अन्वेषण अध्याय 6 पाठ्य प्रश्न

अद्यतन2026-09-05

प्र1.
हड़प्पावासियों के खाना पकाने के पात्रों में क्या होता था?
उत्तर

मिट्टी के पात्रों की वैज्ञानिक जाँच से कुछ उत्तर मिले हैं — और सबसे रोचक वे हैं जो अप्रत्याशित थे।

पात्रों में मिलाप्रत्याशित या अप्रत्याशित?यह क्या बताता है
दुग्ध उत्पादप्रत्याशितवे पशु पालते और दूध लेते थे — अध्याय कहता है कि उन्होंने अनेक पशुओं को पाला
हल्दीअप्रत्याशितभोजन में मसाले पड़ते थे, वह केवल उबाला नहीं जाता था। हल्दी आज भी हर भारतीय रसोई में है
अदरकअप्रत्याशितदूसरा मसाला — अर्थात पाक-कला स्वाद का और संभवत: स्वास्थ्य का भी विषय थी
केलाअप्रत्याशितफल का उपयोग होता था, और उसे उगाया या मँगाया जाता रहा होगा

इन्हें शेष अनुभाग से जोड़िए तो हड़प्पाई भोजन-थाली यह बनती है — अनाज : जौ, गेहूँ, कुछ मोटे अनाज, बाजरा, कभी-कभी धान; दलहन : सेम, मटर, दालें; अनेक सब्जियाँ; पालतू पशुओं का मांस; नदी और समुद्र दोनों की मछली; दुग्ध उत्पाद; और मसाले तथा फल। पुस्तक का निष्कर्ष है — “स्पष्ट है कि उनके भोजन में बहुत विविधता थी।”

4,000 वर्ष पुराने पात्र की सामग्री कोई कैसे जान सकता है? पकाने से सूक्ष्म अवशेष मिट्टी में रच जाते हैं — स्टार्च के कण, वनस्पति के क्रिस्टल और रासायनिक चिह्न। वैज्ञानिक पात्र की भीतरी सतह से नमूना खुरचकर प्रयोगशाला में उसका विश्लेषण करते हैं। कूड़े के ढेरों से मिली पशुओं और मछलियों की हड्डियाँ शेष कहानी बताती हैं। यह विज्ञान के साथ काम करता पुरातत्व है — न कोई ग्रंथ, न कोई अभिलेख, फिर भी पूरी भोजन-सूची हाथ लग जाती है।
क्या आप जानते हैं? एक ही पात्र में हल्दी और अदरक आज के भारतीय तड़के के बहुत निकट है। हड़प्पावासियों से आपके घर की रसोई तक चलने वाले सबसे स्पष्ट धागों में से यह एक है।
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