कक्षा ६ सामाजिक विज्ञान अध्याय 3 स्थलरूप एवं जीवन के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-19
इस अध्याय के बारे में
स्थलरूप पृथ्वी की सतह का एक भौतिक स्वरूप है। स्थलरूप लाखों वर्षों में आकार लेते हैं और इन्हें व्यापक रूप से तीन श्रेणियों में बाँटा जाता है — पर्वत, पठार और मैदान (चित्र 3.1)। हर स्थलरूप की अपनी जलवायु, अपने पेड़-पौधे, जीव-जंतु और अपनी जीवन-शैली होती है। पर्वत आस-पास की भूमि से बहुत ऊँचे होते हैं — चौड़ा आधार, खड़ी ढलान और सँकरा शिखर । हिमालय जैसे नवीन पर्वतों की चोटियाँ ऊँची और नुकीली हैं तथा इनकी ऊँचाई आज भी बढ़ रही है; अरावली जैसे प्राचीन पर्वत अपरदन से गोल हो चुके हैं। कम ऊँचाई वाले, गोल शीर्ष वाले ऊँचे स्थान पहाड़ी कहलाते हैं। पठार आस-पास की भूमि से उठा होता है और इसकी सतह प्राय: चपटी होती है, कुछ पार्श्व सीधी ढलान वाले होते हैं। पठारों को 'खनिजों का भंडार-गृह' कहा जाता है — छोटा नागपुर के पठार में लौह, कोयला और मैगनीज हैं — तथा यहाँ जोग, हुंडरू और नहकालीकाई (340 मीटर) जैसे भव्य जल प्
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| शब्द | अर्थ | अध्याय में कहाँ | उदाहरण |
|---|---|---|---|
| स्थलरूप | पृथ्वी की सतह का एक भौतिक स्वरूप | पृष्ठ 42, चित्र 3.1 | पर्वत, पठार और मैदान |
| तुंगता (एल्टीट्यूड) | समुद्र तल से किसी वस्तु की ऊँचाई | हाशिया, पृष्ठ 42 | एवरेस्ट गिरिशृंग की तुंगता 8848 मीटर |
| पर्वत | आस-पास की भूमि से बहुत ऊँचा स्थलरूप — चौड़ा आधार, खड़ी ढलान, सँकरा शिखर | पृष्ठ 42 | कंचनजुंगा, नेपाल और सिक्किम के बीच |
| पहाड़ी | पर्वत से कम ऊँचा स्थान, जिसकी चढ़ाई कम खड़ी और शीर्ष गोल हो | पृष्ठ 43 | अरावली श्रृंखला की गोल पहाड़ियाँ |
| पर्वत श्रृंखला | आपस में जुड़े पर्वतों की एक कतार या समूह | पृष्ठ 45 | हिमालय, आल्प्स, एंडीज |
| वर्षण | वायुमंडल से भूमि पर किसी भी रूप में जल का गिरना | हाशिया, पृष्ठ 43 | वर्षा, हिमपात और ओले |
| पर्वतीय वन | पर्वतीय क्षेत्र में उगने वाले वनों का एक प्रकार | पृष्ठ 46 | चीड़ (पाइन), फर, स्प्रूस, देवदार |
| वेदिका (सीढ़ीदार) कृषि | ढलान को काटकर सीढ़ीनुमा स्थान पर की जाने वाली कृषि | पृष्ठ 48–49, चित्र 3.5 | उत्तराखंड और पूर्वोत्तर भारत के सीढ़ीदार खेत |
| पठार | आस-पास की भूमि से उठा हुआ स्थलरूप, जिसकी सतह प्राय: चपटी होती है | पृष्ठ 51 | दक्कन का पठार; तिब्बत का पठार |
| मैदान | विस्तृत सपाट या हल्का तरंगित धरातल, ऊँचाई सामान्यत: 300 मीटर से कम | पृष्ठ 53 | गंगा का मैदान |
| तलछट | नदी द्वारा बहाकर लाए और जमा किए गए रेत, चट्टानों के कण और गाद | पृष्ठ 53 | गंगा के मैदान को उपजाऊ बनाने वाली गाद |
| संगम स्थल | दो या दो से अधिक नदियों के मिलने का स्थान | हाशिया, पृष्ठ 55 | प्रयागराज में गंगा और यमुना का संगम |
अभ्यास
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