सही उत्तर है — उसे उल्टा लटकाया गया है। इसी विकल्प के सामने तारा (★) बनाइए।
इस वाक्य से ठीक पहले लेखक ने अपना प्रयोग बताया है —
दो-एक दिन बाद क्या देखता हूँ कि जैसे पौधे को भी सब भेद मालूम हो गया हो। उसकी सब पत्तियाँ और डालियाँ टेढ़ी होकर ऊपर की तरफ़ उठ आईं तथा जड़ घूमकर नीचे की ओर लटक गई।”
यानी पौधे ने ताड़ लिया कि उसके साथ ‘चालाकी’ हुई है — उसे उल्टा टाँग दिया गया है। इसीलिए उसने दो ही दिन में अपने आप को सीधा कर लिया। लेखक इसी बात को पहले नियम की तरह लिख चुका है — “पेड़-पौधों को जिस तरह ही रखो, जड़ नीचे की ओर जाएगी व तना ऊपर की ओर उठेगा।” मूली काटकर बोने वाला उदाहरण भी यही सिद्ध करता है।
| विकल्प | सही / ग़लत | कारण |
|---|---|---|
| उसे उल्टा लटकाया गया है। | सही ★ | पौधे ने अपनी दिशा पहचानकर पत्तियाँ ऊपर और जड़ नीचे कर लीं — यही ‘भेद’ खुलने का प्रमाण है। |
| उसे किसी ने सजा दी है। | ग़लत | सज़ा की बात पाठ में कहीं नहीं है। यह प्रयोग था, दंड नहीं। |
| बच्चे को गमला रखना नहीं आया। | ग़लत | गमला किसी की लापरवाही से नहीं, बल्कि लेखक ने जान-बूझकर “परीक्षण करने के लिए” औंधा लटकाया था। |
| प्रकाश ऊपर से आ रहा है। | ग़लत (पर सोचने लायक) | प्रकाश की बात पाठ में आगे आती है। यहाँ लेखक का बिंदु यह है कि पौधा ऊपर-नीचे पहचान लेता है — इसीलिए जड़ भी घूमकर नीचे आ गई, जबकि जड़ को प्रकाश नहीं चाहिए। |