अन्वेषण अध्याय 3 प्रश्न, क्रियाकलाप और परियोजनाएँ

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
आपका कस्बा या गाँव या नगर किस प्रकार के स्थलरूप पर स्थित है? इस अध्याय में बताई गई विशेषताओं में से कौन-सी विशेषताएँ आप अपने आस-पास देखते हैं?
उत्तर

उत्तर आपके अपने स्थान का विवरण होना चाहिए। इसे दो चरणों में कीजिए।

चरण 1 — स्थलरूप पहचानिए। अध्याय की अपनी कसौटियाँ लगाइए —

यदि आप देखते हैं …तो आप हैं …
चारों ओर समतल भूमि, कहीं पहाड़ी नहीं, गहरी मुलायम मिट्टी, धान या गेहूँ के खेत, नहरें, धीमी चौड़ी नदीमैदान में
ऊँची पर ऊपर से चपटी भूमि, सतह के पास चट्टान, पतली लाल या काली मिट्टी, कहीं किनारे पर तीखी ढलान, पास में खदानें या खानेंपठार पर
खड़ी ढलानें, घुमावदार सड़कें, तेज जलधाराओं वाली घाटियाँ, सीढ़ीदार खेत, चीड़ या देवदार के वन, कड़ी सर्दीपर्वत या पहाड़ी क्षेत्र में
बालू, बहुत कम वर्षा, काँटेदार झाड़ियाँ, ऊँटमरुस्थल में

चरण 2 — अध्याय की जिन विशेषताओं की ओर आप वास्तव में उँगली उठा सकते हैं, उन्हें लिखिए, जैसे — तुंगता, शिखर, ढलान, घाटी, वेदिका कृषि, पर्वतीय वन, नदी, बाढ़ का मैदान, तलछट, संगम, समुद्र तल, पठार का किनारा, जल प्रपात, खनन, वर्षा या हिम के रूप में वर्षण।

नमूना उत्तर (गंगा के मैदान का कस्बा): "हमारा कस्बा बलिया गंगा के मैदान में है। भूमि हर ओर समतल है और मिट्टी गहरी तथा मुलायम — ठीक वैसी ही जैसी अध्याय के अनुसार तलछट से बनती है। गंगा कस्बे के पास चौड़ी धारा और रेतीले किनारों के साथ बहती है और हर वर्ष कुछ खेतों में बाढ़ आकर ताजी गाद छोड़ जाती है। लगभग सभी लोग खेती करते हैं — धान, गेहूँ और सरसों — और कुछ परिवार नदी में मछली पकड़ते हैं। सौ किलोमीटर तक कोई पहाड़ी नहीं है और मैंने कभी हिम नहीं देखी, केवल वर्षा और कभी-कभी ओले।"
नमूना उत्तर (छोटा नागपुर के पठार का नगर): "राँची छोटा नागपुर के पठार पर, समुद्र तल से लगभग 650 मीटर ऊँचाई पर है। भूमि ऊँची है पर ऊपर से अधिकतर समतल, लाल मिट्टी में से चट्टान झाँकती है और खेतों में बड़े शिलाखंड पड़े हैं। थोड़ी दूर जाने पर पठार एक तीखे किनारे पर समाप्त हो जाता है, जहाँ से सुवर्ण रेखा हुंडरू जल प्रपात के रूप में गिरती है। हमारे राज्य में कोयले और लौह का खनन आम है — ठीक वैसे ही जैसे अध्याय कहता है कि पठार खनिजों के भंडार-गृह हैं।"
प्र2.
आइए, छोटा नागपुर से प्रयागराज और अल्मोड़ा की हमारी आरंभिक यात्रा पर चलें। इस मार्ग में आने वाले तीन स्थलरूपों के बारे में बताइए।
उत्तर

यह यात्रा क्रमश: तीनों स्थलरूपों से होकर गुजरती है — पहले पठार, फिर मैदान, फिर पर्वत।

0 मी.500 मी.1000 मी.1500 मी.2000 मी. छोटा नागपुर पठार ~600 मी. प्रयागराज मैदान ~100 मी. अल्मोड़ा पर्वत ~1600 मी.
यात्रा का ऊँचाई-चित्र। भूमि पठार से उतरकर मैदान में आती है और फिर तेजी से हिमालय की ओर चढ़ जाती है।
स्थानस्थलरूपक्या दिखाई देगा
छोटा नागपुर, झारखंडपठारऊँची पर ऊपर से चपटी भूमि, सतह के पास चट्टान और पतली लाल मिट्टी। झाड़ियाँ और साल के वन, खेतों में शिलाखंड। इस पठार में लौह, कोयला और मैगनीज के प्रचुर भंडार हैं, इसलिए खानें और खदानें आम हैं। सुवर्ण रेखा जैसी नदियाँ इसके किनारे से जल प्रपात के रूप में गिरती हैं — हुंडरू जल प्रपात ऐसा ही एक है।
प्रयागराज, उत्तर प्रदेशमैदानपूरी तरह समतल भूमि, समुद्र तल से केवल लगभग सौ मीटर ऊँची, जिसमें नदियों द्वारा जमा की गई तलछट से बनी गहरी उपजाऊ मिट्टी है। धान, गेहूँ और दालों के खेत क्षितिज तक फैले हैं; गाँव और कस्बे पास-पास हैं, क्योंकि मैदान घनी आबादी वाला है। यहीं गंगा और यमुना मिलती हैं — एक प्रसिद्ध संगम
अल्मोड़ा, उत्तराखंडपर्वतसड़क पहले तराई की पहाड़ियों से चढ़ती है और फिर गहरी घाटियों के ऊपर कटकों पर घूमती है। ढलानों को कृषि के लिए सीढ़ियों में काटा गया है, पहाड़ियों पर चीड़ और देवदार के वन हैं, और स्वच्छ दिन में उत्तर की ओर हिमाच्छादित ऊँचा हिमालय दिखाई देता है। वायु ठंडी और विरल है तथा बस्तियाँ छोटी और बिखरी हुई हैं।
परिवर्तन इतना तीखा क्यों है: पठार पुरानी, कठोर चट्टान है जो घिसने से बची रही। बीच का मैदान चट्टान है ही नहीं — वह नदियों द्वारा लाई गई ढीली तलछट है, इसीलिए समतल और उपजाऊ है। पर्वत नवीन चट्टान हैं जिन्हें आज भी ऊपर धकेला जा रहा है। एक ही सड़क यात्रा में आप पृथ्वी के इतिहास के तीन बिल्कुल अलग अध्याय पार कर जाते हैं।
प्र3.
भारत के कुछ प्रसिद्ध तीर्थ स्थलों की सूची बनाइए। यह भी लिखिए कि वे कौन-से स्थलरूप के अंतर्गत आते हैं।
उत्तर

भारत के तीर्थ स्थल हर स्थलरूप पर फैले हैं। नीचे दी सूची को आप छोटा कर सकते हैं या उसमें अपने स्थान जोड़ सकते हैं —

स्थलरूपतीर्थ स्थलकहाँ
पर्वतकेदारनाथ और बद्रीनाथगढ़वाल हिमालय, उत्तराखंड (चार धाम यात्रा)
पर्वतअमरनाथ गुफा; वैष्णो देवीकश्मीर हिमालय; त्रिकूट पहाड़ियाँ, जम्मू
पर्वतहेमकुंड साहिब; तवांग मठउत्तराखंड; अरुणाचल प्रदेश
पर्वतसबरीमाला; तिरुपति (तिरुमला)पश्चिमी घाट, केरल; पूर्वी घाट की शेषाचलम पहाड़ियाँ, आंध्र प्रदेश
पठार / पहाड़ियाँशिखरजी (पारसनाथ पहाड़ी)छोटा नागपुर का पठार, झारखंड — जैन धर्म का सर्वाधिक पवित्र स्थल
पठार / पहाड़ियाँपालीताणा (शत्रुंजय) और गिरनार; दिलवाड़ा के मंदिरगुजरात की पहाड़ियाँ; अरावली श्रृंखला में माउंट आबू, राजस्थान
पठारशिरडी; पंढरपुर; एलोरा और अजंता की गुफाएँदक्कन का पठार, महाराष्ट्र
मैदानवाराणसी (काशी); प्रयागराज; हरिद्वारगंगा का मैदान — हरिद्वार ठीक वहीं है जहाँ गंगा पर्वतों को छोड़कर मैदान में प्रवेश करती है
मैदानअयोध्या; मथुरा और वृंदावन; बोधगया और सारनाथगंगा-यमुना का मैदान, उत्तर प्रदेश और बिहार
मैदानअमृतसर (हरमंदिर साहिब); अजमेर शरीफपंजाब का मैदान; राजस्थान में अरावली के किनारे
तटीय मैदानपुरी; रामेश्वरम; सोमनाथ; वेलनकन्नीओडिशा का तट; तमिलनाडु; गुजरात का तट
मरुस्थलरामदेवरा; करणी माता मंदिर, देशनोकथार मरुस्थल, राजस्थान
ध्यान देने योग्य पैटर्न: बहुत से तीर्थ स्थल या तो किसी शिखर पर हैं या किसी नदी पर — और प्राय: वहीं जहाँ एक स्थलरूप दूसरे से मिलता है। हरिद्वार वहाँ है जहाँ पर्वत समाप्त होकर मैदान शुरू होता है; प्रयागराज वहाँ जहाँ दो नदियाँ मिलती हैं; केदारनाथ वृक्ष-रेखा से भी ऊपर। सीमाएँ और आरंभ मनुष्य को सदा पवित्र लगते रहे हैं।
सुझाव: अपने राज्य के दो-तीन स्थान इस सूची में जोड़िए और प्रत्येक के आगे उसका स्थलरूप लिखिए। प्रश्न वास्तव में यही चाहता है।
प्र4.
सही या गलत बताइए — • हिमालय गोल शिखरों वाली नवीन पर्वत श्रृंखला है। • पठार प्राय: एक ओर से उठे हुए होते हैं। • पर्वत और पहाड़ियाँ एक ही प्रकार के स्थलरूप हैं। • भारत में पर्वत, पठार और नदियों में एक ही प्रकार के वनस्पति और प्राणी जगत पाए जाते है। • गंगा, यमुना की सहायक नदी है। • मरुस्थल का वनस्पति जगत और प्राणी जगत विलक्षण होता है। • हिम के पिघलने से नदियों में जल आता है। • मैदानों में नदियों द्वारा एकत्र किए गए तलछट भूमि को उपजाऊ बनाते हैं। • सभी मरुस्थल गर्म होते हैं।
उत्तर
क्र.कथनउत्तरक्यों
1हिमालय गोल शिखरों वाली नवीन पर्वत श्रृंखला है।गलतनवीन — हाँ; गोल शिखर — नहीं। हिमालय जैसे नवीन पर्वतों की चोटियाँ ऊँची और नुकीली होती हैं। गोल शीर्ष अरावली जैसी बहुत पुरानी, अपरदित श्रृंखलाओं के होते हैं।
2पठार प्राय: एक ओर से उठे हुए होते हैं।सहीपठार आस-पास की भूमि से उठा होता है और उसकी सतह प्राय: चपटी होती है, तथा "इसके कुछ पार्श्व सीधी ढलान वाले होते हैं"।
3पर्वत और पहाड़ियाँ एक ही प्रकार के स्थलरूप हैं।सहीदोनों ऊँचे स्थान हैं और एक ही व्यापक श्रेणी में आते हैं। पहाड़ी बस कम ऊँची होती है, उसकी चढ़ाई कम खड़ी और शीर्ष गोल होता है; दोनों के बीच कोई निश्चित ऊँचाई-रेखा नहीं है।
4भारत में पर्वत, पठार और नदियों में एक ही प्रकार के वनस्पति और प्राणी जगत पाए जाते हैं।गलतहर स्थलरूप की जलवायु अलग है, इसलिए जीवन भी अलग — पर्वतों में देवदार, मॉस और लाइकेन के साथ याक और हिम तेंदुआ; पठारों पर शुष्क झाड़ियाँ; मैदानों में फसलें, घास और नदी की मछलियाँ।
5गंगा, यमुना की सहायक नदी है।गलतबात उलटी है। यमुना गंगा की सहायक नदी है, जो प्रयागराज में गंगा से मिलती है। सहायक नदी वह है जो किसी बड़ी नदी में जाकर मिलती है।
6मरुस्थल का वनस्पति जगत और प्राणी जगत विलक्षण होता है।सहीअध्याय स्वयं कहता है — मरुस्थल बहुत कम वर्षण वाले शुष्क विस्तार हैं और "उनके वनस्पति जगत और प्राणि जगत विलक्षण ही होते हैं"।
7हिम के पिघलने से नदियों में जल आता है।सहीकम तुंगता पर हिम हर ग्रीष्म में पिघलती है और "जल में बदलने के बाद नदियों में पहुँचती है"। इसीलिए हिमालयी नदियाँ मानसून से पहले भी बहती रहती हैं।
8मैदानों में नदियों द्वारा एकत्र किए गए तलछट भूमि को उपजाऊ बनाते हैं।सहीनदियाँ पर्वतों में रेत, चट्टानों के कण और गाद एकत्र करती हैं, उन्हें मैदान तक बहाकर लाती हैं और जमा कर देती हैं, जिससे "मिट्टी उपजाऊ" बन जाती है।
9सभी मरुस्थल गर्म होते हैं।गलतकुछ गर्म हैं — सहारा, थार। कुछ ठंडे हैं — एशिया का गोबी; कुछ विशेषज्ञ अंटार्कटिका को भी मरुस्थल मानते हैं। मरुस्थल की पहचान शुष्कता है, गर्मी नहीं।
सही: 2, 3, 6, 7, 8
गलत: 1, 4, 5, 9
कथन 1 और 9 का जाल: दोनों आधे सही हैं, और आधा सही वाक्य गलत ही होता है। हिमालय के लिए 'नवीन' सही है, पर 'गोल शिखर' नहीं। 'कुछ मरुस्थल गर्म हैं' सही है, पर 'सभी' नहीं। निर्णय से पहले हर शब्द पढ़िए।
प्र5.
शब्दों के जोड़े बनाइए — एवरेस्ट गिरिशृंग, राफ्टिंग, ऊँट, पठार, गंगा का मैदान, जलमार्ग, किलिमंजारो गिरिशृंग, यमुना — के साथ — अफ्रीका, विश्व की छत, धान के खेत, मरुस्थल, नदी, गंगा, सहायक नदी, पर्वतारोहण।
उत्तर
स्तंभ अजोड़ाक्यों
एवरेस्ट गिरिशृंगपर्वतारोहणविश्व का सबसे ऊँचा पर्वत शिखर, 8848 मीटर। बछेंद्री पाल ने 1984 में और अरूणिमा सिन्हा ने 2013 में इस पर चढ़ाई की।
राफ्टिंगनदीराफ्टिंग तेज बहती नदियों में किया जाने वाला साहसिक खेल है, जैसे ऋषिकेश में गंगा में।
ऊँटमरुस्थलऊँट वह पशु है जो गर्म, शुष्क मरुस्थलीय जीवन के लिए सबसे अधिक अनुकूलित है — जैसे थार में।
पठारविश्व की छततिब्बत के पठार की औसत ऊँचाई 4500 मीटर है, इसीलिए उसे 'विश्व की छत' कहा जाता है।
गंगा का मैदानधान के खेतउपजाऊ गंगा के मैदान में चावल, गेहूँ, मक्का, जौ और मोटे अनाज उगाए जाते हैं।
जलमार्गगंगामैदान में हल्की ढलान होने से नौका-संचालन सुगम है; आज भी गंगा में नौकाओं से लोग और सामान आते-जाते हैं (चित्र 3.10)।
किलिमंजारो गिरिशृंगअफ्रीकापूर्वी अफ्रीका का किलिमंजारो एक पृथक पर्वत है, जो किसी श्रृंखला से संबंधित नहीं है।
यमुनासहायक नदीयमुना गंगा की सहायक नदी है — वह हिमालय से निकलकर प्रयागराज में गंगा से मिलती है।
एवरेस्ट गिरिशृंग → पर्वतारोहण  •  राफ्टिंग → नदी  •  ऊँट → मरुस्थल  •  पठार → विश्व की छत
गंगा का मैदान → धान के खेत  •  जलमार्ग → गंगा  •  किलिमंजारो गिरिशृंग → अफ्रीका  •  यमुना → सहायक नदी
जोड़े बनाने का सुरक्षित तरीका: पहले वे जोड़े बनाइए जिनके बारे में आप निश्चित हैं — किलिमंजारो–अफ्रीका और ऊँट–मरुस्थल — और उन्हें दोनों स्तंभों से काट दीजिए। तब संदेह वाले विकल्प अपने आप कम हो जाते हैं। यहाँ असली जाल केवल नदी और गंगा है — 'राफ्टिंग' के लिए कोई भी तेज नदी चाहिए, जबकि 'जलमार्ग' के लिए वही नदी चाहिए जिसका नाम अध्याय नौका-परिवहन के लिए लेता है।
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