प्र1.
• मिट्टी के किसी भी पात्र में मिट्टी भरकर उसमें राजमा या चने के 4–5 बीज बो दीजिए। • हल्का-सा पानी छिड़क दीजिए। • 3–4 दिन तक थोड़ा-थोड़ा पानी डालिए। • अब इसमें आए परिवर्तन लेखन पुस्तिका में लिखिए। (संकेत— एक दिन में पौधे की लंबाई कितनी बढ़ती है, कितने पत्ते निकले, प्रकाश की तरफ़ पौधे मुड़े या नहीं आदि।)
उत्तर
यह करके देखने की गतिविधि है। पहले ठीक तरीके से कीजिए, फिर रोज़ का ब्योरा लिखिए।
करने का तरीका
- मिट्टी के कुल्हड़ या गमले में भुरभुरी मिट्टी भरिए। पात्र के नीचे एक छोटा छेद रखिए ताकि अतिरिक्त पानी निकल जाए — ज़्यादा पानी बीज को सड़ा देता है।
- राजमा या चने के 4–5 बीज लगभग एक अंगुल गहराई में, थोड़ी-थोड़ी दूरी पर बोइए।
- ऊपर से हल्का-सा पानी छिड़किए — धार से नहीं, छिड़ककर, वरना बीज एक ओर बह जाएँगे।
- 3–4 दिन तक रोज़ थोड़ा-थोड़ा पानी डालिए और गमला खिड़की के पास रखिए।
- रोज़ एक ही समय पर (जैसे सुबह 8 बजे) स्केल से लंबाई नापिए और अपनी लेखन-पुस्तिका में तालिका भरिए। हो सके तो साथ में एक छोटा चित्र भी बनाइए।
नमूना उत्तर (मेरी अवलोकन-तालिका — चने के बीज):
| दिन | जो दिखा | पौधे की लंबाई | पत्ते |
|---|---|---|---|
| पहला दिन | कुछ नहीं दिखा; मिट्टी ऊपर से नम रही। | — | — |
| दूसरा दिन | मिट्टी हटाकर देखा तो एक बीज फूल गया था और उसका छिलका दरक गया था। | — | — |
| तीसरा दिन | दो जगह मिट्टी ऊपर उठी और सफ़ेद-सी मुड़ी हुई डंडी बाहर निकली। | लगभग 1 सेमी | 0 |
| चौथा दिन | डंडी सीधी होकर हरी पड़ने लगी; ऊपर दो मुड़े हुए दल दिखे। | लगभग 3 सेमी | 2 (बीजपत्र) |
| पाँचवाँ दिन | दोनों दल खुल गए; बीच से नन्ही हरी पत्तियाँ झाँकने लगीं। | लगभग 6 सेमी | 2 + 2 नई |
| छठा दिन | पौधा साफ़ तौर पर खिड़की की ओर झुक गया, यानी प्रकाश की तरफ़। | लगभग 9 सेमी | 4 |
| सातवाँ दिन | गमला घुमाकर उल्टा रख दिया; अगले दिन पौधा फिर खिड़की की ओर मुड़ गया। | लगभग 12 सेमी | 4–6 |
निष्कर्ष जो आपको लिखना चाहिए: (1) पौधा शुरू में धीरे बढ़ा, फिर रोज़ लगभग 2–3 सेमी बढ़ने लगा। (2) पहले जड़ नीचे गई, फिर तना ऊपर आया — बिलकुल वैसे ही जैसे पाठ में लिखा है। (3) गमला घुमा देने पर भी पौधा प्रकाश की ओर ही मुड़ा — यही बात बसु ने लिखी थी : “सारी पत्तियाँ व डालियाँ अंधकार से बचकर प्रकाश की ओर बढ़ रही हैं।”
और मज़ा लेना हो तो: दो गमले बोइए — एक धूप वाली खिड़की पर और एक अलमारी के अँधेरे में। एक सप्ताह बाद तुलना कीजिए। अँधेरे वाला पौधा लंबा तो होगा, पर पीला, कमज़ोर और पतला। इससे ‘प्रकाश ही जीवन का मूलमंत्र है’ बात अपने आप सिद्ध हो जाएगी।