प्र1.
पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए। “भारत में बैठे-बैठे हम यह नहीं समझ पाते कि भारतीय संस्कृति कितनी प्राणवती और चिरायु है। किंतु, मॉरिशस जाकर हम अपनी संस्कृति की प्राणवत्ता का ज्ञान आसानी से प्राप्त कर लेते हैं।”
उत्तर
पहले सरल भाषा में अर्थ — भारत में रहते हुए हमें अपनी संस्कृति की ताकत का पता नहीं चलता, क्योंकि वह हमारे चारों ओर हर समय मौजूद है। पर जब हम मॉरिशस जाते हैं, जहाँ भारतीय लोग डेढ़ सौ साल पहले मज़दूर बनकर गए थे, तो हमें दिखता है कि इतनी दूर, इतने कठिन हालात में भी हमारी संस्कृति जीवित है। तब उसकी असली शक्ति समझ में आती है।
| शब्द | अर्थ |
|---|---|
| प्राणवती | प्राणों से भरी हुई, जीवित और सजीव |
| चिरायु | लंबी आयु वाली, जो सदियों तक न मिटे |
| प्राणवत्ता | जीवन-शक्ति, प्राण होने का गुण |
यह बात सच क्यों है: पाठ में इसका प्रमाण भी दिया गया है। मॉरिशस में हर प्रमुख गाँव में शिवालय है, रामचरितमानस का पाठ और ढोलक-झाँझ पर गायन होता है, शिवरात्रि वर्ष का सबसे बड़ा पर्व है, एक मोहल्ले का नाम काशी है और वहाँ बनारस, गोकुल, ब्रह्मस्थान भी हैं। मालिक चाहते थे कि भारतीय अपना धर्म छोड़ दें, पर “भारतीयों ने अत्याचार तो सहे, लेकिन प्रलोभनों को ठुकरा दिया।” जो संस्कृति परदेस में, बिना किसी सहारे के, इतने वर्षों तक टिकी रहे — वही सचमुच प्राणवती और चिरायु कहलाती है।
अपने जीवन से जोड़िए: यह ठीक वैसा ही है जैसे अपने घर की खूबी हमें तब समझ आती है जब हम कुछ दिन घर से बाहर रहकर लौटते हैं। दूर जाकर देखने पर ही चीज़ का मोल पता चलता है।
चर्चा के लिए: समूह में बताइए कि आपके परिवार की कौन-सी बात (कोई त्योहार, गीत, व्यंजन या रीति) पीढ़ी-दर-पीढ़ी चली आ रही है। वही आपके परिवार की ‘प्राणवत्ता’ है।