कक्षा ६ हिंदी अध्याय 13 पेड़ की बात के लिए एनसीईआरटी समाधान

अद्यतन 2026-09-19

इस अध्याय के बारे में

रचना का नाम ‘पेड़ की बात’ है। लेखक हैं जगदीशचंद्र बसु (1858–1937) और अनुवादक हैं शंकर सेन । पाठ के बाद दिया गया ‘लेखक से परिचय’ बताता है कि बसु जीवविज्ञान, भौतिकी, वनस्पति विज्ञान तथा विज्ञान कथा लेखन में रुचि रखने वाले बहुविद् व्यक्ति थे। उन्होंने सिद्ध किया कि पौधों का भी एक निश्चित जीवनचक्र और प्रजनन प्रणाली होती है और वे अपने परिवेश के प्रति जागरूक होते हैं। रेडियो तरंगों द्वारा संचार स्थापित करने की बड़ी खोज भी उन्होंने ही सबसे पहले की थी। बीज से अंकुर तक — बीज महीनों मिट्टी के नीचे पड़ा रहा। सर्दियों के बाद वसंत आया, फिर वर्षा की पहली बूँदें पड़ीं और बीज का ढक्कन दरक गया। दो सुकोमल पत्तियों के बीच से अंकुर निकला — एक अंश नीचे माटी में गड़ गया (जड़) और दूसरा माटी भेदकर ऊपर उठा (तना) । गमले को औंधा लटकाकर किया गया प्रयोग और मूली काटकर बोने का उदाहरण यही सिद्ध करते हैं कि पौधे को जिस तर

त्वरित पुनरावृत्ति
पाठ का शब्दअर्थपाठ की पंक्तिअपना एक वाक्य
अंकुरबीज फूटने पर निकला नया कोमल अंश“दो सुकोमल पत्तियों के बीच अंकुर बाहर निकला।”बारिश के बाद क्यारी में चने के अंकुर निकल आए।
दरकनाफटना, दरार पड़ जाना“बीज का ढक्कन दरक गया”गरमी में तालाब सूखकर उसकी ज़मीन जगह-जगह दरक गई।
अंगारककार्बन; पाठ में — कार्बन डाइऑक्साइड वायु“उसे ‘अंगारक’ वायु कहते हैं।”पत्ते अंगारक वायु लेकर हमें शुद्ध हवा लौटा देते हैं।
सूक्ष्मदर्शीबहुत बारीक चीज़ें देखने वाला यंत्र“सूक्ष्मदर्शी से अत्यंत सूक्ष्म पदार्थ स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं।”प्रयोगशाला में हमने सूक्ष्मदर्शी से पत्ती की कोशिकाएँ देखीं।
निःशेषबिलकुल समाप्त, कुछ भी शेष न रहना“‘अंगारक’ वायु से अंगार निःशेष कर डालते हैं”सफ़ाई अभियान में गली का कूड़ा निःशेष हो गया।
आबद्धबँधा हुआ, जकड़ा हुआ“पेड़-पौधों के रेशे-रेशे में सूरज की किरणें आबद्ध हैं।”इस पुरानी पोथी में गाँव का पूरा इतिहास आबद्ध है।
पल्लवितपत्तों से भर जाना, फलना-फूलना“सूर्य-किरण का स्पर्श पाकर ही पेड़ पल्लवित होता है।”अच्छे शिक्षक के सान्निध्य में बच्चों की प्रतिभा पल्लवित होती है।
चिरकालबहुत लंबा समय“मधुमक्खी व तितली के साथ वृक्ष की चिरकाल से घनिष्ठता है।”हमारे दोनों परिवारों में चिरकाल से मेल-जोल है।
अपरूपकुरूप, भद्दा“इस अपरूप उपादान से किस तरह ऐसे सुंदर फूल खिलते हैं”कुम्हार अपरूप मिट्टी से सुंदर सुराही गढ़ देता है।
उपादानवह द्रव्य जिससे कोई वस्तु बनती है, कच्ची सामग्री“इस अपरूप उपादान से…”बाँस और मिट्टी ही इस झोंपड़ी के मुख्य उपादान हैं।
क्षीणदुर्बल, घट जाना“अपने ही शरीर का भार उठाने की शक्ति क्षीण हो चली है।”लगातार बीमारी से दादाजी की आवाज़ क्षीण हो गई है।
न्योछावरअर्पण कर देना, कुर्बान कर देना“संतान के लिए अपना जीवन न्योछावर करके वृक्ष समाप्त हो जाता है।”सैनिक देश की रक्षा में अपना सब कुछ न्योछावर कर देते हैं।
  1. मेरी समझ से
  2. पंक्तियों पर चर्चा
  3. मिलकर करें मिलान
  4. सोच-विचार के लिए
  5. लेख की रचना
  6. अनुमान या कल्पना से
  7. प्रवाह चार्ट
  8. अंकुरण
  9. शब्दों के रूप
  10. मेरे प्रिय
  11. आज की पहेली
  12. खोजबीन के लिए
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