प्र1.
प्रत्येक मानचित्र में वृत्ताकार रेखाओं को क्या कहते हैं? क्या आप जानते हैं कि दोनों ध्रुवों पर मिलने वाली रेखाओं को क्या कहा जाता है? (संकेत — आपने इनके विषय में पिछले अध्याय में पढ़ा है, परंतु यहाँ इन्हें अलग प्रकार से प्रस्तुत किया गया है।)
उत्तर
ये दोनों वही जाल (ग्रिड) हैं जो आपने अध्याय 1 में पढ़ा था — केवल इन्हें ध्रुव के ठीक ऊपर से देखा गया है, बगल से नहीं।
| चित्र 2.2 में | नाम | ऐसी क्यों दिखती हैं |
|---|---|---|
| एक के भीतर एक वृत्ताकार रेखाएँ | अक्षांश रेखाएँ (समानांतर) | अक्षांश रेखाएँ वास्तव में पृथ्वी के चारों ओर के वृत्त हैं। ध्रुव के ऊपर से देखने पर वे छल्लों जैसी दिखती हैं — ध्रुव केंद्र में और सबसे बाहरी वृत्त भूमध्य रेखा (0°)। |
| ध्रुव से पहिए की तीलियों जैसी फैलती रेखाएँ | देशांतर रेखाएँ (याम्योत्तर) | प्रत्येक देशांतर रेखा उत्तरी ध्रुव से दक्षिणी ध्रुव तक जाती है, इसलिए सभी ध्रुव पर मिलती हैं। ऊपर से देखने पर वे उसी एक बिंदु से फैलती दिखती हैं। |
वही रेखाएँ भिन्न क्यों दिखती हैं: अध्याय 1 में आपने ग्लोब को बगल से देखा था, इसलिए अक्षांश सीधी आड़ी रेखाओं जैसे और देशांतर ऊपर-नीचे जुड़ते वक्रों जैसे लगे। यहाँ आप पृथ्वी के अक्ष की सीध में ऊपर से देख रहे हैं। रेखाएँ नहीं बदलीं — केवल देखने का कोण बदला है।
स्वयं जाँचिए: ग्लोब को इस प्रकार पकड़िए कि उत्तरी ध्रुव सीधे आपकी आँख की ओर हो। तब आर्कटिक वृत्त, कर्क रेखा और भूमध्य रेखा एक के भीतर एक तीन वृत्तों जैसी दिखेंगी और सभी देशांतर रेखाएँ ध्रुव से फैलती हुई।