प्र1.
भारत एक प्राचीन भूमि है, जिसे इसके इतिहास के क्रम में कई नाम दिए गए हैं।
उत्तर
यह भूमि अपने किसी भी नाम से कहीं अधिक प्राचीन है, और आधुनिक राष्ट्र से तो और भी अधिक। अध्याय इसके कम से कम दस नाम गिनाता है, जो हजारों वर्षों में फैले हैं।
| लगभग कब | नाम | किसने प्रयोग किया |
|---|---|---|
| कई हजार वर्ष पूर्व | सप्त सैंधव | ऋग्वेद — परंतु केवल उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र के लिए |
| सा.सं.पू. की कुछ शताब्दियों पूर्व से | भारतवर्ष, जम्बूद्वीप | महाभारत — संपूर्ण उपमहाद्वीप के लिए |
| छठी शताब्दी सा.सं.पू. | हिंद, हिदु, हिंदू | फारसी लोग |
| फारसियों के बाद | इंडोई, इंडिके | प्राचीन यूनानी |
| लगभग 250 सा.सं.पू. | जम्बूद्वीप | अशोक, अपने एक शिलालेख में |
| लगभग 2000 वर्ष पूर्व | यिन्तू, यिंदू, तियन्जू | प्राचीन चीनी |
| लगभग 1800 वर्ष पूर्व | हिंदुस्तान | एक फारसी शिलालेख; बाद में भारत पर आक्रमण करने वाले |
| महाभारत के कुछ शताब्दियों बाद | भारत | विष्णु पुराण — और तब से अधिकांश भारतीय भाषाएँ |
| 1950 से | भारत, अर्थात् इण्डिया | भारत का संविधान |
इतने नाम क्यों, और उनका महत्व क्या: नाम स्वयं इतिहास का स्रोत होता है। इनमें से हर नाम किसी वास्तविक भेंट का अभिलेख है — एक वैदिक जन अपनी नदियों को नाम देता हुआ, सिंधु तट पर खड़ी एक फारसी सेना, बुद्ध की भूमि खोजता एक चीनी तीर्थयात्री, पत्थर पर आदेश उत्कीर्ण कराता एक सम्राट। नाम का उद्गम जान लीजिए, तो यह भी जान जाएँगे कि कौन आया, कब आया और किस दिशा से आया।