प्र1.
क्या आप ऐसी प्राथमिक गतिविधियों के बारे में सोच सकते हैं, जिन्हें आपने पहले देखा है? इन गतिविधियों में कौन-से प्राकृतिक संसाधनों का प्रयोग हुआ है? इनमें से दो के नाम बताइए और अपने अनुभवों को सहपाठियों के साथ साझा कीजिए।
उत्तर
यह “अपने आस-पास देखिए” वाला प्रश्न है, इसलिए सबसे अच्छा उत्तर वही होगा जो आपने सचमुच देखा हो — रेल की खिड़की से, गाँव की यात्रा में, समुद्र तट पर या विद्यालय के रास्ते में। पहले गतिविधि लिखिए, फिर पूछिए कि वह प्रकृति के किस भाग से लेती है। हर प्राथमिक गतिविधि के पीछे कोई न कोई प्राकृतिक संसाधन होता है।
नमूना उत्तर:
| मैंने देखी हुई प्राथमिक गतिविधि | कहाँ | प्रयुक्त प्राकृतिक संसाधन | कार्य करने वाला क्या करता है |
|---|---|---|---|
| 1. धान की रोपाई | अपनी दादी के गाँव जाते समय सड़क किनारे के खेतों में | मिट्टी और जल (नहर या नलकूप), तथा धूप; बीज भी धरती से ही मिलता है | गीले खेत की जुताई करता है, हाथ से पौध की कतारें लगाता है, पानी भरता है, निराई करता है और लगभग चार माह बाद कटाई करता है |
| 2. छोटी नाव से मछली पकड़ना | तट के बंदरगाह पर, तड़के सुबह | समुद्र और उसमें रहने वाली मछलियाँ — एक जैव संसाधन, जो अत्यधिक दोहन न हो तो स्वयं भर जाता है | भोर से पहले नाव लेकर जाता है, जाल डालता और खींचता है, मछलियाँ बर्फ की टोकरियों में छाँटता है और तट पर बेच देता है |
अन्य प्राथमिक गतिविधियाँ जो आपने देखी होंगी। पुस्तक के पृष्ठ 198 के चित्र स्वयं ग्रीनहाउस कृषि, खनन, मत्स्य पालन (मात्स्यिकी), वानिकी तथा पशु पालन दिखाते हैं। इनके अतिरिक्त —
- पहाड़ी ढलान पर बकरी या भेड़ चराना — संसाधन हैं घास, भूमि और स्वयं पशु।
- कुक्कुट पालन फार्म में अंडे एकत्र करना — संसाधन हैं पशु-पक्षी; उनका दाना खेतों के अनाज से आता है।
- कस्बे के किनारे पत्थर की खदान — संसाधन है धरती के भीतर का पत्थर और खनिज।
- केरल में रबड़ का दोहन या छत्तीसगढ़ और ओडिशा के वनों से तेंदू पत्ता तथा शहद एकत्र करना — संसाधन है वन।
- राजस्थान में सरसों के खेत के पास मधुमक्खी पालन — संसाधन हैं फूल, मधुमक्खियाँ और भूमि।
स्वयं जाँचिए: यदि आप प्रकृति का वह ठीक-ठीक भाग बता सकें जिससे कार्य करने वाला लेता है — यह मिट्टी, यह नदी, यह खदान, यह पशुधन — तो गतिविधि प्राथमिक है। यदि वह किसी दूसरे के बनाए हुए माल पर काम कर रहा है, तो नहीं।
यह क्यों महत्वपूर्ण है: भारत में आज भी लगभग आधे कार्यशील लोग प्राथमिक क्षेत्रक से, विशेषकर कृषि से, अपनी आजीविका चलाते हैं। द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रक जो कुछ करते हैं, उसका आरंभ इन्हीं लोगों द्वारा प्रकृति से लिए गए माल से होता है — इसीलिए मिट्टी, जल, वन और मत्स्य भंडार की देखभाल केवल “पर्यावरण” का विषय नहीं, आर्थिक आवश्यकता है।