मल्हार अध्याय 12 यात्रा-वृत्तांत की रचना

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
“इतने में कोई मील-भर की दूरी पर हिरनों का एक झुंड दिखाई पड़ा। अब दो जवान सिंह उठे और दो ओर को चल दिए। एक तो थोड़ा-सा आगे बढ़कर एक जगह बैठ गया, लेकिन दूसरा घास के बीच छिपता हुआ मोर्चे पर आगे बढ़ने लगा।” इन वाक्यों को पढ़कर ऐसा लगता है मानो हम लेखक की आँखों से स्वयं वह दृश्य देख रहे हैं… इस पाठ को एक बार फिर से पढ़िए और इसकी रचना पर ध्यान दीजिए। आपको जो विशेष बातें दिखाई दें, उन्हें आपस में साझा कीजिए और लिख लीजिए। जैसे – लेखक ने बताया है कि वह एक स्थान से दूसरे स्थान तक कैसे और कब पहुँचा।
उत्तर

यात्रा-वृत्तांत की रचना कैसे पहचानें — पाठ में इन बातों पर निशान लगाइए: तिथि और समय, आने-जाने का साधन, जगह का नाप-आकार, आँखों-देखा दृश्य, लेखक के अपने मन की बात और सुनी-समझी जानकारी। मल्हार के इस पाठ में ये छहों बातें साफ़ मिलती हैं।

रचना की विशेषतापाठ से उदाहरणइससे क्या होता है
1. तिथि और क्रम“दिल्ली से 15 जुलाई को, बंबई (मुंबई) से 16 जुलाई को और नैरोबी से 17 जुलाई को मॉरिशस के लिए रवाना हुआ।”पाठक को पता चलता रहता है कि लेखक कब कहाँ था — यात्रा की डोर टूटती नहीं।
2. साधन और समय“नैरोबी से मॉरिशस तक हम बी.ओ.ए.सी. के जहाज़ में उड़े। जहाज़ नैरोबी से चार बजे शाम को उड़ा और पाँच घंटों की निरंतर उड़ान के बाद…”यात्रा सच्ची लगती है, क्योंकि विमान कंपनी, समय और अवधि तक बताई गई है।
3. आँखों-देखा वर्णन“एक सिंह ने उठकर जम्हाई ली, दूसरे ने देह को ताना, मगर हमारी ओर किसी भी सिंह ने नज़र नहीं उठाई।”छोटी-छोटी हरकतें लिखने से दृश्य आँखों के सामने चलने लगता है — मानो हम भी वहीं खड़े हों।
4. आँकड़े और नाप“मॉरिशस की लंबाई 29 मील और चौड़ाई कोई 30 मील है… रकबा 720 वर्गमील… 67 प्रतिशत लोग भारतीय खानदान के हैं।”जानकारी पक्की होती है; पाठक को जगह का सही अंदाज़ा मिल जाता है।
5. लेखक के अपने भाव“मुझे ऐसा महसूस हो रहा था कि मेरा रक्तचाप बढ़ रहा है।” / “वहाँ जो कुछ देखा, वह जन्मभर कभी नहीं भूलेगा।”यह वृत्तांत को सूचना-पत्र से अलग कर देता है — इसमें ‘मैं’ की धड़कन भी सुनाई देती है।
6. अलंकारपूर्ण भाषा“यह द्वीप हिंद महासागर का मोती है, भारत-समुद्र का सबसे खूबसूरत सितारा है।”वर्णन सूखा नहीं रहता; उपमा-रूपक से जगह की सुंदरता मन में बैठ जाती है।
7. वाक्य की लय (पुनरावृत्ति)“मॉरिशस वह देश है, जिसका…”, “मॉरिशस वह देश है, जहाँ…” — यह वाक्य बार-बार दोहराया गया है।एक ही ढाँचा दोहराने से जानकारी हथौड़े की तरह मन पर पड़ती है और याद रह जाती है।
8. सुनी-सीखी बात जोड़ना“शिकार सिंह सूर्यास्त के बाद किया करते हैं और शिकार वे झुंड का नहीं करते…”केवल जो दिखा वही नहीं, जो जाना वह भी बताया गया — इसलिए पाठक कुछ नया सीखता है।
दिए गए उदाहरण को गौर से देखिए: “एक तो थोड़ा-सा आगे बढ़कर एक जगह बैठ गया, लेकिन दूसरा घास के बीच छिपता हुआ मोर्चे पर आगे बढ़ने लगा।” यहाँ लेखक ने दो सिंहों की दो अलग चालें अलग-अलग बताईं। जब वर्णन में हर पात्र का अपना काम अलग दिखाया जाता है, तभी दृश्य ‘चलती हुई फ़िल्म’ जैसा बनता है। ‘मोर्चे पर आगे बढ़ना’ — यह युद्ध का शब्द है, जिससे शिकार का दृश्य और रोमांचक हो उठता है।
चर्चा के लिए: समूह में हर बच्चा पाठ से एक ऐसा वाक्य चुनकर पढ़े जिससे उसे दृश्य ‘दिखाई’ दिया हो, और बताए कि किस शब्द ने वह चित्र बनाया।
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