कक्षा ६ सामाजिक विज्ञान अध्याय 3 पाठ्य प्रश्न के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन2026-09-19
प्र1.
'पश्चिमी से पूर्वी समुद्र तक' से क्या तात्पर्य है? चित्र 5.2 में क्या आप इनकी और 'पर्वतों के देवता' की स्थिति को दिखा सकते हैं?चित्र 5.2, पृष्ठ 76 (अध्याय 5) — भारतीय उपमहाद्वीप का भौतिक मानचित्र जिसमें कुछ नदियाँ प्रदर्शित हैं। पुनःचित्रित।
उत्तर
कालिदास यहाँ भारतीय उपमहाद्वीप की पूरी चौड़ाई का वर्णन कर रहे हैं। भूगोल की दृष्टि से श्लोक तीन चीजों के नाम लेता है —
श्लोक में
आज इसे क्या कहते हैं
कहाँ है
पश्चिमी समुद्र
अरब सागर
उपमहाद्वीप के पश्चिम (बाईं ओर) — गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक और केरल के तट पर; यह हिंद महासागर की एक शाखा है
पूर्वी समुद्र
बंगाल की खाड़ी
पूर्व (दाईं ओर) — पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के तट पर; यह भी हिंद महासागर की शाखा है
'पर्वतों के देवता' (हिमालय)
हिमालय
पूरे उत्तर में फैली विशाल श्रृंखला — जम्मू-कश्मीर और लद्दाख से हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, नेपाल, सिक्किम और भूटान होते हुए अरुणाचल प्रदेश तक
चित्र 5.2 (अध्याय 5 में दिया भारतीय उपमहाद्वीप का भौतिक मानचित्र) पर इन्हें कैसे दिखाएँ:
मानचित्र के सबसे ऊपर आर-पार फैली भूरी पट्टी खोजिए — यही हिमालय है, 'पर्वतों का देवता'।
इस पट्टी के साथ पश्चिम की ओर चलिए, जहाँ यह समुद्र के निकट आती है: उस ओर का जल अरब सागर है।
अब पूर्व की ओर चलिए, जहाँ ब्रह्मपुत्र दक्षिण की ओर मुड़ती है: उस ओर का जल बंगाल की खाड़ी है।
अब एक समुद्र से दूसरे समुद्र तक अपनी उँगली पर्वतों के साथ-साथ फेरिए — यही "पश्चिमी से लेकर पूर्वी समुद्र तक फैला हुआ" का अर्थ है।
कवि उसे मापदंड क्यों कहते हैं: श्लोक कहता है कि हिमालय "पृथ्वी को नापने का मापदंड" है। मानचित्र के ऊपरी भाग पर पैमाना रखकर देखिए — यह श्रृंखला लगभग 2400 किलोमीटर लंबी सीधी, अखंड रेखा है जो एक समुद्र से दूसरे समुद्र को छूती है। उपग्रह-रहित युग के कवि के लिए यही पूरी भूमि का स्वाभाविक मापदंड था।
दोनों एक ही महासागर हैं: अरब सागर और बंगाल की खाड़ी अलग-अलग महासागर नहीं हैं। जैसा अध्याय 2 में पढ़ा, ये हिंद महासागर की ही दो भुजाएँ हैं और सभी महासागर आपस में जुड़े हुए हैं।
प्र2.
गंगा का उल्लेख क्यों किया गया है? (संकेत – इसके अनेक कारण हो सकते हैं।)
उत्तर
संकेत महत्वपूर्ण है — इसका कोई एक ही उत्तर नहीं है। कालिदास एक साथ कई कारणों से गंगा का उल्लेख करते हैं, और अच्छा उत्तर वही है जो एक से अधिक कारण दे।
क्योंकि गंगा का जन्म हिमालय में ही होता है। यह नदी उत्तराखंड के गंगोत्री हिमनद से निकलती है। गंगा का नाम लेना पर्वत की महानता कहने का सबसे छोटा रास्ता है — वह केवल खड़ा नहीं है, वह भारत को उसकी सबसे बड़ी नदी देता है।
क्योंकि वह पर्वत की शीतलता लोगों तक पहुँचाती है। श्लोक में वायु "गंगा के झरनों की फुहारों" के साथ नीचे आती है, देवदार के वृक्षों को हिलाती है और मृगों की खोज में घूमते पर्वतवासियों की थकान मिटाती है। नदी मानो पर्वत की साँस है जो मनुष्य तक पहुँचती है।
क्योंकि गंगा भारत की सर्वाधिक पवित्र नदी है। उसके तटों पर, स्रोत पर और संगम स्थलों पर असंख्य त्योहार और धार्मिक कृत्य होते हैं। उसका नाम लेने से पर्वत भी पवित्र हो जाता है।
क्योंकि उसके अवतरण की कथा है। पुराणों के अनुसार गंगा आकाश से इतने वेग से उतरी कि शिव ने उसे हिमालय पर अपनी जटाओं में धारण किया और फिर धीरे-धीरे मुक्त किया। श्लोक का 'झरनों की फुहार' वाला दृश्य उसी कथा की ओर संकेत करता है।
पारिवारिक संबंध के कारण। इसी परंपरा में गंगा और पार्वती दोनों हिमवान (हिमालय) की पुत्रियाँ हैं। कुमारसंभव पार्वती और शिव के विवाह की कथा है — इसलिए आरंभ में ही गंगा का नाम लेकर कवि उस परिवार का परिचय दे देते हैं जिसकी कथा वे कहने जा रहे हैं।
दोनों श्लोक मिलकर क्या दिखाते हैं: कालिदास के लिए हिमालय केवल दृश्य नहीं है। वह एक जीवंत उपस्थिति है — पृथ्वी को नापने वाला देवता, एक पिता, एक पवित्र नदी का स्रोत और अपने ऊपर बसे लोगों को छाया, वायु और जल देने वाला। अध्याय का 'स्थलरूप और संस्कृति' वाला बिंदु यही है।
इसी अध्याय से कुछ भूगोल: हिमालय से निकलने वाली नदियों में गंगा विशालतम है, लगभग 2500 किलोमीटर लंबी। यमुना और घाघरा जैसी सहायक नदियाँ भी हिमालय से निकलती हैं, जबकि सोन गंगा के मैदान के दक्षिण में पड़ने वाली विंध्य श्रृंखला से निकलती है।