प्र1.
पाठ में से चुनकर कुछ वाक्यांश नीचे दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सही अर्थ या संदर्भ से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं। वाक्यांश — 1. बीज का ढक्कन दरक गया 2. उसे ‘अंगारक’ वायु कहते हैं 3. पत्ते सूर्य ऊर्जा के सहारे ‘अंगारक’ वायु से अंगार निःशेष कर डालते हैं 4. प्रकाश ही जीवन का मूलमंत्र है 5. जैसे फूल-फूल के बहाने वह स्वयं हँस रहा हो 6. इस अपरूप उपादान से किस तरह ऐसे सुंदर फूल खिलते हैं। अर्थ या संदर्भ — 1. मटमैली माटी और विषाक्त वायु से सुंदर-सुंदर फूलों में परिवर्तित होते हैं। 2. जीवन के लिए सूर्य का प्रकाश आधारशक्ति या महत्वपूर्ण है। 3. अपनी संपन्नता और भावी पीढ़ी की उत्पत्ति से प्रसन्न-संतुष्ट। 4. साँस छोड़ने पर निकलने वाली वायु-कार्बन डाईआक्साइड। 5. सूर्य के प्रकाश से पत्ते विषाक्त वायु के प्रभाव को नष्ट कर देते हैं। 6. बीज के दोनों दलों में दरार आ गई या फट गए।
उत्तर
दोनों स्तंभ जान-बूझकर आगे-पीछे कर दिए गए हैं। सही मिलान नीचे दिया गया है — पुस्तक में इन्हीं के बीच रेखा खींचिए।
| वाक्यांश | मिलेगा | अर्थ या संदर्भ | मिलान का सुराग़ |
|---|---|---|---|
| 1. बीज का ढक्कन दरक गया | → 6 | बीज के दोनों दलों में दरार आ गई या फट गए। | ‘दरकना’ का अर्थ ही है फटना, दरार पड़ना। बीज के दो दल (हिस्से) चने-मटर में खोलकर देखिए — वही यहाँ ‘ढक्कन’ कहे गए हैं। |
| 2. उसे ‘अंगारक’ वायु कहते हैं | → 4 | साँस छोड़ने पर निकलने वाली वायु-कार्बन डाईआक्साइड। | पाठ में — “प्रश्वास के साथ एक प्रकार की विषाक्त वायु बाहर निकलती है, उसे ‘अंगारक’ वायु कहते हैं।” शब्दकोश में भी ‘अंगारक’ का अर्थ कार्बन दिया है। |
| 3. पत्ते सूर्य ऊर्जा के सहारे ‘अंगारक’ वायु से अंगार निःशेष कर डालते हैं | → 5 | सूर्य के प्रकाश से पत्ते विषाक्त वायु के प्रभाव को नष्ट कर देते हैं। | दोनों में एक ही क्रिया है — सूर्य का प्रकाश + पत्ते = ज़हरीली हवा का सफ़ाया। ‘निःशेष’ यानी कुछ भी शेष न रहना। |
| 4. प्रकाश ही जीवन का मूलमंत्र है | → 2 | जीवन के लिए सूर्य का प्रकाश आधारशक्ति या महत्वपूर्ण है। | ‘मूलमंत्र’ = सबसे बड़ी, सबसे पहली बात; ‘आधारशक्ति’ भी यही कहता है। दोनों वाक्य एक-दूसरे का अनुवाद-जैसे हैं। |
| 5. जैसे फूल-फूल के बहाने वह स्वयं हँस रहा हो | → 3 | अपनी संपन्नता और भावी पीढ़ी की उत्पत्ति से प्रसन्न-संतुष्ट। | यहाँ फूल = पेड़ की हँसी। पेड़ इसलिए खुश है कि उसके फूलों में बीज, यानी उसकी संतान बन रही है। |
| 6. इस अपरूप उपादान से किस तरह ऐसे सुंदर फूल खिलते हैं | → 1 | मटमैली माटी और विषाक्त वायु से सुंदर-सुंदर फूलों में परिवर्तित होते हैं। | ‘अपरूप’ = भद्दा, कुरूप और ‘उपादान’ = बनाने की सामग्री। भद्दी सामग्री (मैली मिट्टी, ज़हरीली हवा) से सुंदर फूल — यही लेखक का अचरज है। |
मिलान का तरीका: पहले वे जोड़ियाँ बना लीजिए जिनका अर्थ शब्द से ही खुल जाता है (दरक → दरार, अपरूप-उपादान → मटमैली माटी)। फिर बचे हुए में देखिए कि दोनों तरफ़ एक ही क्रिया हो रही है या नहीं — जैसे 3 और 5 में ‘नष्ट कर देना’।
सावधानी: 2 और 3 दोनों में ‘अंगारक’ शब्द है, इसलिए भ्रम हो सकता है। फ़र्क याद रखिए — 2 केवल नाम बताता है (यह वायु कौन-सी है), जबकि 3 काम बताता है (पत्ते उसका क्या करते हैं)।