अन्वेषण अध्याय 3 आइए पता लगाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
गंगा के मैदान का रंग कौन-सा है?
उत्तर

गंगा का मैदान वह चौड़ी हरी पट्टी है जो चित्र के मध्य में, पर्वतों के ठीक नीचे, बाएँ से दाएँ फैली हुई है।

  • हरा रंग वनस्पति का है — मुख्यत: फसलों का। मैदान खेतों का एक विशाल विस्तार है, इसलिए उपग्रह से यह लगातार हरा दिखाई देता है।
  • ध्यान से देखिए तो हरे में से हल्की चाँदी जैसी टेढ़ी-मेढ़ी रेखाएँ गुजरती दिखेंगी — ये गंगा और उसकी सहायक नदियाँ हैं, अपने चौड़े रेतीले तटों के साथ।
  • दाईं ओर (पूर्व में) हरा रंग धुँधली धूसर-सफेद चादर में बदल जाता है। यह गंगा के निचले मैदान पर छाया कुहासा और धुँध है — अध्याय में बताए प्रदूषण की याद दिलाता हुआ।
यहाँ हरा रंग उपजाऊपन क्यों बताता है: नदियाँ हिमालय से तलछट — रेत, चट्टानों के कण और गाद — बहाकर लाती हैं और मैदान में जमा कर देती हैं। जमा हुई यह मिट्टी गहरी, मुलायम और समृद्ध होती है, इसलिए लगभग हर वर्ग किलोमीटर पर खेती हो सकती है। उपग्रह चित्र का रंग वास्तव में नीचे की मिट्टी की रिपोर्ट है।
प्र2.
सफेद रंग किस वस्तु को दर्शा रहा है?
उत्तर

चित्र के ऊपरी भाग और ऊपर-दाईं ओर फैला सफेद विस्तार हिमालय और तिब्बत के पठार पर जमी हिम और बर्फ है, जिसमें कुछ बादल भी मिले हुए हैं।

सफेद भाग का हिस्सावह क्या है
हरे मैदान के ऊपर की नुकीली, कटकदार सफेद रेखास्थायी हिम से ढँकी ऊँची हिमालय श्रृंखला — कटकों के बीच की गहरी छायादार घाटियाँ तक दिखाई देती हैं
उसके आगे ऊपर-दाईं ओर फैली चौड़ी, कोमल सफेद चादरहिम से ढँका तिब्बत का पठार, तथा उसके ऊपर छाए बादल
सफेद में दिखते छोटे गहरे नीले धब्बेपठार पर स्थित ऊँचाई वाली झीलें
यह पूरे वर्ष सफेद क्यों रहता है: उन ऊँचाइयों पर वायु इतनी ठंडी है कि हिम कभी नहीं पिघलती और पर्वत स्थायी रूप से हिम से ढँके रहते हैं (पृष्ठ 43)। नीचे की ओर हिम हर ग्रीष्म में पिघलती है — और वही पिघला जल ठीक नीचे बहने वाले हरे मैदान की नदियों को पोषित करता है।
सीमा-रेखा देखिए: सफेद और हरा एक आश्चर्यजनक रूप से स्पष्ट रेखा पर मिलते हैं। वही रेखा है जहाँ पर्वत समाप्त होते हैं और मैदान आरंभ होता है — पृथ्वी की सबसे स्पष्ट प्राकृतिक सीमाओं में से एक, जो अंतरिक्ष से भी दिखाई देती है।
प्र3.
उपग्रह चित्र के नीचे बाईं ओर भूरे रंग का फैलाव क्या दर्शा रहा है?
उत्तर

नीचे बाईं ओर का भूरा और बालू जैसा विस्तार बहुत कम वनस्पति वाली शुष्क भूमि है — राजस्थान का थार मरुस्थल और उसके दक्षिण-पूर्व में फैले नंगे, चट्टानी ऊँचे प्रदेश।

  • अंतरिक्ष से भूरा रंग का अर्थ है नंगी मिट्टी, बालू या चट्टान का दिखना, क्योंकि उसे ढँकने वाले पौधे बहुत कम हैं।
  • भारत के इस उत्तर-पश्चिमी भाग में बहुत कम वर्षा होती है, इसलिए यहाँ वह लगातार फसल-आवरण संभव नहीं जो गंगा के मैदान को हरा बनाता है।
  • और नीचे भूरा रंग धब्बेदार तथा लालिमा लिए हो जाता है — वह मध्य भारत का सूखा, पथरीला प्रदेश है, जहाँ पतली मिट्टी सीधे चट्टान पर टिकी है।
चित्र 3.9 में रंगक्या दर्शाता हैक्यों
हरागंगा का मैदाननदियों की तलछट से बनी गहरी उपजाऊ मिट्टी और पर्याप्त जल — लगातार फसलें
सफेदहिमालय और तिब्बत का पठारबहुत अधिक ऊँचाई पर हिम और बर्फ, साथ में बादल
भूरा / बालू जैसाउत्तर-पश्चिम की शुष्क भूमिबहुत कम वर्षण, इसलिए पौधों के स्थान पर नंगी बालू और चट्टान
एक ही चित्र में पूरा पाठ: तीन स्थलरूप और तीन जलवायु एक ही फ्रेम में साथ-साथ हैं — हिम से सफेद पर्वत, हरा उपजाऊ मैदान और भूरा शुष्क विस्तार। ये रंग सजावट नहीं हैं; हर रंग बता रहा है कि उस भूमि तक कितना जल पहुँचता है और वह किस प्रकार के जीवन को सँभाल सकती है।
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