कक्षा ६ सामाजिक विज्ञान अध्याय 6 भारतीय सभ्यता का प्रारंभ के लिए एनसीईआरटी समाधान
अद्यतन 2026-09-19
इस अध्याय के बारे में
‘सभ्यता’ केवल ‘बहुत पुराने लोग’ नहीं है — यह एक जाँच-सूची है। अध्याय सात विशेषताएँ बताता है — शासन और प्रशासन का कोई रूप, नगरीकरण (नगर योजना, जल प्रबंधन, जल निकास), विभिन्न प्रकार के शिल्प , आंतरिक और बाहरी व्यापार , लेखन का कोई रूप, कला, स्थापत्य, साहित्य, श्रुति परंपराओं और सामाजिक रीति-रिवाजों से व्यक्त होने वाले सांस्कृतिक विचार , तथा कृषि उत्पादकता — जो गाँव ही नहीं, बल्कि नगरों को भी भोजन उपलब्ध करा सके। भारत की पहली सभ्यता उत्तर-पश्चिम में, दो नदी-प्रणालियों के किनारे पनपी। सिंधु और उसकी पाँच मुख्य सहायक नदियाँ पंजाब और सिंध के मैदानों को सींचती थीं; उससे कुछ पूर्व में सरस्वती नदी हिमालय की तलहटी से हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और गुजरात के कुछ क्षेत्रों से होकर बहती थी। लगभग 3500 सा.सं.पू. से गाँव नगरों में बदले और लगभग 2600 सा.सं.पू. में नगर महानगरों में। इसे ‘भारत का पहला नगरीकरण’ कह
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| शब्द | अर्थ | अध्याय में कहाँ | याद रखने योग्य |
|---|---|---|---|
| सभ्यता | मानव समाज का उन्नत चरण — जिसमें शासन, नगरीकरण, शिल्प, व्यापार, लेखन, सांस्कृतिक विचार और कृषि उत्पादकता हों | पृष्ठ 86–87 | पुस्तक सात विशेषताएँ देती है — सूची के रूप में याद कीजिए |
| धातु विज्ञान | प्रकृति से धातु निष्कर्षण, उन्हें शुद्ध करने और आपस में मिलाने की तकनीकें तथा धातु और उसके गुणों का वैज्ञानिक अध्ययन | हाशिया, पृष्ठ 86 | तांबा + टिन = कांस्य, जो तांबे से कठोर है (पृष्ठ 98) |
| सिंधु-सरस्वती सभ्यता | भारत की सबसे प्राचीन सभ्यता; सिंधु, हड़प्पा अथवा सिंधु-सरस्वती सभ्यता भी कहलाती है | पृष्ठ 88; समय-रेखा चित्र 6.2, पृष्ठ 87 | नगरों का काल लगभग 2600 से 1900 सा.सं.पू. |
| हड़प्पावासी | इस सभ्यता के निवासियों का नाम | पृष्ठ 88, ध्यान रखें | हड़प्पा से, जो 1920–21 में पहला उत्खनित नगर था |
| सहायक नदी | वह नदी जो किसी बड़ी नदी (या झील) में मिलती है | हाशिया, पृष्ठ 88 | सिंधु की पाँच मुख्य सहायक नदियाँ — झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास, सतलज |
| सरस्वती नदी | वह नदी जो कभी हिमालय की तलहटी से हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और गुजरात से होकर बहती थी; आज मौसमी घग्गर-हाकरा | बॉक्स, पृष्ठ 90 | सबसे पहले ऋग्वेद में उल्लेख; बाद के ग्रंथों में इसके सूखने का वर्णन |
| भारत का पहला नगरीकरण | इस क्षेत्र में गाँवों का नगरों में और फिर महानगरों में बदलना | पृष्ठ 88 | गाँव → नगर लगभग 3500 सा.सं.पू. से; नगर → महानगर लगभग 2600 सा.सं.पू. |
| किलेबंदी | आम तौर पर सुरक्षात्मक उद्देश्यों से किसी बस्ती या नगर के चारों ओर बनाई गई एक विशाल दीवार | हाशिया, पृष्ठ 91 | अधिकांश हड़प्पाई नगरों के चारों ओर मिलती है |
| अभिजात वर्ग | समाज का उच्च स्तर — शासक, अधिकारी, प्रशासक और प्राय: पुरोहित | हाशिया, पृष्ठ 91 | संभवत: ये ऊपरी नगर में रहते थे |
| ऊपरी नगर / निचला नगर | हड़प्पाई नगर के दो विशिष्ट भाग | पृष्ठ 91 | धौलावीरा में तीन क्षेत्र थे, दो नहीं (चित्र 6.5) |
| महास्नानागार | मोहनजो-दड़ो का लगभग 12 × 7 मीटर का छोटा किंतु विस्तृत स्नानागार, जिसकी ईंटों पर प्राकृतिक बिटुमन की जल-रोधक परत है | पृष्ठ 91–93, चित्र 6.6 | इसका उद्देश्य आज भी चर्चा का विषय है — राजसी स्नानागार या धार्मिक कुंड |
| जलाशय | विशाल प्राकृतिक या कृत्रिम स्थान, जहाँ जल का भंडारण किया जाता है | हाशिया, पृष्ठ 95 | धौलावीरा : कम से कम छह; सबसे बड़ा 73 मीटर लंबा |
| दलहन | फसलों की श्रेणी, जिसमें सेम, मटर के दाने और दालें सम्मिलित हैं | हाशिया, पृष्ठ 96 | जौ, गेहूँ, मोटे अनाज और कभी-कभी धान के साथ उगाई जाती थी |
| मुहरें | कुछ सेंटीमीटर की हजारों स्टीऐटाइट वस्तुएँ, जिन पर पशु का चित्र और ऊपर कुछ लेखन संकेत हैं | पृष्ठ 98–99, चित्र 6.13 | लिपि अभी तक पढ़ी नहीं जा सकी — यह कभी मत लिखिए कि वह पढ़ ली गई है |
| बंदरगाह | वह संरचना जिसका उपयोग वस्तुओं के आगे परिवहन के लिए नावों को लेने और भेजने में किया जाता है | पृष्ठ 98, चित्र 6.12 | लोथल का बेसिन : 217 मीटर × 36 मीटर |
अभ्यास
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