प्र1.
क्या आप अपने प्रदेश की नदी के स्रोतों अथवा संगम के कुछ उदाहरण दे सकते हैं जिन्हें किसी समुदाय द्वारा पवित्र स्थल माना जाता है?
उत्तर
हाँ — भारत के लगभग हर भाग में ऐसे स्थल हैं। संगम दो या दो से अधिक नदियों के मिलने का स्थान है और स्रोत वह स्थान जहाँ नदी जन्म लेती है; दोनों को व्यापक रूप से पवित्र माना जाता है।
| प्रदेश | पवित्र स्रोत या संगम | क्या है |
|---|---|---|
| उत्तराखंड | गोमुख (गंगोत्री हिमनद) | भागीरथी-गंगा का स्रोत; प्रमुख तीर्थ |
| उत्तराखंड | देवप्रयाग | अलकनंदा और भागीरथी का संगम — इसके बाद नदी 'गंगा' कहलाती है। ऊपर चार और प्रयाग हैं — विष्णुप्रयाग, नंदप्रयाग, कर्णप्रयाग और रुद्रप्रयाग |
| उत्तर प्रदेश | प्रयागराज (त्रिवेणी संगम) | गंगा और यमुना का संगम; यहाँ माघ मेला और कुंभ मेला लगता है |
| मध्य प्रदेश | अमरकंटक | नर्मदा और सोन का स्रोत |
| महाराष्ट्र | त्र्यंबकेश्वर, नासिक के पास | गोदावरी का स्रोत |
| कर्नाटक | तलकावेरी, कोडगु | कावेरी का स्रोत |
| कर्नाटक | तिरुमकूडलु नरसीपुर (टी. नरसीपुर) | कावेरी और कपिला का संगम; यहाँ कुंभ मेला लगता है |
| बिहार | सोनपुर / हाजीपुर | गंगा और गंडक का संगम; प्रसिद्ध सोनपुर मेला |
| पंजाब | कीरतपुर / आनंदपुर क्षेत्र | सतलुज के तट पर सिख परंपरा से जुड़े स्थल |
नमूना उत्तर: "हमारे जिले में बेतवा, हमीरपुर के पास यमुना से मिलती है। लोग कार्तिक पूर्णिमा पर वहाँ स्नान करते हैं, त्योहारों के बाद मूर्तियों का विसर्जन करते हैं, और हर वर्ष तट पर एक छोटा मेला लगता है।"
स्रोत और संगम ही क्यों: स्रोत वह स्थान है जहाँ जल पृथ्वी से प्रकट होता है — एक आरंभ, और आरंभ पवित्र लगते हैं। संगम वह स्थान है जहाँ दो अलग धाराएँ एक हो जाती हैं — एक मिलन, जो एकता का प्रतीक है। केवल भारत में ही नहीं, विश्व-भर के समुदायों ने ऐसे स्थानों को देवस्थलों और त्योहारों से चिह्नित किया है।