अन्वेषण अध्याय 11 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
हमारी जनसंख्या लगभग 1.4 अरब पार कर चुकी है, जिसका दो-तिहाई भाग ग्रामीण क्षेत्रों में रहता है। इस प्रकार की विविधता वाले समाज में हम अपना शासन किस प्रकार चलाते हैं?
उत्तर

शासन के काम को बाँटकर — पहले तीन अंगों में, फिर तीन स्तरों में, और सबसे नीचे स्थानीय स्तर को स्थानीय लोगों को सौंपकर।

पहले समस्या का आकार देखिए, जैसा पृष्ठ 163 पर दिया है —

भारतपुस्तक में दिया आँकड़ा
गाँवलगभग 6,00,000
कस्बे8,000
नगर4,000 से अधिक
जनसंख्या1.4 अरब पार, जिसका लगभग दो-तिहाई ग्रामीण

इतने बड़े देश के लिए कोई एक कार्यालय निर्णय नहीं ले सकता। इसलिए काम बाँटा गया है —

  • तीन अंगों में — विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका, जिन्हें आपने अध्याय 10 में पढ़ा।
  • तीन स्तरों में — केंद्र, राज्य और स्थानीय, अर्थात चित्र 10.4 का पिरामिड।
  • और स्थानीय स्तर के भीतर फिर तीन स्तरों में — ग्राम, खंड और जिला, जिनकी चर्चा इस अध्याय में है।

पूरी रचना के पीछे नियम सरल है — कोई विषय उसी सबसे छोटे स्तर पर निपटे जो उसे निपटा सके। बंद नाली ग्राम पंचायत का काम है, दस गाँवों को जोड़ने वाली सड़क पंचायत समिति का, जिला अस्पताल जिला परिषद का, पुलिस राज्य का, और रक्षा या मुद्रा केंद्र का।

संख्या का ध्यान रखिए: 1.4 अरब का अर्थ है 140 करोड़। इसका दो-तिहाई लगभग 93 करोड़ लोग ग्रामीण क्षेत्रों में रहते हैं — इसीलिए नगरीय क्षेत्रों से पहले ग्रामीण स्थानीय सरकार का अध्याय आता है।
प्र2.
इस गाँव की आवश्यकताएँ क्या हैं — संभवत: खेतों के लिए पानी, भारी वर्षा से खराब हुई मुख्य सड़क का रख-रखाव और गाँव के प्राथमिक विद्यालय का रख-रखाव।
उत्तर

ये तीनों, और इनके अतिरिक्त भी कई — और हर एक पंचायती राज संस्थाओं का ही काम है। लक्ष्मणपुर में 200 घर हैं, लगभग 700 की जनसंख्या है, अधिकांश कृषक हैं जो अपनी भूमि पर कृषि करते हैं और गाय या बकरियाँ पालते हैं।

गाँव की आवश्यकतालक्ष्मणपुर में यह क्यों हैकौन-सा स्तर देखेगा
खेतों के लिए पानीअधिकांश लोग किसान हैं; फ़सल सिंचाई पर निर्भर हैतालाब, कुएँ और छोटी नालियाँ ग्राम पंचायत; नहर या जल-संग्रहण योजना पंचायत समिति या जिला परिषद
पेयजल और सफ़ाई200 घरों को स्वच्छ जल, नालियाँ और कचरे की व्यवस्था चाहिएग्राम पंचायत
मुख्य सड़क का रख-रखावहिमालय की तराई में भारी वर्षा प्रतिवर्ष सड़कें खराब करती हैगाँव की गलियाँ ग्राम पंचायत; जोड़ने वाली सड़क पंचायत समिति और जिला परिषद, प्राय: प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत
प्राथमिक विद्यालय का रख-रखाव200 घरों के बच्चों के लिए ठीक भवन और मध्याह्न भोजन आवश्यक हैग्राम पंचायत — जैसे सिक्किम की सांगखू राधू खांडू पंचायत ने चारदीवारी और रसोईघर बनवाए
स्वास्थ्य सेवाउप-स्वास्थ्य केंद्र, टीकाकरण, नर्स या आशा कार्यकर्ताग्राम पंचायत, खंड के स्वास्थ्य कर्मियों के साथ; बड़ा अस्पताल जिला परिषद
रोज़गार“कुछ युवा आजीविका की खोज में नगर चले गए हैं”ग्राम पंचायत, ग्रामीण रोज़गार योजनाओं के माध्यम से
पशु और चरागाहलोग “गाय या बकरियाँ पालते हैं”, इसलिए चरागाह और पशु-चिकित्सा आवश्यक हैग्राम पंचायत, खंड के सहयोग से
पुस्तक संस्थाओं से पहले आवश्यकताएँ क्यों गिनाती है: वह चाहती है कि आप पहले यह अनुभव करें कि ग्राम परिषद क्यों आवश्यक है, तब जानें कि वह क्या कहलाती है। ध्यान दीजिए — इनमें से एक भी आवश्यकता दिल्ली के निर्णय की प्रतीक्षा नहीं कर सकती, और एक भी हर गाँव में एक जैसी नहीं है। स्थानीय स्व-शासन का यही तर्क है।
प्र3.
दैनिक जीवन को प्रभावित करने वाली ऐसी स्थितियों पर गाँव के लोग किस प्रकार निर्णय लेंगे? उन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए संसाधन कहाँ से जुटाएँगे?
उत्तर

निर्णय ग्राम सभा में और अपनी चुनी हुई ग्राम पंचायत के माध्यम से; और धन कुछ गाँव का अपना, कुछ राज्य और केंद्र से।

निर्णय कैसे होता है — चार चरण:

चरणक्या होता है
1. ग्राम सभा की बैठकगाँव का हर वयस्क मतदाता आ सकता है। “ग्राम सभा में स्त्री एवं पुरुष अपने क्षेत्र से जुड़े सभी मामलों पर विचार-विमर्श करते हैं और निर्णय लेते हैं”
2. ग्राम पंचायत का चुनावग्राम सभा सीधे ग्राम पंचायत के सदस्यों को चुनती है, और पंचायत का एक प्रमुख होता है — सरपंच या प्रधान
3. योजना बनती हैपंचायत विकास योजना तैयार करती है — यह सड़क, वह हैंडपंप, विद्यालय की दीवार — और ग्राम सभा उसे स्वीकृति देती है
4. बड़ा काम ऊपर जाता हैपंचायत समिति “सभी ग्राम पंचायतों की विकास योजनाएँ एकत्रित करके” जिला या राज्य स्तर पर प्रस्तुत करती है, जिससे “धनराशि के आवंटन में मदद” मिलती है

संसाधन कहाँ से:

  • गाँव की अपनी आय — भवन, जल, दुकानों और हाट-बाज़ार पर छोटे कर एवं शुल्क, तथा पंचायत की भूमि या तालाब से किराया।
  • राज्य सरकार से अनुदान और करों में हिस्सा, जो राज्य वित्त आयोग की संस्तुति पर तय होता है।
  • केंद्र सरकार से अनुदान, जो वित्त आयोग की संस्तुति पर देश की हर पंचायत को मिलता है।
  • योजनाओं का धन, जो किसी विशेष उद्देश्य के लिए आता है — बारहमासी सड़कों के लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, तथा रोज़गार, स्वच्छता और पेयजल के अभियान।
  • ग्रामवासियों का अपना श्रम और सहयोग। पृष्ठ 166 का हिवरे बाजार इसका प्रमाण है — “ग्रामवासियों के सहयोग से” वर्षा जल-संचयन, जल-संरक्षण और लाखों पेड़ों ने सूखाग्रस्त गाँव को हरा-भरा बना दिया।
स्वयं देखिए: घर पर पूछिए कि आपके गाँव या मोहल्ले में पिछली ग्राम सभा या वार्ड बैठक कब हुई थी और उसमें क्या तय हुआ। अधिकांश राज्यों में ग्राम सभा की बैठक वर्ष में कम से कम दो बार होनी चाहिए, और मतदाता सूची में नाम वाले हर व्यक्ति को वहाँ जाने का अधिकार है।
प्र4.
यदि किसी भूमि को लेकर विवाद है अथवा किसी की कृषि उपज चोरी हो गई है, तो क्या होगा?
उत्तर

ये दो अलग प्रकार की समस्याएँ हैं और इनके रास्ते भी अलग हैं।

भूमि का विवादकृषि उपज की चोरी
यह है क्यादो ग्रामवासियों के बीच सीमा, हिस्से या स्वामित्व को लेकर असहमतिअपराध — किसी ने दूसरे की वस्तु ले ली
पहला कदमभू-अभिलेख देखे जाते हैं। इसीलिए पृष्ठ 167 पर पटवारी का परिचय दिया गया है, जो “गाँव के भू-अभिलेखों का रख-रखाव करता है” और जिसके पास कई जगह “पीढ़ियों पुराने मानचित्र” भी रहते हैंपुलिस को सूचना, जो राज्य स्तर पर कार्यपालिका का भाग है
स्थानीय सहायतागाँव के बुजुर्ग और ग्राम पंचायत प्राय: दोनों पक्षों में समझौता कराते हैं; कई राज्यों में छोटे विवादों के लिए न्याय पंचायत या ग्राम कचहरी भी हैसरपंच और पंचायत पता लगाने और रिपोर्ट कराने में सहायता कर सकते हैं, परंतु वे दंड नहीं दे सकते
न सुलझे तोमामला राजस्व अधिकारियों और फिर न्यायालय — अर्थात न्यायपालिका — तक जाता हैपुलिस अन्वेषण करती है और मामला न्यायालय जाता है, जो दोष और दंड तय करता है
याद रखने योग्य पंक्ति: पंचायत शासन और विकास करती है; न्याय और दंड नहीं देती। कानून टूटा या नहीं, यह तय करना न्यायपालिका का काम है और उसे लागू कराना पुलिस का — ये दोनों अंग आपने अध्याय 10 में पढ़े थे। इन्हें अलग रखना ही ‘शक्तियों का पृथक्करण’ है, और यह गाँव के स्तर पर भी लागू होता है।
प्र5.
गाँव में ऐसे अनेक प्रश्न उठ सकते हैं। क्या ऐसी प्रत्येक समस्याओं के लिए गाँव के लोग राज्य या राष्ट्र की राजधानी जा सकते हैं?
उत्तर

नहीं — और यही एक ‘नहीं’ इस पूरे अध्याय का कारण है।

सोचिए कि लक्ष्मणपुर के एक परिवार के लिए राजधानी जाने का अर्थ क्या होगा —

  • दूरी और खर्च। राज्य की राजधानी एक दिन दूर हो सकती है, राष्ट्र की उससे भी अधिक। एक टूटे हैंडपंप की शिकायत के लिए किसान के कई दिन और बहुत-सा धन लगेगा।
  • संख्या। देश में लगभग 6,00,000 गाँव हैं। यदि हर गाँव महीने में एक शिकायत भी भेजे, तो कोई राजधानी उन्हें नहीं निपटा सकेगी।
  • जानकारी। दूर बैठे अधिकारी को यह पता नहीं होता कि कौन-सी पुलिया हर वर्षा में बह जाती है या किस टोले में पीने का पानी नहीं है। ग्रामवासियों को पता होता है।
  • समय। बुवाई से पहले टूटी सड़क अभी बननी चाहिए, महीनों तक फ़ाइल ऊपर-नीचे होने के बाद नहीं।

इसलिए उत्तर यह है कि सरकार को ही गाँव तक लाया जाए — “पंचायत, शासन को लोगों के समीप लाती है और निर्णय लेने की प्रक्रिया में ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी संभव बनाती है”। बड़े विषय अब भी ऊपर जाते हैं — पंचायत समिति से जिला परिषद और वहाँ से राज्य तक — पर यात्रा ग्रामवासी नहीं, उनकी योजनाएँ करती हैं।

दोहराने के लिए एक पंक्ति: स्थानीय समस्याओं के लिए स्थानीय निर्णय — पंचायती राज का पूरा तर्क यही है।
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