यदि संभव हो तो अपने ही जिले के किसी सहकारी संगठन का नाम लिखिए — घर पर पूछिए या जो दूध, शहद अथवा हथकरघा कपड़ा आपका परिवार खरीदता है उसके लेबल को देखिए। अच्छे उत्तर में तीन बातें होनी चाहिए — संगठन का नाम, उसके सदस्य कौन हैं, और उनके जीवन में क्या बदला।
नमूना उत्तर: मेरे जिले में लिज्जत पापड़ का एक केंद्र है, जो श्री महिला गृह उद्योग लिज्जत पापड़ का भाग है। इसकी शुरुआत 1959 में मुंबई में सात महिलाओं और ₹80 की उधार ली गई राशि से हुई थी। आज हजारों महिला सदस्य अपने घरों और मोहल्ले के केंद्रों में पापड़ बेलती हैं। हर सदस्य स्वामी भी है और कमाई में हिस्सेदार भी, इसलिए जो महिला कारखाने की नौकरी के लिए घर से बाहर नहीं जा सकती, वह भी अपनी आय अर्जित करती है। मेरे कस्बे की कई सदस्यों ने इसी आय से अपने बच्चों की विद्यालय की फीस भरी है।
भारत के कुछ प्रसिद्ध सहकारी संगठन, जिनका नाम आप ले सकते हैं:
| सहकारी संगठन | कहाँ | सदस्य कौन | क्या बदला |
|---|---|---|---|
| अमूल | आणंद, गुजरात | दुग्ध उत्पादक किसान, जिनमें बहुत बड़ी संख्या महिलाओं की है | बिचौलियों की पकड़ समाप्त हुई; अब किसान स्वयं उन कारखानों के स्वामी हैं जो उनका दूध संसाधित करते हैं |
| नंदिनी (के.एम.एफ.) | कर्नाटक | गाँवों के दुग्ध उत्पादक | लाखों ग्रामीण परिवारों तक दूध का प्रतिदिन भुगतान |
| सुधा | बिहार | बिहार के दुग्ध संघों के किसान | बहुत छोटी जोतों वाले जिलों में दूध का पक्का बाजार |
| आविन | तमिलनाडु | गाँव की दुग्ध सहकारी समितियाँ | पशुओं के पास ही, पैदल दूरी पर दुग्ध संग्रह केंद्र |
| वरका | पंजाब | पंजाब के दुग्ध संघों के उत्पादक | गेहूँ और धान की खेती के साथ दूसरी आमदनी |
| केवी | नागालैंड | पहाड़ी क्षेत्रों के दुग्ध उत्पादक | कम संगठित उद्योग वाले क्षेत्र में नकद आय |
| लिज्जत पापड़ | मुंबई से आरंभ, अब देशभर में | महिला सदस्य, जो स्वयं स्वामी भी हैं | घर से किया जा सकने वाला काम और अपनी अलग आय |
| सेवा (SEWA) की सहकारी समितियाँ | अहमदाबाद, गुजरात | महिला फेरीवाले, बुनकर, कचरा बीनने वाली और घर से काम करने वाली महिलाएँ | बचत, बैंक ऋण और उचित मूल्य, जो पहले उन्हें कभी नहीं मिले |
| इफको (IFFCO) | देशभर में | किसानों की सहकारी समितियाँ | उर्वरक किसानों के अपने ही संगठन द्वारा बनाया और बाँटा जाता है |