प्र1.
'पश्चिमी से पूर्वी समुद्र तक' से क्या तात्पर्य है? चित्र 5.2 में क्या आप इनकी और 'पर्वतों के देवता' की स्थिति को दिखा सकते हैं?
उत्तर
कालिदास यहाँ भारतीय उपमहाद्वीप की पूरी चौड़ाई का वर्णन कर रहे हैं। भूगोल की दृष्टि से श्लोक तीन चीजों के नाम लेता है —
| श्लोक में | आज इसे क्या कहते हैं | कहाँ है |
|---|---|---|
| पश्चिमी समुद्र | अरब सागर | उपमहाद्वीप के पश्चिम (बाईं ओर) — गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक और केरल के तट पर; यह हिंद महासागर की एक शाखा है |
| पूर्वी समुद्र | बंगाल की खाड़ी | पूर्व (दाईं ओर) — पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के तट पर; यह भी हिंद महासागर की शाखा है |
| 'पर्वतों के देवता' (हिमालय) | हिमालय | पूरे उत्तर में फैली विशाल श्रृंखला — जम्मू-कश्मीर और लद्दाख से हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, नेपाल, सिक्किम और भूटान होते हुए अरुणाचल प्रदेश तक |
चित्र 5.2 (अध्याय 5 में दिया भारतीय उपमहाद्वीप का भौतिक मानचित्र) पर इन्हें कैसे दिखाएँ:
- मानचित्र के सबसे ऊपर आर-पार फैली भूरी पट्टी खोजिए — यही हिमालय है, 'पर्वतों का देवता'।
- इस पट्टी के साथ पश्चिम की ओर चलिए, जहाँ यह समुद्र के निकट आती है: उस ओर का जल अरब सागर है।
- अब पूर्व की ओर चलिए, जहाँ ब्रह्मपुत्र दक्षिण की ओर मुड़ती है: उस ओर का जल बंगाल की खाड़ी है।
- अब एक समुद्र से दूसरे समुद्र तक अपनी उँगली पर्वतों के साथ-साथ फेरिए — यही "पश्चिमी से लेकर पूर्वी समुद्र तक फैला हुआ" का अर्थ है।
कवि उसे मापदंड क्यों कहते हैं: श्लोक कहता है कि हिमालय "पृथ्वी को नापने का मापदंड" है। मानचित्र के ऊपरी भाग पर पैमाना रखकर देखिए — यह श्रृंखला लगभग 2400 किलोमीटर लंबी सीधी, अखंड रेखा है जो एक समुद्र से दूसरे समुद्र को छूती है। उपग्रह-रहित युग के कवि के लिए यही पूरी भूमि का स्वाभाविक मापदंड था।
दोनों एक ही महासागर हैं: अरब सागर और बंगाल की खाड़ी अलग-अलग महासागर नहीं हैं। जैसा अध्याय 2 में पढ़ा, ये हिंद महासागर की ही दो भुजाएँ हैं और सभी महासागर आपस में जुड़े हुए हैं।