अन्वेषण अध्याय 3 स्थलरूप एवं जीवन के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-05
इस अध्याय के बारे में
स्थलरूप पृथ्वी की सतह का एक भौतिक स्वरूप है। स्थलरूप लाखों वर्षों में आकार लेते हैं और इन्हें व्यापक रूप से तीन श्रेणियों में बाँटा जाता है — पर्वत, पठार और मैदान (चित्र 3.1)। हर स्थलरूप की अपनी जलवायु, अपने पेड़-पौधे, जीव-जंतु और अपनी जीवन-शैली होती है। पर्वत आस-पास की भूमि से बहुत ऊँचे होते हैं — चौड़ा आधार, खड़ी ढलान और सँकरा शिखर । हिमालय जैसे नवीन पर्वतों की चोटियाँ ऊँची और नुकीली हैं तथा इनकी ऊँचाई आज भी बढ़ रही है; अरावली जैसे प्राचीन पर्वत अपरदन से गोल हो चुके हैं। कम ऊँचाई वाले, गोल शीर्ष वाले ऊँचे स्थान पहाड़ी कहलाते हैं। पठार आस-पास की भूमि से उठा होता है और इसकी सतह प्राय: चपटी होती है, कुछ पार्श्व सीधी ढलान वाले होते हैं। पठारों को 'खनिजों का भंडार-गृह' कहा जाता है — छोटा नागपुर के पठार में लौह, कोयला और मैगनीज हैं — तथा यहाँ जोग, हुंडरू और नहकालीकाई (340 मीटर) जैसे भव्य जल प्
अभ्यास
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- पाठ्य प्रश्न
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- प्रश्न, क्रियाकलाप और परियोजनाएँ