पृष्ठ 75 पर श्री अरविंद का उद्धरण है —
इसे वाक्यांश-दर-वाक्यांश खोलिए।
| वाक्यांश | अर्थ | अध्याय में इसका प्रमाण |
|---|---|---|
| “प्रारंभिक काल से ही” | हाल में नहीं — हजारों वर्ष पूर्व | ऋग्वेद; महाभारत, जो सा.सं.पू. की कुछ शताब्दियों पूर्व से लिखा जाने लगा |
| “आध्यात्मिक और सांस्कृतिक एकता” | एक शासन नहीं, बल्कि साझे विचार, ग्रंथ, विश्वास और जीवन-शैली | महाभारत गांधार से केरल तक के क्षेत्र जानता है; एक तमिल कविता और एक संस्कृत पुराण एक ही देश को परिभाषित करते हैं |
| “स्थापित हो गई थी” | यह अधूरी या बिखरी हुई नहीं थी; पूरी भूमि तक पहुँची | चित्र 5.4 — महाभारत के क्षेत्रों का “विस्तार उपमहाद्वीप के संपूर्ण भौगोलिक क्षेत्र में मिलता है” |
| “जीवनधारा का अभिन्न अंग” | यह सजावट नहीं थी; यही रोज़ के जीवन की सामग्री थी | वे नाम आज भी जीवित हैं — भारत, भारतम्, तथा संविधान की ‘भारत, अर्थात् इण्डिया’ |
| “हिमालय और दो समुद्रों के बीच” | भारत की एक भौगोलिक परिभाषा: उत्तर की पर्वत-दीवार तथा दोनों ओर अरब सागर एवं बंगाल की खाड़ी | ठीक वही जो विष्णु पुराण कहता है (पृष्ठ 80) और ठीक वही जो चित्र 5.2 दिखाता है |
एक वाक्य में: श्री अरविंद कह रहे हैं कि भारत एक देश बनने से बहुत पहले ही एक संस्कृति बन चुका था — और यह साझी संस्कृति हिमालय और दो समुद्रों से घिरी पूरी भूमि में फैली हुई थी।