प्र1.
नीचे दिए गए चित्र को देखिए। यहाँ मिट्टी से जुड़े, कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं जो उसकी विशेषता बता रहे हैं। (मिट्टी — उपजाऊ, चिकनी, नम, भुरभुरी, काली, रेतीली) अब आप पेड़, सर्दी, सूर्य जैसे शब्दों की विशेषता बताने वाले शब्द बॉक्स बनाकर लिखिए—
उत्तर
पहले समझ लीजिए कि पुस्तक में क्या हुआ है। बीच में सूरज के आकार में एक संज्ञा है — मिट्टी, और चारों ओर बादलों में छह शब्द हैं — उपजाऊ, चिकनी, नम, भुरभुरी, काली, रेतीली। ये सब मिट्टी की विशेषता बता रहे हैं, इसलिए इन्हें विशेषण कहते हैं और ‘मिट्टी’ को विशेष्य।
अब इसी तरह अपनी लेखन-पुस्तिका में तीन शब्द-बॉक्स बनाइए — बीच में शब्द, चारों ओर उसकी विशेषताएँ।
| बीच का शब्द (विशेष्य) | चारों ओर लिखने के शब्द (विशेषण) |
|---|---|
| पेड़ | हरा-भरा, घना, ऊँचा, छायादार, फलदार, विशाल, बूढ़ा, सूखा, पत्तेदार, टेढ़ा |
| सर्दी | कड़ाके की, हाड़ कँपाने वाली, ठिठुरन भरी, कोहरे भरी, हल्की, सुहावनी, लंबी, तीखी |
| सूर्य | तेज़, प्रचंड, दहकता, सुनहरा, गुनगुना, चमकीला, जीवनदायी, ढलता, उगता |
अब इन्हें वाक्य में बरतकर देखिए — तभी शब्द अपना बनता है।
| विशेषण | वाक्य |
|---|---|
| छायादार | दोपहर में हम उसी छायादार पीपल के नीचे बैठकर पढ़ते हैं। |
| कड़ाके की | पूस की कड़ाके की सर्दी में भी किसान खेत में पानी लगाता रहा। |
| जीवनदायी | सर्दियों की जीवनदायी धूप पौधों को भी उतनी ही भाती है जितनी हमें। |
| भुरभुरी | बारिश के बाद क्यारी की मिट्टी इतनी भुरभुरी हो गई कि बीज हाथ से ही बो दिए। |
पहचानने का सूत्र: जिस शब्द से पहले ‘कैसा / कैसी / कैसे’ पूछा जा सके, वही विशेषण है। ‘मिट्टी कैसी?’ — काली, नम, भुरभुरी। ‘पेड़ कैसा?’ — घना, ऊँचा। ध्यान रखिए, विशेषण अपने विशेष्य के लिंग के अनुसार बदल जाता है — मिट्टी काली, पर पेड़ काला।
पाठ में से भी चुनिए: ‘पेड़ की बात’ में ही ऐसे कितने ही विशेषण भरे पड़े हैं — सुकोमल पत्तियाँ, विषाक्त वायु, मटमैली माटी, अपरूप उपादान, रंग-बिरंगे फूल, हरा-भरा शरीर। इन्हें रेखांकित कीजिए और अपने बॉक्स में जोड़ लीजिए।