प्र1.
हमने द्वितीयक क्षेत्रक की गतिविधियों के कुछ उदाहरण देखे हैं, क्या आप द्वितीयक क्षेत्रक में दो अन्य आर्थिक गतिविधियों के नाम बता सकते हैं?
उत्तर
दो स्पष्ट उदाहरण, रूपांतरण सहित।
1. चीनी बनाना — खेत का गन्ना (प्राथमिक) → चीनी मिल में पेराई, उबाल और क्रिस्टलीकरण → चीनी
2. सीमेंट बनाना — खदान का चूना-पत्थर (प्राथमिक) → भट्ठे में पकाकर पीसना → सीमेंट
2. सीमेंट बनाना — खदान का चूना-पत्थर (प्राथमिक) → भट्ठे में पकाकर पीसना → सीमेंट
ये द्वितीयक क्यों हैं। दोनों में कार्य करने वाला उस वस्तु से आरंभ करता है जिसे प्राथमिक क्षेत्रक पहले ही प्रकृति से ले चुका है, और उसका रूप बदलकर एक नया उत्पाद बनाता है जिसे बेचा या उपभोग किया जा सके। गन्ने को चाय में नहीं डाला जा सकता, चीनी को डाला जा सकता है। चूना-पत्थर दीवार नहीं जोड़ सकता, सीमेंट जोड़ सकता है।
और भी उदाहरण — हर एक किसी प्राथमिक उपज को नया रूप देता है —
| द्वितीयक क्षेत्रक की गतिविधि | कच्चा माल (प्राथमिक) | तैयार उत्पाद | भारत में प्रमुख केंद्र |
|---|---|---|---|
| चीनी मिल | गन्ना | चीनी, गुड़, शीरा | कोल्हापुर (महाराष्ट्र), मेरठ (उत्तर प्रदेश) |
| सीमेंट निर्माण | चूना-पत्थर | सीमेंट | चित्तौड़गढ़ (राजस्थान), कलबुर्गी (कर्नाटक) |
| जूट मिल | कच्चा जूट | बोरे, टाट, जूट की चटाई | हुगली नदी के किनारे, पश्चिम बंगाल |
| चर्म उद्योग | पशुओं की खाल | जूते, बैग, बेल्ट | कानपुर (उत्तर प्रदेश), चेन्नई (तमिलनाडु) |
| कागज निर्माण | लकड़ी की लुगदी, बाँस, रद्दी कागज | कागज और गत्ता | बल्लारपुर (महाराष्ट्र), नेपानगर (मध्य प्रदेश) |
| हथकरघा बुनाई | रेशम या सूती धागा | बनारसी साड़ी, पोचमपल्ली इकत | वाराणसी (उत्तर प्रदेश), पोचमपल्ली (तेलंगाना) |
| बेकरी और खाद्य प्रसंस्करण | गेहूँ का आटा, फल, दूध | डबलरोटी, बिस्कुट, मुरब्बा, पापड़, अचार | लगभग हर कस्बे की छोटी इकाइयाँ |
| भवन निर्माण | पत्थर, बालू, ईंट, सीमेंट, इस्पात | मकान, सड़क, पुल, विद्यालय | सर्वत्र — पृष्ठ 199 इसे द्वितीयक क्षेत्रक में रखता है |
सावधानी: उत्तर में “चीनी बेचना” या “सीमेंट ढोना” मत लिखिए। ये तृतीयक हैं। द्वितीयक उत्तर में कुछ बनाना या निर्माण करना अवश्य होना चाहिए।