प्र1.
कुछ लेखन संकेतों के साथ हड़प्पा की इन तीन मुहरों को देखते हुए आपके मन में क्या विचार आता है? क्या आप इनकी कोई व्याख्या देना चाहेंगे? अपनी कल्पनाशक्ति का उपयोग कीजिए।
उत्तर
पहले पृष्ठ 99 पर छपी मुहरों को ध्यान से देखिए। तीनों की बनावट एक जैसी है — ऊपर संकेतों की एक पंक्ति और नीचे एक पशु, बाईं ओर मुँह किए, एक आधार-रेखा पर खड़ा।
| मुहर | कौन-सा पशु | उसमें ध्यान देने योग्य क्या है |
|---|---|---|
| चित्र 6.13.1 | एकशृंगी पशु — एक सींग वाला | हड़प्पाई मुहरों पर सबसे अधिक मिलने वाला पशु, और ऐसा पशु जो प्रकृति में होता ही नहीं — इसलिए वह किसी विचार, कुल या कथा का प्रतीक रहा होगा |
| चित्र 6.13.2 | बैल | वास्तविक, शक्तिशाली, रोज़मर्रा का पशु — वही बल जो हल और गाड़ी खींचता था |
| चित्र 6.13.3 | सींग वाला बाघ | वास्तविक पशु, पर असंभव अंग के साथ। यह भी कल्पना है, चित्रण नहीं |
जो निश्चित है : मुहरें केवल कुछ सेंटीमीटर की हैं; ये स्टीऐटाइट नामक मुलायम पत्थर की हैं, जिसे गरम कर कठोर बनाया जाता था; अनेक बस्तियों की खुदाई में हजारों मुहरें मिली हैं; पशु के ऊपर के संकेत “लेखन प्रणाली” के हैं; और “यह निश्चित है कि ये किसी प्रकार के व्यापार की गतिविधियों से संबंधित हैं।”
जो निश्चित नहीं — और यही अधिक महत्वपूर्ण है :
- लेखन प्रणाली अभी तक समझी नहीं जा सकी है। आज कोई भी एक हड़प्पाई संकेत निश्चय के साथ नहीं पढ़ सकता।
- पशु-चित्रों के प्रतीकात्मक अर्थ भी उतने ही अज्ञात हैं।
- इसलिए आपकी दी हुई कोई भी व्याख्या — नीचे दी गई सहित — केवल सुझाव है, अनुवाद नहीं।
सुझाने योग्य व्याख्याएँ (बॉक्स आपको यही करने को कहता है) :
- व्यापारी का नाम-चिह्न। माल की गठरी पर लगी गीली मिट्टी पर दबाकर यह बताया जाता होगा कि गठरी किसकी है — मुहर या हस्ताक्षर की तरह। यह पुस्तक की अपनी व्याख्या से मेल खाता है : व्यापारियों को “अपने सामान को और एक-दूसरे को पहचानना” था।
- नगर या कार्यशाला का चिह्न, जो बताए कि माल कहाँ से आया।
- परिवार, कुल या श्रेणी का प्रतीक — एक समूह के लिए एकशृंगी, दूसरे के लिए बैल, जैसे विद्यालय में सदन का चिह्न होता है।
- नगर प्रशासन द्वारा व्यापारी को दिया गया अनुज्ञापत्र।
- रक्षक या शुभ प्रतीक, क्योंकि इनमें कल्पित पशु भी हैं।
लिपि का न पढ़ा जाना इतना महत्वपूर्ण क्यों है : लेखन सभ्यता की सात विशेषताओं में से एक है, और हड़प्पावासियों के पास वह स्पष्ट रूप से थी। पर हम उसे पढ़ नहीं सकते, इसलिए हम उनकी भाषा, उनके शासकों के नाम, उनके नियम, उनके देवता और उनकी कथाएँ नहीं जानते। इस अध्याय की हर बात वस्तुओं से निकाली गई है — ईंट, नाली, मनका, हड्डी और पात्र। यदि कभी लिपि पढ़ ली गई, तो यहाँ पढ़ी आधी बातें फिर से लिखनी पड़ सकती हैं।
सावधान : आपको कभी-कभी यह दावा सुनने को मिलेगा कि हड़प्पाई लिपि ‘पढ़ ली गई है’। ऐसे सैकड़ों दावे हुए हैं और एक भी स्वीकृत नहीं है। सही वाक्य वही है जो यह पुस्तक लिखती है : “इस लेखन प्रणाली … के अर्थ को अभी समझा जाना बाकी है।”