प्र1.
कक्षा की गतिविधि के रूप में चार अथवा पाँच विद्यार्थी मिलकर एक बाल पंचायत का गठन करें और कक्षा के शेष विद्यार्थी स्वयं को ग्रामवासी मान लें। यह ग्राम सभा किन विषयों पर विचार-विमर्श करेगी? कौन-सी चुनौतियों का सामना करेगी? यह कौन-से समाधान प्रस्तावित करेगी?
उत्तर
गतिविधि कैसे चलाएँ। चार-पाँच विद्यार्थी आगे बाल पंचायत के रूप में बैठें — एक सरपंच और एक सचिव, जो कार्यवृत्त लिखे। शेष कक्षा ग्राम सभा के रूप में बैठे। ग्राम सभा का कोई भी सदस्य विषय उठा सकता है; बाल पंचायत सुनकर चर्चा करे और समाधान सुझाए; हाथ उठाकर निर्णय हो। लगभग 30 मिनट रखिए और अंत में सचिव निर्णय पढ़कर सुनाए।
ग्राम सभा किन विषयों पर चर्चा करेगी — अधिकांश संकेत अध्याय में ही हैं —
- विद्यालय छोड़ चुके बच्चे। पुस्तक के अनुसार महाराष्ट्र की बाल पंचायतों ने “बाल-श्रम और बाल-विवाह को समाप्त करने पर कार्य किया है” और अनेक बच्चों को पुन: विद्यालय भेजा है।
- बाल-विवाह, विशेषकर उन बालिकाओं का “पढ़ने की आयु में” विवाह।
- सुरक्षा। चारदीवारी रहित विद्यालय, अँधेरा रास्ता, तेज़ यातायात वाली सड़क — सिक्किम की सांगखू राधू खांडू ग्राम पंचायत ने इसी कारण चारदीवारी बनवाई थी।
- मध्याह्न भोजन और स्वच्छ रसोई — उसी पंचायत ने विद्यालयों में रसोईघर बनवाए ताकि भोजन सफ़ाई से बने।
- विद्यालय में पेयजल और शौचालय, और यह प्रश्न कि क्या शौचालय न होने से बालिकाएँ विद्यालय नहीं आतीं।
- खेल का मैदान, पुस्तकालय, या साँझ को पढ़ने के लिए प्रकाश।
- स्वच्छता — प्लास्टिक कचरा, खुली नाली, मच्छर पनपाता गड्ढा।
बाल पंचायत के सामने चुनौतियाँ:
| चुनौती | ऐसा क्यों होता है |
|---|---|
| गंभीरता से न लिया जाना | कुछ बड़े मानते हैं कि बच्चे गाँव के विषयों पर राय देने योग्य नहीं |
| बच्चे की कमाई पर निर्भर परिवार | कठिनाई में पड़ा परिवार बच्चे को काम पर भेज देता है; केवल मना कर देना पर्याप्त नहीं |
| परंपरा और दबाव | बाल-विवाह को ‘सदा से ऐसा ही होता आया है’ कहकर उचित ठहराया जाता है — वंदना बहादुर मैदा को सुनवाई पाने के लिए ही “पितृसत्तात्मक मान्यताओं के विरुद्ध” जाना पड़ा |
| धन और अधिकार का अभाव | बाल पंचायत सुझाव दे सकती है, स्वीकृति नहीं; धन ग्राम पंचायत के पास होता है |
| आपसी मतभेद | सदस्य पहले क्या चाहिए, इस पर अलग-अलग राय रख सकते हैं — खेल का मैदान या पुस्तकालय |
| संकोच | जिन बच्चों को सबसे अधिक बोलना चाहिए — प्राय: बालिकाएँ या सबसे निर्धन — वे सबसे कम बोलते हैं |
बाल पंचायत क्या समाधान प्रस्तावित कर सकती है — हर सुझाव छोटा, ठोस और जाँचने योग्य हो —
- शिकायत नहीं, सूची। विद्यालय छोड़ चुके बच्चों की नाम और कारण सहित लिखित सूची बनाकर ग्राम पंचायत को दीजिए।
- अभिभावकों से भेंट। पुस्तक इसी को बताती है — “बाल पंचायत के सदस्य एक साथ मिलकर अभिभावकों और अन्य वयस्कों को समझाते हैं कि अपने बच्चों को पुन: विद्यालय भेजें।”
- अगली पंचायत योजना में एक ठोस कार्य माँगिए — चारदीवारी, विद्यालय का शौचालय, हैंडपंप, या विद्यालय के रास्ते पर एक बत्ती।
- ग्राम सभा में निश्चित समय। निवेदन कीजिए कि हर ग्राम सभा में दस मिनट बाल पंचायत के प्रतिवेदन के लिए रखे जाएँ।
- महीने में एक स्वच्छता दिवस, जिसे बच्चे स्वयं चलाएँ और पंचायत कूड़ेदान दे।
- अगली बैठक में समीक्षा। पिछली बार क्या तय हुआ था और वस्तुत: क्या हुआ, यह पढ़कर सुनाइए।
सचिव के कार्यवृत्त का नमूना: “बाल सभा की बैठक 12 अगस्त को हुई। वार्ड 3 के छह बच्चों ने विद्यालय आना बंद कर दिया है। बाल पंचायत अगली बैठक से पहले ग्राम पंचायत के दो सदस्यों के साथ उनके घर जाएगी। बाल पंचायत यह भी निवेदन करती है कि वर्षा से पूर्व विद्यालय का शौचालय ठीक कराया जाए। प्रगति की सूचना अगली बाल सभा में दी जाएगी।” छोटा, तिथि सहित और जाँचने योग्य — इसी से सुझाव काम करते हैं।
पुस्तक ग्रामवासी बनने को भी क्यों कहती है: बाल पंचायत कोई वाद-विवाद प्रतियोगिता नहीं जिसे बच्चे जीत लें। उसका काम अभिभावकों, बड़ों और ग्राम पंचायत को समझाना है। ग्रामवासी की ओर बैठकर आप वही आपत्तियाँ सीखते हैं जिनका उत्तर आपको वास्तव में देना पड़ेगा।