियाघर, मैसूर का चिड़ियाघरजिम कॉर्बेट, काज़ीरंगा, गिर, रणथंभौर
लेखक ने यह वाक्य क्यों लिखा: पाठक के मन में ‘सिंह देखने गए’ सुनते ही चिड़ियाघर की तस्वीर बन सकती थी। इसलिए दिनकर ने शुरू में ही चेता दिया — “नैरोबी का नेशनल पार्क चिड़ियाघर नहीं है।” इसी कारण उन्हें सिंह ढूँढ़ने के लिए “दस-बीस मील के भीतर हर सड़क छान” लेनी पड़ी। चिड़ियाघर में ढूँढ़ना नहीं पड़ता — वहाँ जानवर का पता पहले से लिखा रहता है।
प्र2.
(ख) “हम लोग पेड़-पौधे और खरपात से भी बदतर समझे गए।” वे कौन थे जिन्होंने लेखक और अन्य लोगों को पेड़-पौधों और खरपात से भी बदतर समझ लिया था? उन्होंने ऐसा क्यों समझ लिया था?
उत्तर

वे थे — नैरोबी के नेशनल पार्क में आराम कर रहे सात-आठ सिंह। उन्हीं ने लेखक और बाकी पर्यटकों को घास-फूस से भी कम महत्त्व का समझा।

उन्होंने ऐसा क्यों समझा — पाठ की पंक्तियाँ ही कारण बताती हैं—

“तुर्रा यह कि सिंहों को यह जानने की कोई इच्छा ही नहीं थी कि हमें देखने को आने वाले लोग कौन हैं?”
“मोटरों और शीशे चढ़ाकर उनके भीतर बैठे लोगों की ओर सिंहों ने कभी भी दृष्टिपात नहीं किया, मानो हम लोग तुच्छातितुच्छ हों और उनकी नज़र में आने के योग्य बिल्कुल नहीं हों।”
  • सिंह वहाँ के मालिक हैं, मेहमान नहीं। वह जंगल उनका अपना घर है; आने-जाने वाली मोटरें उनके लिए रोज़ की बात हैं।
  • वे पर्यटकों के आदी हो चुके हैं। रोज़ आठ-दस मोटरें उन्हें घेरती हैं, पर कोई नुकसान नहीं पहुँचाता — इसलिए मोटरें उनके लिए न भोजन हैं, न खतरा। जो चीज़ न खाने की हो, न डरने की, सिंह उस पर ध्यान ही नहीं देते।
  • पेड़-पौधे तो फिर भी छाया देते हैं, घास चरने के काम आती है; मोटर में बंद आदमी सिंह के किसी काम का नहीं। इसीलिए लेखक कहते हैं कि हम खरपात से भी ‘बदतर’ समझे गए।

लेखक ने इसका सबूत भी दिया — “इस बीच एक सिंह ने उठकर जम्हाई ली, दूसरे ने देह को ताना, मगर हमारी ओर किसी भी सिंह ने नज़र नहीं उठाई।” आधे घंटे में एक बार भी नज़र न उठाना ही पूरी उपेक्षा है।

वाक्य का मज़ा: यह पंक्ति लेखक की विनोदपूर्ण आत्म-मज़ाक (self-mockery) है। इंसान समझता है कि वह सबसे महत्त्वपूर्ण प्राणी है; पर जंगल में जाकर उसे पता चलता है कि वहाँ उसकी गिनती घास-फूस से भी नीचे है। ‘तुच्छातितुच्छ’ (तुच्छ से भी तुच्छ) शब्द इसी भाव को और गहरा कर देता है।
प्र3.
(ग) “मॉरिशस की असली ताकत भारतीय लोग ही हैं।” पाठ में इस कथन के समर्थन में कौन-सा तर्क दिया गया है?
उत्तर

पाठ में दिया गया तर्क मॉरिशस की अर्थव्यवस्था से जुड़ा है — ऊख (गन्ने) की खेती और चीनी का उद्योग। लेखक की अपनी पंक्तियाँ ये हैं—

“मॉरिशस में ऊख की खेती और उसके व्यवसाय को जो सफलता मिली है, भारतीयों के कारण मिली है।”
“सारा मॉरिशस कृषि-प्रधान द्वीप है, क्योंकि चीनी वहाँ का प्रमुख अथवा एकमात्र उद्योग है।”
“किंतु भारतीय वंश के लोग यदि इस टापू में नहीं गए होते, तो ऊख की खेती असंभव हो जाती और चीनी के कारखाने बढ़ते ही नहीं।”

तर्क की कड़ी इस तरह जुड़ती है—

क्रमतर्क की कड़ी
1मॉरिशस कृषि-प्रधान द्वीप है और चीनी वहाँ का प्रमुख या एकमात्र उद्योग है।
2चीनी गन्ने से बनती है, इसलिए पूरा देश ऊख की खेती पर टिका है।
3ऊख की खेती भारतीय मूल के लोगों ने की और उसी से यह व्यवसाय सफल हुआ।
4निष्कर्ष — भारतीय न गए होते तो न खेती होती, न कारखाने; इसलिए मॉरिशस की असली ताकत भारतीय लोग ही हैं।
और भी सहारा: इसी बात को संख्या भी सिद्ध करती है — पाठ के अनुसार मॉरिशस की जनसंख्या के 67 प्रतिशत लोग भारतीय खानदान के हैं। जिस देश की दो-तिहाई आबादी और उसका एकमात्र बड़ा उद्योग जिन लोगों पर टिका हो, वही उस देश की ताकत कहलाएँगे।
प्र4.
(घ) “उस द्वीप को उन्होंने छोटा-सा हिंदुस्तान बना डाला।” भारत से गए लोगों ने मॉरिशस को हिंदुस्तान जैसा कैसे बना दिया है?
उत्तर

भारत से गए लोग अपने साथ केवल हाथ-पैर नहीं, अपनी भाषा, धर्म, त्योहार और नाम भी ले गए — और उन्हें परदेस में भी जीवित रखा। पाठ में इसके पाँच प्रमाण मिलते हैं—

किस चीज़ मेंपाठ का प्रमाण
जगहों के नामराजधानी पोर्टलुई की गलियों के नाम कलकत्ता, मद्रास, हैदराबाद और बम्बई हैं; एक पूरे मोहल्ले का नाम काशी है; वहाँ बनारस, गोकुल और ब्रह्मस्थान भी हैं।
भाषा“हिंदी का मॉरिशस में व्यापक प्रचार है” और क्रेयोल के बाद वहाँ की दूसरी जनभाषा भोजपुरी है — पड़ोस में रहने वाले चीनी भी भोजपुरी बोल लेते हैं।
धर्म और मंदिर“मॉरिशस के प्रत्येक प्रमुख ग्राम में शिवालय होता है” और वहाँ हिंदू तुलसीकृत रामायण (रामचरितमानस) का पाठ करते हैं या ढोलक और झाँझ पर उसका गायन करते हैं।
पर्व-त्योहार“भारत के पर्व-त्योहार मॉरिशस में भी प्रचलित हैं,” और वर्ष का सर्वश्रेष्ठ धार्मिक पर्व शिवरात्रि है, जब लोग श्वेत वस्त्र पहनकर कंधों पर काँवर लिए परी-तालाब जाते हैं।
पहनावाशिवरात्रि के दिन वयस्क उजली धोती, उजली कमीज़ और उजली गाँधी टोपी पहनते हैं; बच्चे हाफ पैंट पहन सकते हैं, पर गाँधी टोपी उन्हें भी पहननी पड़ती है।
असली बात: यह सब अपने आप नहीं हुआ। पाठ बताता है — “मालिकों की इच्छा तो यही थी कि भारतीय लोग भी क्रिस्तान हो जाएँ, किंतु भारतीयों ने अत्याचार तो सहे, लेकिन प्रलोभनों को ठुकरा दिया। वे अपने धर्म पर डटे रहे।” यानी मॉरिशस ‘छोटा-सा हिंदुस्तान’ इसलिए बना क्योंकि वहाँ गए लोगों ने कठिनाई और लालच, दोनों के सामने अपनी पहचान नहीं छोड़ी।
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