महासागर एवं महाद्वीप क्या हैं? उनके नाम क्या हैं एवं उनका वितरण कैसा है?
उत्तर
महासागर पृथ्वी की सबसे बड़ी जलराशियाँ हैं। महाद्वीप भूमि के बड़े, निरंतर विस्तार हैं। दोनों मिलकर पृथ्वी की पूरी सतह बनाते हैं।
जल पृथ्वी की सतह के लगभग तीन-चौथाई (लगभग 71%) भाग पर
भूमि कुछ अधिक एक-चौथाई (लगभग 29%) भाग पर
इसीलिए अंतरिक्ष से पृथ्वी नीली दिखती है — 'नीला ग्रह'
पाँच महासागर, बड़े से छोटे क्रम में —
महासागर
आकार
लगभग कहाँ
प्रशांत महासागर
प्रथम — सबसे बड़ा
एक ओर एशिया और आस्ट्रेलिया, दूसरी ओर अमेरिका महाद्वीपों के बीच
अटलांटिक महासागर
द्वितीय
अमेरिका महाद्वीपों तथा यूरोप-अफ्रीका के बीच
हिंद महासागर
तृतीय
उत्तर में एशिया, पश्चिम में अफ्रीका, पूर्व में आस्ट्रेलिया
दक्षिणी (अंटार्कटिका) महासागर
चतुर्थ
अंटार्कटिका के चारों ओर फैला जल
आर्कटिक महासागर
पंचम — सबसे छोटा
उत्तरी ध्रुव के चारों ओर, अधिकांशत: हिम से ढका
सात महाद्वीप, बड़े से छोटे क्रम में — एशिया, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका, दक्षिणी अमेरिका, अंटार्कटिका, यूरोप, आस्ट्रेलिया। (पृष्ठ 35 के अनुसार इन्हें चार, पाँच या छह भी गिना जा सकता है, किंतु सात की गिनती सर्वाधिक प्रचलित है।)
इनका वितरण दोनों गोलार्धों में समान नहीं है —
उत्तरी गोलार्ध में अधिकांश स्थल है — यूरोप, एशिया, उत्तरी अमेरिका तथा अफ्रीका का उत्तरी भाग।
दक्षिणी गोलार्ध में अधिकांश जल है; यहाँ केवल दक्षिणी अमेरिका, आस्ट्रेलिया, अंटार्कटिका और अफ्रीका का दक्षिणी भाग है।
महासागर भी वास्तव में अलग-अलग नहीं हैं। वे सब जुड़े हुए हैं, इसलिए मानचित्र पर खींची गई सीमाएँ केवल प्रचलन हैं।
भूमध्य रेखा पृथ्वी को दो गोलार्धों में बाँटती है। पूरी सतह का लगभग तीन-चौथाई भाग जल है, किंतु वह दोनों गोलार्धों में बराबर नहीं बँटा।
प्र2.
महासागर एवं महाद्वीप पृथ्वी पर जीवन को, जिसमें मानव जीवन भी सम्मिलित है, किस प्रकार प्रभावित करते हैं?
उत्तर
ये हमारी जलवायु, हमारी साँस की हवा, हमारे भोजन, हमारी यात्रा एवं व्यापार तथा हमारी कथाओं एवं त्योहारों तक को गढ़ते हैं। अध्याय का उत्तर क्रम से —
किस रूप में प्रभाव
वास्तव में क्या होता है
वर्षा एवं जलचक्र
समुद्री जल वाष्पित होकर बादलों के विशाल समूह बनाता है (चित्र 2.1 में सफेद आकृतियाँ) और महाद्वीपों पर वर्षा करता है। भारत की मानसूनी वर्षा महासागर से ही उत्पन्न होती है। महासागरों के बिना वर्षा नहीं होगी और पृथ्वी मरुस्थल बन जाएगी।
ऑक्सीजन
दुनिया-भर की आधी से अधिक ऑक्सीजन महासागर का वनस्पति जगत (शैवाल आदि) बनाता है। इसीलिए महासागरों को 'पृथ्वी के फेफड़े' कहा जाता है।
जलवायु का नियंत्रण
जल धीरे गर्म और धीरे ठंडा होता है, इसलिए महासागर तापमान को संतुलित रखते हैं। तटीय मुंबई या चेन्नई में नागपुर या दिल्ली जैसी अति गर्मी या सर्दी नहीं पड़ती।
भोजन
मछली पकड़ना लाखों लोगों की आजीविका है — केरल, तमिलनाडु, गुजरात, ओडिशा एवं पश्चिम बंगाल में बड़े मत्स्यजीवी समुदाय हैं।
आवागमन एवं व्यापार
आरंभिक काल से लोग समुद्र पार जाकर बसे, व्यापार किया और सैनिक अभियान चलाए। भारत का अधिकांश विदेश व्यापार आज भी मुंबई, कांडला, चेन्नई, कोलकाता और विशाखापत्तनम जैसे बंदरगाहों से समुद्र मार्ग द्वारा होता है।
संस्कृति
तटीय समाजों में समुद्र, समुद्री देवी-देवताओं, समुद्री दैत्यों और समुद्र के कोषों की कथाएँ मिलती हैं। भारत में वैदिक देवता वरुण महासागर से जुड़े हैं — भारतीय नौसेना का आदर्श वाक्य 'शं नो वरुण:' है।
आपदाएँ
महासागर चक्रवात एवं सुनामी भी लाते हैं, जो तटीय क्षेत्रों में भारी जन-धन हानि करते हैं।
महाद्वीपों की भूमिका
महाद्वीपों पर ही मिट्टी, वन, नदियाँ और पर्वत हैं, जिन पर स्थलीय जीवन निर्भर है। उनकी स्थिति और आकार तय करते हैं कि कहाँ कौन-सी हवाएँ चलेंगी, अर्थात् किस क्षेत्र की जलवायु कैसी होगी।
यह आज क्यों महत्वपूर्ण है: हम महासागरों पर इतने निर्भर हैं कि उन्हें हानि पहुँचाना अपने आप को हानि पहुँचाना है। प्रतिवर्ष लाखों टन प्लास्टिक कचरा समुद्र में फेंका जाता है और आवश्यकता से अधिक मछली पकड़ने से समुद्री जीवन घट रहा है। महासागरों की रक्षा दया नहीं, आत्मरक्षा है।
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