मल्हार अध्याय 13 पेड़ की बात के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-05
इस अध्याय के बारे में
रचना का नाम ‘पेड़ की बात’ है। लेखक हैं जगदीशचंद्र बसु (1858–1937) और अनुवादक हैं शंकर सेन । पाठ के बाद दिया गया ‘लेखक से परिचय’ बताता है कि बसु जीवविज्ञान, भौतिकी, वनस्पति विज्ञान तथा विज्ञान कथा लेखन में रुचि रखने वाले बहुविद् व्यक्ति थे। उन्होंने सिद्ध किया कि पौधों का भी एक निश्चित जीवनचक्र और प्रजनन प्रणाली होती है और वे अपने परिवेश के प्रति जागरूक होते हैं। रेडियो तरंगों द्वारा संचार स्थापित करने की बड़ी खोज भी उन्होंने ही सबसे पहले की थी। बीज से अंकुर तक — बीज महीनों मिट्टी के नीचे पड़ा रहा। सर्दियों के बाद वसंत आया, फिर वर्षा की पहली बूँदें पड़ीं और बीज का ढक्कन दरक गया। दो सुकोमल पत्तियों के बीच से अंकुर निकला — एक अंश नीचे माटी में गड़ गया (जड़) और दूसरा माटी भेदकर ऊपर उठा (तना) । गमले को औंधा लटकाकर किया गया प्रयोग और मूली काटकर बोने का उदाहरण यही सिद्ध करते हैं कि पौधे को जिस तर
अभ्यास
- मेरी समझ से
- पंक्तियों पर चर्चा
- मिलकर करें मिलान
- सोच-विचार के लिए
- लेख की रचना
- अनुमान या कल्पना से
- प्रवाह चार्ट
- अंकुरण
- शब्दों के रूप
- मेरे प्रिय
- आज की पहेली
- खोजबीन के लिए