प्र1.
चित्रों के माध्यम से (चित्र 3.6, पृष्ठ 50) पर्वतों पर रहने वाले लोगों के सामने आने वाली चुनौतियों को दर्शाया गया है। कक्षा में समूह बनाकर चर्चा कीजिए और प्रत्येक पर एक अनुच्छेद लिखिए। यह भी विचार कीजिए कि जब पर्वतों पर इतनी सारी चुनौतियाँ हैं, फिर भी लोग वहाँ क्यों रहते हैं?
उत्तर
चित्र 3.6 में सात नामांकित चित्र दिए गए हैं। नीचे उसी क्रम में प्रत्येक पर एक अनुच्छेद है, और उसके बाद प्रश्न के दूसरे भाग का उत्तर।
| चित्र 3.6 की चुनौती | उस पर एक अनुच्छेद |
|---|---|
| आकस्मिक बाढ़ | आकस्मिक बाढ़ किसी स्थान विशेष में अचानक आने वाली बाढ़ है, जो बहुधा बादल फटने से होती है। पर्वतों में ढलानें खड़ी होती हैं और मिट्टी की परत पतली, इसलिए वर्षा का जल भीतर नहीं रिसता — वह ढलान पर दौड़ता है और कुछ ही मिनटों में एक छोटी जलधारा गरजते हुए मटमैले प्रवाह में बदल जाती है। चेतावनी का समय लगभग नहीं मिलता। पुल, पगडंडियाँ, खड़े वाहन और नदी किनारे के घर बह जाते हैं और गाँव कट जाते हैं, क्योंकि सड़क ही समाप्त हो जाती है। |
| भूस्खलन | भूस्खलन का अर्थ है पर्वतीय भूखंड के एक बड़े भाग या चट्टान का अकस्मात टूटकर गिरना। भारी वर्षा से मिट्टी भीग कर भारी और फिसलनदार हो जाती है, शेष काम गुरुत्व कर देता है। सड़क काटना, विस्फोट और अनियोजित निर्माण ढलानों को और कमजोर बनाते हैं। एक ही भूस्खलन राजमार्ग के लंबे हिस्से को दबा सकता है, नदी को रोक सकता है और पूरी घाटियों को दिनों तक अलग-थलग कर सकता है — पुस्तक का चित्र यही दिखाता है, बीच से टूटी हुई सड़क। |
| पर्यटकों का अनियंत्रित रूप से आ जाना | यह प्राकृतिक नहीं, मानव-निर्मित चुनौती है। पर्यटन आय लाता है, किंतु जब एक साथ बहुत अधिक वाहन और पर्यटक पहुँच जाते हैं तो सँकरी पहाड़ी सड़कों पर घंटों जाम लग जाता है, जल और बिजली की कमी हो जाती है, ढलानों पर प्लास्टिक कचरे के ढेर लग जाते हैं जहाँ कोई गाड़ी पहुँच ही नहीं सकती, और जिस शांति के लिए लोग आए थे वही नष्ट हो जाती है। पर्वतीय पर्यावरण नाजुक है और स्वागत तथा संरक्षण के बीच सही संतुलन बनाना प्राय: कठिन हो जाता है। |
| हिमस्खलन (एवलांश) | हिमस्खलन का अर्थ है पर्वत से अकस्मात हिम, बर्फ या चट्टानों का टूटकर गिरना, और ऐसा प्राय: तब होता है जब हिम पिघलना आरंभ होती है। पूरी ढलान की हिम एक साथ खिसक कर वाहन से भी तेज गति से नीचे आ सकती है और रास्ते में जो भी हो उसे दबा देती है। पर्वतारोही, ऊँचाई पर तैनात सैनिक, सड़क-मजदूर और खड़ी हिम-ढलानों के नीचे बसे गाँव — सभी संकट में रहते हैं, और बचाव कठिन होता है क्योंकि गिरी हुई हिम लगभग कंक्रीट जितनी कठोर जम जाती है। |
| भारी हिमपात | भारी हिमपात एक ही रात में सड़कों, छतों और खेतों को ढँक सकता है। दर्रे बंद हो जाते हैं, बसें रुक जाती हैं, विद्यालय बंद हो जाते हैं और गाँव हफ्तों तक कट सकते हैं। जल की पाइपें जम कर फट जाती हैं, भार से बिजली की तारें टूट जाती हैं, और भोजन, ईंधन तथा दवाएँ पहले से जमा करनी पड़ती हैं। इसीलिए पहाड़ी घरों की छतें ढलवाँ बनाई जाती हैं — ताकि हिम जमा होकर छत को तोड़ने के बजाय फिसल जाए। |
| बादल फटना | बादल फटना अचानक होने वाली प्रचंड वर्षा है, जिसमें बहुत कम समय में बहुत छोटे क्षेत्र पर भारी मात्रा में जल गिरता है। पर्वत नम वायु को तेजी से ऊपर उठने को विवश करते हैं, इसीलिए बादल फटना यहाँ अधिक होता है। गिरता हुआ जल न इतनी तेजी से भूमि में रिस सकता है, न बह सकता है, इसलिए बादल फटने के बाद प्राय: इसी चित्र की दो और आपदाएँ — आकस्मिक बाढ़ और भूस्खलन — एक के बाद एक आती हैं। |
| ठंडा मौसम | ऊँचाई बढ़ने के साथ तापमान गिरता है, इसलिए पर्वतीय शीत ऋतु लंबी और कठोर होती है। गर्म कपड़े, ईंधन की लकड़ी और अच्छी तरह ढँके घर सुविधा नहीं, आवश्यकता हैं। फसल वर्ष के केवल कुछ ही महीनों में उगती है, इसलिए भोजन सुरक्षित रखकर जमा करना पड़ता है। ठंड साधारण कामों को भी कठिन बना देती है — निर्माण रुक जाता है, नल जम जाते हैं, और बुजुर्गों तथा शिशुओं की विशेष देखभाल करनी पड़ती है। |
तो इतनी चुनौतियों के बाद भी लोग पर्वतों पर क्यों रहते हैं?
- क्योंकि वह उनका घर है। पीढ़ियों से परिवार वहीं रहते आए हैं; उनकी भूमि, घर, मंदिर, त्योहार, भाषा और संबंधी सब वहीं हैं। लोग अपने घर को केवल उसके खतरों से नहीं तौलते।
- शुद्ध वायु और मनोरम दृश्य। अध्याय की अपनी पंक्ति कहती है कि पर्वतीय जीवन के कई सकारात्मक पक्ष हैं — "शुद्ध वायु, मनोरम दृश्य आदि"।
- पर्वत से मिलने वाली आजीविका। घाटियों में वेदिका कृषि, पशुपालन, सेब और अखरोट के बाग, वन उपज, औषधीय पौधे — और पर्यटन, जो प्राय: आय का सबसे बड़ा साधन है।
- जल और सुरक्षा। पर्वतीय स्रोत वर्ष-भर स्वच्छ जल देते हैं, और जो दुर्गमता आवागमन कठिन बनाती है वही मैदानों की भीड़, शोर और प्रदूषण को दूर भी रखती है।
- संस्कृति और आस्था। अनेक समुदाय पर्वतों को पवित्र मानते हैं; तीर्थ मार्गों और देवस्थलों ने सदियों से बस्तियों को सहारा दिया है।
- कौशल और लचीलापन। लोग स्वयं को ढाल लेते हैं — ढलवाँ छतें, सीढ़ीदार खेत, संचित भोजन, ऊनी वस्त्र और यह गहरी जानकारी कि कौन-सी ढलान सुरक्षित है। अध्याय इसी शब्द पर समाप्त होता है — लचीलापन।
समूह कार्य के लिए सुझाव: सातों चित्र समूह के सदस्यों में बाँट लीजिए, प्रत्येक एक अनुच्छेद लिखे, फिर सातों को क्रम से पढ़िए। आप देखेंगे कि बादल फटना → आकस्मिक बाढ़ → भूस्खलन वास्तव में तीन अलग दुर्घटनाएँ नहीं, एक ही शृंखला की कड़ियाँ हैं।