प्र1.
वर्तमान में इस सहकारी संगठन के पास अनेक दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र और कारखाने हैं, जो भारत के सभी भागों में अनेक प्रकार के उत्पाद तैयार करते हैं। क्या आप इनमें से कुछ का नाम बता सकते हैं?
उत्तर
हाँ — किसी भी डेयरी की दुकान में जाइए, वहाँ रखी लगभग हर वस्तु इसी सहकारी संगठन का उत्पाद है। और इन सबका आरंभ एक ही वस्तु से होता है — किसान के घर गाय या भैंस से निकाला गया दूध।
| उत्पाद का प्रकार | पहचाने-जाने वाले उदाहरण | दूध के साथ क्या किया जाता है |
|---|---|---|
| तरल दूध | टोंड दूध, डबल टोंड दूध, फुल क्रीम दूध, स्वादिष्ट (फ्लेवर्ड) दूध | पाश्चुरीकरण करके थैलियों या डिब्बों में पैक किया जाता है |
| वसा से बने उत्पाद | मक्खन, घी, क्रीम | दूध से वसा अलग करके मथा जाता है |
| सूखे उत्पाद | दूध का पाउडर, शिशु आहार, डेयरी व्हाइटनर | पानी सुखा दिया जाता है, जिससे दूध महीनों चलता है |
| पनीर और चीज | प्रसंस्कृत चीज, चीज स्लाइस, पनीर | दूध फाड़कर ठोस भाग दबाया जाता है |
| किण्वित उत्पाद | दही, छाछ, लस्सी, श्रीखंड | जामन मिलाकर दूध जमाया जाता है |
| मिठाइयाँ और जमे हुए उत्पाद | आइसक्रीम, चॉकलेट, गुलाब जामुन, रसगुल्ला, पेड़ा | दूध के ठोस अंश को पकाया, मीठा या जमाया जाता है |
पहले दो नाम पुस्तक स्वयं देती है। जब दूध की मात्रा इतनी बढ़ गई कि उसे केवल दूध के रूप में नहीं बेचा जा सकता था, तब किसानों ने “आणंद में एक दुग्ध प्रसंस्करण कारखाना स्थापित किया तथा मक्खन और दूध का पाउडर बनाना आरंभ किया” (पृष्ठ 203)। शेष सारे उत्पाद उसी पहले कारखाने से आगे बढ़े।
सहकारी संगठन इतने उत्पाद क्यों बनाता है: दूध कुछ ही घंटों में खराब हो जाता है, किंतु घी महीनों और दूध का पाउडर लगभग एक वर्ष चलता है। हर अतिरिक्त उत्पाद उस दूध को बचाने का एक और तरीका है जो अन्यथा नष्ट हो जाता — और हर प्रसंस्करण चरण मूल्य संवर्धन करता है, जिससे किसान के दूध की कमाई सादे दूध से अधिक हो जाती है। इसीलिए वही एक लीटर दूध भोपाल में मक्खन बन सकता है और किसी अन्य देश जाने वाले जहाज में दूध का पाउडर।
क्या आप जानते हैं? पिछले तीस वर्षों से भारत विश्व में दूध का सबसे बड़ा उत्पादक है। इसका आरंभ इसी प्रकार के सहकारी संगठनों से हुआ, और आणंद की इसी पद्धति पर बने देशव्यापी कार्यक्रम को ऑपरेशन फ्लड या श्वेत क्रांति कहा जाता है।