प्र1.
बीज से बीज तक की यात्रा का आरेख पूरा कीजिए— बीज → __ __ र → प __ __ → __ त्ता → क __ → __ ल → फ __ → बी __
उत्तर
पुस्तक के आठ खानों में से एक ही भरा है (बीज); बाकी में शुरू या आख़िरी अक्षर का संकेत दिया गया है। पूरा आरेख इस प्रकार बनेगा —
बीज → अंकुर → पौधा → पत्ता → कली → फूल → फल → बीज
| पुस्तक में दिया संकेत | सही शब्द | पाठ का आधार |
|---|---|---|
| बीज (भरा हुआ) | बीज | “बहुत दिनों तक मिट्टी के नीचे बीज पड़े रहे।” |
| __ __ र | अंकुर | “दो सुकोमल पत्तियों के बीच अंकुर बाहर निकला।” |
| प __ __ | पौधा | “एक गमले में पौधा था।” |
| __ त्ता | पत्ता | “वृक्ष के पत्ते हवा से आहार ग्रहण करते हैं।” |
| क __ | कली | शब्दकोश में ‘अंकुर’ का एक अर्थ ही ‘कली’ दिया गया है; फूल खिलने से पहले कली ही बनती है। |
| __ ल | फूल | “फूलों से आच्छादित होने पर पेड़ कितना सुंदर दिखलाई पड़ता है।” |
| फ __ | फल | “इस प्रकार फूल में बीज फलता है।” — फूल के बाद फल ही बनता है। |
| बी __ | बीज | “बीज ही उनकी संतान है।” — यात्रा फिर वहीं लौट आती है जहाँ से चली थी। |
चार्ट को पढ़ने का तरीका: पुस्तक में खाने अंग्रेज़ी के ‘S’ की तरह मुड़े हुए हैं — पहले खंभा ऊपर से नीचे (बीज, अंकुर, पौधा), फिर दूसरा खंभा नीचे से ऊपर (पत्ता, कली, फूल), और तीसरा फिर ऊपर से नीचे (फल, बीज)। तीर के साथ-साथ चलिए, भटकिएगा नहीं।
यही चक्र क्यों कहलाता है: पहला खाना और आख़िरी खाना, दोनों ‘बीज’ हैं। इसीलिए इसे जीवनचक्र कहते हैं — इसका न कोई सिरा है, न अंत। ‘लेखक से परिचय’ में भी यही लिखा है कि बसु ने सिद्ध किया कि पौधों का एक निश्चित जीवनचक्र होता है।