शासन के काम को बाँटकर — पहले तीन अंगों में, फिर तीन स्तरों में, और सबसे नीचे स्थानीय स्तर को स्थानीय लोगों को सौंपकर।
पहले समस्या का आकार देखिए, जैसा पृष्ठ 163 पर दिया है —
| भारत | पुस्तक में दिया आँकड़ा |
|---|---|
| गाँव | लगभग 6,00,000 |
| कस्बे | 8,000 |
| नगर | 4,000 से अधिक |
| जनसंख्या | 1.4 अरब पार, जिसका लगभग दो-तिहाई ग्रामीण |
इतने बड़े देश के लिए कोई एक कार्यालय निर्णय नहीं ले सकता। इसलिए काम बाँटा गया है —
- तीन अंगों में — विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका, जिन्हें आपने अध्याय 10 में पढ़ा।
- तीन स्तरों में — केंद्र, राज्य और स्थानीय, अर्थात चित्र 10.4 का पिरामिड।
- और स्थानीय स्तर के भीतर फिर तीन स्तरों में — ग्राम, खंड और जिला, जिनकी चर्चा इस अध्याय में है।
पूरी रचना के पीछे नियम सरल है — कोई विषय उसी सबसे छोटे स्तर पर निपटे जो उसे निपटा सके। बंद नाली ग्राम पंचायत का काम है, दस गाँवों को जोड़ने वाली सड़क पंचायत समिति का, जिला अस्पताल जिला परिषद का, पुलिस राज्य का, और रक्षा या मुद्रा केंद्र का।