प्र1.
पाठ को एक बार फिर से पढ़िए, पता लगाइए और लिखिए— (क) बीज के अंकुरित होने में किस-किस का सहयोग मिलता है?
उत्तर
पाठ के पहले ही अनुच्छेद में अंकुरण की पूरी शर्तें आ जाती हैं —
“बहुत दिनों तक मिट्टी के नीचे बीज पड़े रहे। … सर्दियों के बाद वसंत आया। उसके बाद वर्षा की शुरूआत में दो-एक दिन पानी बरसा। अब और छिपे रहने की आवश्यकता नहीं थी! … आहिस्ता-आहिस्ता बीज का ढक्कन दरक गया, दो सुकोमल पत्तियों के बीच अंकुर बाहर निकला।”
इसलिए बीज को अंकुरित होने में इनका सहयोग मिलता है —
| सहयोगी | उसका काम | पाठ का आधार |
|---|---|---|
| मिट्टी | बीज को ढककर सुरक्षित रखती है और उसमें घुले द्रव्य भोजन बनते हैं | “मिट्टी के नीचे बीज पड़े रहे”; “माटी में पानी डालने पर उसके भीतर बहुत-से द्रव्य गल जाते हैं।” |
| पानी (वर्षा) | बीज का छिलका नरम करके फोड़ता है, मिट्टी के द्रव्यों को घोलता है | “वर्षा की शुरूआत में दो-एक दिन पानी बरसा।” |
| उपयुक्त ऋतु/गरमाहट | ठंड बीत जाने पर ही बीज जागता है | “सर्दियों के बाद वसंत आया।” |
| प्रकाश (सूर्य) | बाहर निकलते ही अंकुर को बढ़ने की ऊर्जा देता है, उसी की ओर तना उठता है | “ऊपर उठ जाओ, सूरज की रोशनी देखो।”; “प्रकाश ही जीवन का मूलमंत्र है।” |
| हवा | पत्तों को साँस और ‘अंगारक’ वायु देती है, जिससे पौधा भोजन बनाता है | “वृक्ष के पत्ते हवा से आहार ग्रहण करते हैं।” |
| समय और धैर्य | अंकुरण एक झटके में नहीं होता | “महीना-दर-महीना बीतता गया।”; “आहिस्ता-आहिस्ता बीज का ढक्कन दरक गया।” |
एक वाक्य में: मिट्टी, पानी, उचित ऋतु की गरमाहट, हवा और सूरज का प्रकाश — इन पाँचों के मिल जाने पर ही बीज का ढक्कन दरकता है और अंकुर बाहर आता है। इनमें से एक भी न हो तो बीज सोया ही रह जाता है।
खुद देखिए: इसी पाठ की ‘अंकुरण’ गतिविधि (पृष्ठ 153) में चने या राजमा के बीज बोकर आप ये सारी शर्तें अपनी आँखों से जाँच सकते हैं — एक गमला अँधेरे में और एक धूप में रखकर तुलना कीजिए।