प्र1.
मान लीजिए कि आप हड़प्पा के एक घर में खाना पकाते हैं। आप ऊपर दी गई जानकारी के आधार पर कौन-से व्यंजन बनाएँगे?
उत्तर
आपकी सूची में केवल वही आ सकता है जो अध्याय ने बताया है — आलू, मिर्च, टमाटर, चाय और चीनी नहीं, क्योंकि इनमें से कोई भी उस समय भारत नहीं पहुँचा था। आपकी अनुमत रसोई यह है :
| वर्ग | आप क्या उपयोग कर सकते हैं |
|---|---|
| अनाज | जौ, गेहूँ, कुछ मोटे अनाज, बाजरा, कभी-कभी धान |
| दलहन | सेम, मटर के दाने, दालें |
| सब्जियाँ | अनेक किस्म की — पुस्तक नाम नहीं बताती |
| मांस और मछली | पालतू पशुओं का मांस; नदी और समुद्र की मछली |
| दुग्ध उत्पाद | दूध, दही, मक्खन |
| मसाले और फल | हल्दी, अदरक, केला |
एक पूरी हड़प्पाई थाली, जो सचमुच पकाई जा सकती थी :
- जौ या गेहूँ की रोटियाँ, मिट्टी के गरम तवे पर सेंकी हुई — अनाज हर भोजन का आधार है।
- हल्दी और अदरक के तड़के वाली दाल, चूल्हे पर टेराकोटा के पात्र में पकी हुई। पात्रों के अवशेष बताते हैं कि यह मेल अनुमान नहीं है।
- दही के साथ पकी कोई सब्जी — कढ़ी जैसा व्यंजन, उसी दुग्ध उत्पाद से जो पात्रों में मिला।
- हल्दी-अदरक लगाकर भुनी नदी की मछली, यदि घर लोथल या मोहनजो-दड़ो जैसे जल के निकट है।
- अंत में केला — सूची की एकमात्र मीठी वस्तु।
नमूना उत्तर : “अपनी हड़प्पाई रसोई में मैं पत्थर की चक्की पर जौ पीसकर मिट्टी के तवे पर रोटियाँ सेंकूँगा/सेंकूँगी। साथ में टेराकोटा के पात्र में थोड़ी हल्दी और अदरक डालकर दाल पकाऊँगा/पकाऊँगी और अपनी भैंस का दही रखूँगा/रखूँगी। नदी पास है, इसलिए एक मछली भी भूनूँगा/भूनूँगी। इसमें मिर्च, आलू और चाय नहीं होंगे, क्योंकि हड़प्पावासियों के पास ये थे ही नहीं। भोजन का अंत केले से करूँगा/करूँगी। इस थाली की हर वस्तु का अवशेष वैज्ञानिकों को हड़प्पाई पात्रों या अन्न-भंडारों में सचमुच मिला है।”
इस खेल के पीछे इतिहासकार का नियम : कल्पना स्वतंत्र है, पर प्रमाणों के भीतर। हड़प्पाई दाल में मिर्च डालना कल्पना नहीं, भूल है — मिर्च अमेरिका से भारत लगभग 500 वर्ष पहले आई। क्या छोड़ना है, यह जानना इतिहास में उतना ही आवश्यक है जितना यह जानना कि क्या रखना है।