अन्वेषण अध्याय 5 आगे बढ़ने से पहले...

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
भारत एक प्राचीन भूमि है, जिसे इसके इतिहास के क्रम में कई नाम दिए गए हैं।
उत्तर

यह भूमि अपने किसी भी नाम से कहीं अधिक प्राचीन है, और आधुनिक राष्ट्र से तो और भी अधिक। अध्याय इसके कम से कम दस नाम गिनाता है, जो हजारों वर्षों में फैले हैं।

लगभग कबनामकिसने प्रयोग किया
कई हजार वर्ष पूर्वसप्त सैंधवऋग्वेद — परंतु केवल उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र के लिए
सा.सं.पू. की कुछ शताब्दियों पूर्व सेभारतवर्ष, जम्बूद्वीपमहाभारत — संपूर्ण उपमहाद्वीप के लिए
छठी शताब्दी सा.सं.पू.हिंद, हिदु, हिंदूफारसी लोग
फारसियों के बादइंडोई, इंडिकेप्राचीन यूनानी
लगभग 250 सा.सं.पू.जम्बूद्वीपअशोक, अपने एक शिलालेख में
लगभग 2000 वर्ष पूर्वयिन्तू, यिंदू, तियन्जूप्राचीन चीनी
लगभग 1800 वर्ष पूर्वहिंदुस्तानएक फारसी शिलालेख; बाद में भारत पर आक्रमण करने वाले
महाभारत के कुछ शताब्दियों बादभारतविष्णु पुराण — और तब से अधिकांश भारतीय भाषाएँ
1950 सेभारत, अर्थात् इण्डियाभारत का संविधान
इतने नाम क्यों, और उनका महत्व क्या: नाम स्वयं इतिहास का स्रोत होता है। इनमें से हर नाम किसी वास्तविक भेंट का अभिलेख है — एक वैदिक जन अपनी नदियों को नाम देता हुआ, सिंधु तट पर खड़ी एक फारसी सेना, बुद्ध की भूमि खोजता एक चीनी तीर्थयात्री, पत्थर पर आदेश उत्कीर्ण कराता एक सम्राट। नाम का उद्गम जान लीजिए, तो यह भी जान जाएँगे कि कौन आया, कब आया और किस दिशा से आया।
प्र2.
प्राचीन भारतीयों द्वारा दिए गए नामों में ‘जम्बूद्वीप’ तथा ‘भारत’ सम्मिलित हैं। बाद के समय में ‘भारत’ शब्द अधिक प्रचलित हुआ। अधिकांश भारतीय भाषाओं में यही नाम मिलता है।
उत्तर

ये दोनों अपने ही घर के महान नाम हैं — और दोनों बहुत भिन्न सामग्री से बने हैं।

जम्बूद्वीपभारत
अर्थजामुन वृक्ष के फल के द्वीप’ — जम्बुल या मालाबार प्लम, भारत में पाया जाने वाला पेड़भरत के देश’ (भारतवर्ष), जो लोगों का एक प्रमुख वैदिक समूह था; बाद में कई महाराजाओं का नाम भी ‘भरत’ रहा
किस पर आधारितएक वनस्पति पर — भूमि में उगने वाली वस्तुएक जन-समूह पर — भूमि में रहने वाले लोग
सर्वप्रथम कहाँमहाभारत में; फिर लगभग 250 सा.सं.पू. के अशोक के शिलालेख में‘भरत’ ऋग्वेद में; ‘भारतवर्ष’ महाभारत में; ‘भारत’ विष्णु पुराण में
आगे क्या हुआधीरे-धीरे रोज़ के प्रयोग से हट गयासर्वत्र फैल गया और आज भी हमारा नाम है — उत्तर भारत में भारत, दक्षिण भारत में भारतम्, तथा संविधान के दो आधिकारिक नामों में से एक
‘भारत’ ही क्यों टिका: जिस भूमि पर रहने वाले लोगों से लिया गया नाम, उसे वहाँ रहने वाला हर व्यक्ति अपना सकता है, चाहे वह कोई भी भाषा बोलता हो — और ठीक यही हुआ। विष्णु पुराण के समय तक इस नाम के साथ एक स्पष्ट भौगोलिक परिभाषा भी जुड़ चुकी थी (“समुद्र के उत्तर में और हिमाच्छादित पर्वतों के दक्षिण में”), अत: यह अब किसी एक समूह के देश का नहीं, संपूर्ण भूमि का नाम बन गया। परिभाषा-सहित नाम, परिभाषा-रहित नाम से कहीं अधिक उपयोगी होता है।
क्या आप जानते हैं? जिस जामुन से ‘जम्बूद्वीप’ नाम बना, वह वही बैंगनी फल है जो हर गर्मी में भारतीय बाज़ारों में बिकता है। संपूर्ण उपमहाद्वीप का एक प्राचीन नाम गाँव के एक साधारण पेड़ से आया — किसी राजा, देवता या विजेता से नहीं।
प्र3.
भारत आने वाले विदेशी आगंतुकों और आक्रमणकारियों ने भारत के लिए सिंधु या सिंधु नदी आधारित नामों को अपनाया। इसके परिणामस्वरूप ‘हिंदू’, ‘इंडोई’ तथा अंतत: इंडिया जैसे नाम बने।
उत्तर

इस अध्याय का हर विदेशी नाम एक ही भारतीय शब्द से निकला है — सिंधु, अर्थात नदी। तीनों शृंखलाओं का पीछा कीजिए और देखिए वह शब्द कैसे रूप बदलता है —

शृंखला 1 (पृष्ठ 81): सिंधु → हिंदु → इंडोई / इंडिके → India (लैटिन) → India (अंग्रेजी), Inde (फ्रेंच)
शृंखला 2 (पृष्ठ 81): सिंधु → हिंदू → इंदू → यिंदू / यिन्तू (चीनी)
शृंखला 3 (पृष्ठ 83): सिंधु → हिंद → हिंदुस्तान (फारसी, बाद में अरबी तथा अधिकांश आक्रमणकारी)

दो बातों में सावधानी आवश्यक है —

  • प्राचीन फारसी में ‘हिंदू’ स्थान का नाम था, धर्म का नहीं। अध्याय स्पष्ट कहता है — “प्राचीन फारसी में ‘हिंदू’ पूर्णतया एक भौगोलिक शब्द है। यहाँ इसे हिंदू धर्म से संदर्भित नहीं किया गया है।” इसका अर्थ केवल था ‘सिंधु के उस पार की भूमि और उसके लोग’।
  • ‘हिंदुस्तान’ उतना प्राचीन नहीं जितना लगता है। यह सर्वप्रथम आज से लगभग 1800 वर्ष पूर्व एक फारसी शिलालेख में मिलता है — अर्थात सप्त सैंधव, भारतवर्ष और जम्बूद्वीप के बहुत बाद।
नदी ही क्यों, पर्वत या नगर क्यों नहीं: उपमहाद्वीप की उत्तरी दीवार में गिने-चुने ही उपयोगी दर्रे हैं, और उनमें से हर एक यात्री को सिंधु के मैदानों में उतारता है। पश्चिम से आने वाले को सबसे पहले वही नदी पार करनी पड़ती थी — अत: उसी का नाम उस पार की हर वस्तु का नाम बन गया। दूसरी ओर, जो लोग यहाँ पहले से रह रहे थे उन्हें अपने आपको किसी सीमा के नाम से पुकारने की आवश्यकता ही नहीं थी; उन्होंने भूमि का नाम अपने जन-समूह पर रखा।
परीक्षा के लिए संकेत: यदि पूछा जाए कि “भारत को इसका अंग्रेजी नाम किस नदी से मिला?”, तो उत्तर है सिंधु (इंडस) — और आपको शृंखला सिंधु → हिंदू → इंडोई → India कंठस्थ होनी चाहिए।
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